बम दस्ते के आने से पहले ही हो गया धमाका

- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
घायलों के अनुसार रैली के बाद गांधी मैदान में कई ज़िदा बमों का पाया जाना भी इस बात की ओर इशारा करता है कि पुलिस की तरफ़ से लापरवाही बरती गई.
हालांकि घटना के बाद शाम को किए गए प्रेस-कांफ़्रेंस में राज्य के पुलिस महानिरीक्षक अभयानंद ने कहा कि रैली से पहले ज़रूरी ‘लेडाउट ड्रिल’ की गई थी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सुरक्षा में चूक से इंकार किया है. लेकिन फिर ऐसे में सवाल यह है कि अगर चूक हुई नहीं तो फिर जगह-जगह बम मिले और फटे कैसे?
घायलों में से एक युवा अमित कुमार ने बताया कि उन्हें लगभग साढ़े बारह बजे के आस-पास एक टाइम-बम सरीखा ज़िंदा बम दिखाई दिया. उन्होंने आगे बताया कि इसकी सूचना उन्होंने वहां तैनात पुलिस के जवान को दी और फिर पुलिस जवान ने फ़ोन पर बम निरोधक दस्ते को इसके बारे में बताया. लेकिन जब वे पुलिस जवान को बम दिखा कर लौट रहे थे, उसी वक़्त हुए धमाके में वे घायल हो गए.
वहीं औरंगाबाद के रहने वाले हरीश कुमार ने बताया कि जब वो एक ज़िंदा बम को पैरों से दूर हटा रहे थे तब उसमें विस्फोट हो गया.
घायल उदय लाल के अनुसार पहला धमाका जहां वे बैठे थे उससे लगभग पचास फ़ुट की दूरी पर हुआ. लेकिन इसके बाद जब वे गांधी मैदान से बाहर निकल रहे थे तो एक दूसरे धमाके की चपेट में आ गए.
पीएमसीएच में 'अव्यवस्था'
बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल पीएमसीएच एक बार फिर आपात स्थिति के लिए तैयार नहीं दिखा. धमाकों के बाद यहां भर्ती किए गए कई घायलों का इलाज जहां एक ओर ज़मीन पर लिटा कर किया जा रहा था तो कई बेड ऐसे भी दिखे जिन पर एक साथ दो घायलों का इलाज किया जा रहा था.

साथ ही घायलों और उनके परिजनों ने यह भी आरोप लागया कि उन्हें ज़रूरी दवाइयां बाहर से लानी पड़ रही थीं. धमाकों में घायल अररिया के प्रकाश मंडल के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें अस्पताल के डॉक्टर हर जांच के लिए एक पर्ची थमा कर ज़रूरी दवाइयां बाहर से लाने को कह रहे हैं.
वहीं कुछ घायलों के परिजन बेहतर इलाज के लिए उन्हें राजधानी के दूसरे निजी अस्पताल में भी ले गए. ऐसे ही एक घायल उमाशंकर राय, जो कि पटना के बेऊर इलाक़े से हैं, के परिजनों का कहना था कि वे पीएमसीएच की कुव्यवरूथा को देखते हुए उन्हें यहां से बाहर ले जा रहे हैं.
नेता और अधिकारियों का तांता लगा रहा
पीएमसीएच मं घायलों का हाल-चाल लेने बिहार भाजपा के कई नेता पहुंचे. इन नेताओं में बिहार विधान मंडल में भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी, बिहार विधान सभा में पार्टी के नेता नंद किशोर यादव और अश्विनी चौबे, गिरिराज सिंह, प्रेम कुमार जैसे बिहार सरकार के पूर्व मंत्री भी शामिल थे.

साथ ही पटना के ज़िलाधिकारी, पटना प्रमंडल के आयुक्त और पटना के सीनियर एसपी भी पीएमसीएच के इमेरजेंसी वार्ड में घायलों का हाल-चाल लेते और पीएमसीएच के अधिकारियों को ज़रूरी निर्देश देते हुए दिखे. घमाकों के बाद पीएमसीएच में बिहार पुलिस बल की एक टुकड़ी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दी गई थी.
'बिहार की जीवटता'
पटना में हुए संभवतः पहले सीरियल बम धमाकों के बाद भी शहर जीवंत बना रहा. न तो दुकानें ही बंद हुईं और न ही सड़कों पर ही सन्नाटा पसरा. धमाकों के बाद भी रैली स्थल सहित पूरे शहर में लगभग सब कुछ सामान्य दिखा.
रैली स्थल गांधी मैदान में हुए धमाकों के बावजूद जुटी भीड़ जमी रही. हर धमाके के बाद कुछ लोग बाहर ज़रूर निकले थे लेकिन ज्यादातर लोगों ने नरेंद्र मोदी को सुनकर ही रैली से लौटना बेहतर समझा. सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहारियों की जीवटता के साथ-साथ रैली में आए लोगों में नरेंद्र मोदी के प्रति पाए जाने वाले आर्कषण से भी जोड़ कर देख रहे हैं.
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