'मोदी का चेहरा हमें 11 वर्षों से सता रहा है'

- Author, अंकुर जैन, अहमदाबाद से
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद एक तरफ़ जहां अहमदाबाद में मोदी के समर्थक ख़ुशियां मना रहे हैं, वहीं नरोदा पाटिया में ख़ामोशी के बादल घिर रहे हैं.
गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों में नरोदा पटिया ने मानवता का सबसे क्रूर चेहरा देखा था. घटना 28 फरवरी 2002 को गोधरा कांड के बाद हुई थी जब इस इलाके में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी.
इस मामले में विशेष अदालत ने मोदी सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी को कुल 28 वर्ष की कैद की सजा सुनाई,जबकि बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
गुजरात दंगों को लेकर मोदी पर आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने अल्पसंख्यकों की रक्षा में कोई कदम नहीं उठाया, लेकिन अदालत में उनके ख़िलाफ़ अभियोग सिद्ध नहीं हुए.
जकिया जाफरी मामले में विशेष जाँच टीम (एसआईटी) को मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ कोई सबूत नहीं मिले.
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इन घटनाओं से आहत होकर मोदी को राजधर्म निभाने की सलाह दी थी.
नरोदा पाटिया के नज़ीर ख़ान पठान ने दंगों के दौरान भूमिगत पानी टंकी में छुपकर अपनी जान बचाई थी.
उन्होंने कहा, “मोदी नक़ाब से चेहरा ढक कर चर्चित हुए. हमें लगता है कि वो अपना असली चेहरा छुपाने के लिए तरह-तरह के नक़ाब ओढ़ते हैं, वो चेहरा जो हमें पिछले 11 वर्षों से सता रहा है. एक दशक बीत जाने के बाद भी उन्होंने हमारे ज़ख्मों पर मरहम लगाने के लिए कभी कुछ नहीं कहा.”
मोदी की ताजपोशी के जश्न के दौरान किसी तरह के हंगामें से बचने के लिए नरोदा पाटिया के ज़्यादातर निवासी अपने घरों में ही क़ैद रहे.
'न्याय की उम्मीद नहीं'
2002 दंगों में अपनी मां और बहन को खो चुके राजा क़ुरैशी कहते हैं, “दंगा पीड़ित तो अभी तक अपनी जान का ख़तरा महसूस करते हैं और न्याय की उम्मीद करते हैं. अब जब मोदी को राष्ट्रीय राजनीति में ऊंचा पद दे दिया गया है तो हमें अब न्याय की भी उम्मीद नहीं रही.”
राजा सिर्फ़ दस साल के थे जब दंगे हुए. दंगाइयों से किसी तरह से उन्होंने अपनी जान बचाई.
वो कहते हैं, “जब तक आसाराम बापू आज़ाद थे, तब तक कोई उनके ख़िलाफ़ डर के मारे नहीं बोलता था, लेकिन अब जब वो जेल में हैं तो अब उनके ख़िलाफ़ रोज़ नए मामले सामने आ रहे हैं. इसी तरह अगर मोदी को भी घेर लिया जाए तो उनकी कई ज्यादतियों का पता चलेगा.”
गुजरात के मोदी सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी को नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में 28 साल की सज़ा सुनाई गई है. नरोदा पाटिया मामले में 32 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.
पटिया में दंगों की एक और चश्मदीद नजमा बीबी कहती हैं, “हमें आज भी मोदी के समर्थकों से धमकियां मिलती हैं. अगर उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में और शक्ति मिल गई तो हम और असहाय महसूस करेंगे. अगर मोदी गुजरात में हुए ग़लत को सही नहीं कर सकते तो हम ये कैसे मान लें कि वो जब केंद्र में आएंगे तो तब सही करेंगे.”
<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> क्लिक करें.</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे<link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="http://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पन्ने पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर </caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












