चंद घंटे पहले टली फाँसी की सज़ा

- Author, ऋषि पांडे
- पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मध्य प्रदेश के जबलपुर सेंट्रल जेल में पांच बेटियों के हत्यारे मगनलाल की फांसी की सज़ा टल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देर रात फ़ांसी पर रोक लगाने का आदेश दिया.
मगनलाल को गुरुवार सुबह पांच बजे फांसी दी जानी थी और इसकी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं.
लेकिन बुधवार की देर रात <link type="page"><caption> फांसी लगने</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130209_afzal_guru_hanged_pk.shtml" platform="highweb"/></link> से साढ़े पांच घंटे पहले जेल प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाने का आदेश मिला.
मगनलाल पर अपनी पांच मासूम बेटियों को कुल्हाड़ी से काट कर हत्या करने का जुर्म साबित हो चुका है.
मामला
<link type="page"><caption> यह मामला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130514_kodnani_ankur_ra.shtml" platform="highweb"/></link> 11 जून, 2010 का है. पुलिस की चार्जशीट के अनुसार मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के इछावर ग्राम निवासी मगनलाल ने अपनी पांच बेटियों छह साल की फुलकुंवर, पांच साल की सविता, चार साल की लीला, चार साल की आरती और दो साल की जमुना की कुल्हाड़ी से काट कर हत्या कर दी थी.
यह अपराध उसने तब किया था जब उसकी दो पत्नियां संता बाई और बसंता बाई मजदूरी करने घर से बाहर गई हुई थीं.
चार्जशीट के अनुसार मगनलाल शराब पीने का आदी था और वारदात को अंजाम देते वक्त भी वह नशे में था.
बेटियों को मारने के बाद उसने खुद भी पेड़ से लटककर जान देने की कोशिश की थी, लेकिन गांववालों ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया.
तीन साल में एक के बाद एक सभी अदालतों द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद राष्ट्रपति ने 22 जुलाई को उसकी दया याचिका ठुकरा दी थी.
इसके बाद उसकी <link type="page"><caption> फांसी की सजा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/12/121224_rape_capital_punishment_sm.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए 8 अगस्त की तारीख मुकर्रर की गई थी.
फांसी पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी रोकने का आदेश बचाव पक्ष की उस अर्जी पर दिया जिसमें यह दलील दी गई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई पर मगनलाल की अपील खारिज कर दी थी.
जबलपुर के जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर बताते हैं कि मगनलाल को 25 जुलाई को सीहोर जेल से जबलपुर जेल लाया जा चुका था.
उसको फांसी दिए जाने की तैयारियां भी पूरी कर ली गई थीं और बाहर से जल्लाद भी आ चुका था.
जेल अधीक्षक तोमर के मुताबिक, "हमें रात साढ़े ग्यारह बजे कोर्ट का स्टे मिला, इसलिए फांसी रोकनी पड़ी."
उनका कहना है कि आगे कोर्ट का जो भी आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा.
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