मुज़फ़्फरनगर में तनाव बरक़रार, 28 की मौत

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि मुज़फ़्फ़रनगर जिले में जारी सांप्रदायिक तनाव में पिछले दिनों में 28 लोगों की मौत हो चुकी है.
मेरठ में अमर उजाला संपादक राजीव सिंह के मुताबिक मुज़फ़्फ़रनगर में देर रात भी फ़ायरिंग की ख़बरें मिली हैं और हालात अभी भी काबू में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि चिंताजनक बात यह है कि ग्रामीण इलाक़ों में ज़्यादा वारदात हो रही हैं जहां पुलिस और सुरक्षा बल नहीं हैं.
राजीव सिंह का मानना है, "पहले दिन से ही लापरवाही हुई है. 31 अगस्त को एक छेड़खानी का मामला हुआ और उसमें दो लड़कों ने एक युवक की हत्या कर दी थी. लौटते समय दोनों युवकों को मार दिया गया. यह कम्यूनल नहीं था. ग़ुस्सा देखा गया. राज्य सरकार ने तत्काल रातों-रात डीएम और एसएसपी को हटा दिया और नए अफ़सरों को भेज दिया, जो हालात को कंट्रोल नहीं कर पाए. लगातार अनदेखी की गई. 7 अगस्त को पहले ही दिन 10 लोग मारे गए. आला अफ़सर समझ नहीं पाए."
इससे पहले राज्य के गृह सचिव कमल सक्सेना कहा था कि हिंसा को काबू करने के लिए <link type="page"><caption> सुरक्षा बल तैनात</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130908_muzaffarnagar_latest_aj.shtml" platform="highweb"/></link> किए गए हैं जिन्होंने कुछ स्थानों पर फ़ायरिंग भी की है.
कमल सक्सेना के मुताबिक़ पुलिस फ़ायरिंग में कोई हताहत नहीं हुआ है. मुज़फ़्फरनगर शहर के सिविल लाइंस, कोतवाली और नई मंडी थानों में कर्फ्यू ज़ारी है.
मुज़फ़्फरनगर के कवाल गाँव में दो अलग-अलग समुदायों के तीन युवकों की मौत के बाद तनाव शुरू हुआ था, जिसने अब सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया है.
<link type="page"><caption> पढ़ें- आख़िर क्यों हैं मुज़फ़्फरनगर में तनाव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130906_muzaffarnagar_violence_tensions_dil.shtml" platform="highweb"/></link>
इस बीच विपक्षी दलों ने राज्य की समाजवादी पार्टी की सरकार पर स्थिति से निपटने में पूरी तरह नाकाम रहने का आरोप लगाया है.
सेना की तैनाती
सक्सेना ने बताया कि रविवार को सिशौली, शाहपुर, फुगाना, कलापार और भौराकलाँ इलाकों में अलग-अलग वारदात में कुल आठ लोगों की मौत हुई है.
आर्मी के एक कॉलम को शामली में तैनात किया गया है जबकि मुज़फ़्फ़रनगर में सेना के आठ कॉलम तैनात हैं. रविवार को मेरठ में भी आर्मी ने फ़्लैग मार्च किया.

मुज़फ़्फ़रनगर से लौटे बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के अनुसार पुलिसबल, अर्धसैनिक बल और सैन्य बल हिंसा को रोकने में लगे हैं.
गृह सचिव ने हिंसा न रुकने का मुख्य कारण तनाव को ग्रामीण क्षेत्र में फैलना बताया. मुज़फ़्फ़रनगर के ग्रामीण इलाक़ों में फ़ैल रही हिंसा को रोकने के लिए चार पुलिस महानिरीक्षकों को भेजा गया है.
गृह सचिव के मुताबिक़ अभी तक जितनी भी हिंसा की वारदात हुई हैं, सभी में मुक़दमा क़ायम कर अपराधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.
फ़र्ज़ी वीडियो और अफ़वाहें
गृह सचिव कमल सक्सेना ने अफ़वाहों पर यक़ीन न करने की भी अपील की. उन्होंने ख़ासतौर पर फ़र्ज़ी वीडियो का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसका मुज़फ़्फ़रनगर में हुई किसी वारदात से संबंध नहीं है. बीबीसी ने इस वीडियो को पहले ही फ़र्ज़ी बताते हुए इसके प्रसार को रोकने का मुद्दा उठाया था.
सक्सेना ने कहा कि लोग ऐसे किसी वीडियो या अफ़वाह पर ध्यान न दें. इसके ज़रिए समुदायों के बीच में मनमुटाव, भय और शंका पैदा की जा रही है.
कमल सक्सेना ने कहा, "मैं सभी लोगों से अपील करता हूँ कि इस वीडियो को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसी भी घटना के साथ न जोड़ा जाए. इस वीडियो को सिर्फ उत्तेजना पैदा करने के मक़सद से प्रसारित किया जा रहा है. एसएमएस के ज़रिए भी अफ़वाहें फ़ैलाई जा रही हैं."
उन्होंने कहा कि इस दंगे को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी ताक़त का प्रयोग करेगी और सुरक्षाबलों को उपद्रवियों पर नियमानुसार बल प्रयोग की अनुमति दी गई है.
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