रशीद मसूद की राज्य सभा सदस्यता गई

भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद चार साल की जेल की सज़ा काट रहे कांग्रेस सांसद रशीद मसूद की राज्य सभा की सदस्यता समाप्त हो गई है.
मसूद ऐसे पहले जनप्रतिनिधि बन गए हैं, जिनकी राज्य सभा सदस्यता अदालत से दोषी ठहराने के बाद गई है.
राज्य सभा ने उन्हें अयोग्य करार देने संबंधी अधिसूचना जारी करते हुए उच्च सदन में ख़ाली पद की घोषणा की.
66 वर्षीय मसूद को पिछले महीने सीबीआई की विशेष अदालत ने धोखाधड़ी, अपराध, षड्यंत्र और जालसाजी के लिए दोषी ठहराया था.
सुप्रीम कोर्ट के 10 जुलाई के आदेश के तहत किसी विधायक या सांसद को तब तक अयोग्य नहीं करार दिया जा सकता, जब तक उच्च अदालत में उसकी अपील लंबित हो. शीर्ष अदालत के इस आदेश को पलटने के लिए सरकार ने संसद के मानसून सत्र में एक विधेयक पेश किया लेकिन ये पारित नहीं हो सका.
सीबीआई की सूचना
सीबीआई ने पिछले हफ्ते एक औपचारिक सूचना राज्य सभा भेजकर मसूद के अयोग्य होने संबंधी जानकारी दी थी. अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने इस बारे में कहा था कि जिस दिन सांसद को कोर्ट ने दोषी ठहराया, उसी तारीख से सांसद को अयोग्य करार देकर खाली जगह भरने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए.
विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में 1990 से 1991 तक स्वास्थ्य मंत्री रहे मसूद को देश भर के मेडिकल कालेजों में केन्द्रीय पूल से त्रिपुरा को आवंटित एमबीबीएस सीटों पर अयोग्य उम्मीदवारों को धोखाधड़ी कर नामित करने का अदालत ने दोषी पाया था.
मसूद के बाद चारा घोटाले में दोषी ठहराए गए लालू यादव और जगदीश शर्मा को भी अयोग्य करार देने संबंधी प्रक्रिया लोकसभा में शुरू हो चुकी है.
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