मुज़फ़्फरनगर में तनाव बरक़रार, 28 की मौत

उत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि हिंसाग्रस्त मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है और अब तक 90 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

राज्य के एडीजी (कानून-व्यवस्था) अरुण कुमार ने पत्रकारों को बताया कि रविवार दोपहर के बाद से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है.

अरुण कुमार ने यह भी कहा कि अगर इस पूरे घटनाक्रम में कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया गया, तो उनके खिलाफ़ कदम उठाए जाएंगे.

उन्होंने बताया कि चूंकि सबसे ज़्यादा हिंसा और मृतक फुगाना थाना क्षेत्र के हैं इसलिए वहाँ के एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है.

अरुण कुमार ने कहा, “सिखेरा थाना में केस दर्ज किया गया है, जहाँ पंचायत के बाद हिंसा शुरू हुई थी. इसमें 40 लोगों पर नामज़द केस दर्ज हुआ है और 1000 अनाम लोगों के खिलाफ़.”

हिंसा की शुरुआत को लेकर चल रही जाँच के बारे में उन्होंने बताया, "एक घटना में दो लड़कों की मौत हो गई थी लेकिन एफ़आईआर में दर्ज लोगों के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिला है. दूसरी एफ़आईआर में मृतक के पिता के ख़िलाफ़ सबूत नहीं मिले हैं. इसलिए उनका नाम हटा दिया गया है."

इससे पहले रविवार को राज्य के गृह सचिव कमल सक्सेना ने बताया था कि हिंसा को काबू करने के लिए <link type="page"><caption> सुरक्षा बल तैनात</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130908_muzaffarnagar_latest_aj.shtml" platform="highweb"/></link> किए गए हैं.

मुज़फ़्फरनगर के कवाल गाँव में दो अलग-अलग समुदायों के तीन युवकों की मौत के बाद तनाव शुरू हुआ था, जिसने अब सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया है.

<link type="page"><caption> पढ़ें- आख़िर क्यों हैं मुज़फ़्फरनगर में तनाव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130906_muzaffarnagar_violence_tensions_dil.shtml" platform="highweb"/></link>

इस बीच मुज़फ़्फरनगर में हुई हिंसा के बाद बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने अखिलेश यादव सरकार की आलोचना करते हुए राष्ट्रपति शासन की माँग है. मायावती ने पत्रकार वार्ता में कहा कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को बिना कोई देर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करनी चाहिए.

फ़र्ज़ी वीडियो और अफ़वाहें

मुज़फ़्फ़रनगर हिंसा, पुलिस, सेना तैनात

गृह सचिव कमल सक्सेना ने अफ़वाहों पर यक़ीन न करने की भी अपील की है. उन्होंने ख़ासतौर पर फ़र्ज़ी वीडियो का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसका मुज़फ़्फ़रनगर में हुई किसी वारदात से संबंध नहीं है.

बीबीसी ने इस वीडियो को पहले ही फ़र्ज़ी बताते हुए इसके प्रसार को रोकने का मुद्दा उठाया था.

सक्सेना ने कहा कि लोग ऐसे किसी वीडियो या अफ़वाह पर ध्यान न दें. इसके ज़रिए समुदायों के बीच में मनमुटाव, भय और शंका पैदा की जा रही है.

कमल सक्सेना ने कहा, "मैं सभी लोगों से अपील करता हूँ कि इस वीडियो को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसी भी घटना के साथ न जोड़ा जाए. इस वीडियो को सिर्फ उत्तेजना पैदा करने के मक़सद से प्रसारित किया जा रहा है. एसएमएस के ज़रिए भी अफ़वाहें फ़ैलाई जा रही हैं."

उन्होंने कहा कि इस दंगे को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी ताक़त का प्रयोग करेगी और सुरक्षाबलों को उपद्रवियों पर नियमानुसार बल प्रयोग की अनुमति दी गई है.

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