कोडनानी के लिए फांसी नहीं मांगेगी मोदी सरकार

माया कोडनानी
इमेज कैप्शन, माया कोडनानी को एक निलची अदालत ने 28 साल की सज़ा सुनाई है
    • Author, अंकुर जैन
    • पदनाम, पत्रकार, अहमदाबाद से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

गुजरात सरकार ने 2002 में हुए नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में पूर्व मंत्री <link type="page"><caption> माया कोडनानी </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130225_rajnath_modi_kodnani_vd.shtml" platform="highweb"/></link>और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी के लिए<link type="page"><caption> मौत की सज़ा के</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130225_kodnani_verdict_rd.shtml" platform="highweb"/></link> लिए अपील करने के अपने फ़ैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है.

कुछ दिन पहले ही गुजरात सरकार ने नरोदा पटिया मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की सलाह पर <link type="page"><caption> कोडनानी, बजरंगी और आठ अन्य </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/08/120831_naroda_sentencing_vk.shtml" platform="highweb"/></link>दोषियों को फ़ांसी की सज़ा के लिए अपील करने को मंजूरी दी थी.

गुजरात सरकार के प्रवक्ता नितिन पटेल ने एक निजी टीवी चैनल से कहा, ''इस मामले में एडवोकेट जनरल से विचार-विमर्श के बाद अंतिम फैसला किया जाएगा.''

पिछले साल अगस्त में एक निचली अदालत ने मोदी की सरकार में मंत्री रहीं और उनकी क़रीबी कोडनानी को 28 साल की कैद की सज़ा सुनाई थी. बजरंगी को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी.

कोडनानी का दोष

<link type="page"><caption> मोदी सरकार में</caption><url href=" http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130409_modi_kolkata_mamata_industry.shtml" platform="highweb"/></link> महिला और बाल विकास मंत्री रहीं कोडनानी को दंगाइयों को उकसाने का दोषी पाया गया था. उन्होंने उस भीड़ का नेतृत्व भी किया जिसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया.

अदालत ने आठ अन्य दोषियों को 31 साल के कैद की सज़ा सुनाई थी.

गुजरात में 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में नरोदा पाटिया में 97 मुसलमानों की हत्या कर दी गई थी. क़ानूनी मामलों के विभाग के प्रभारी वीपी पटेल ने कहा कि सरकार ने अपनी राय एसआईटी को बता दी गई है.

सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि मोदी सरकार ने यह फ़ैसला दक्षिणपंथी संगठनों के दबाव में लिया हो. सूत्र बताते हैं कि इस महीने के शुरू में हुई एक बैठक में प्रदेश के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने इस मामले पर रोक लगाने की सलाह दी थी.

कोडनानी और बाबू बजरंगी के लिए फांसी की सज़ा की मांग करने के फैसले के बाद नरेंद्र मोदी हिंदू संगठनों के निशाने पर आ गए हैं. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इसे हिंदुओं पर हमला बताया है.

कौन कर रहा है विरोध

नरोदा पाटिया की एक पीड़ित
इमेज कैप्शन, नरोदा पाटिया में उग्र भीड़ ने 97 मुसलमानों की हत्या कर दी थी

वहीं कुछ दिन पहले शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में कहा था कि हिंदुओं को लगता था कि नरेंद्र मोदी हिंदुओं के रक्षक हैं. इसमें कहा गया था कि इस देश में हिंदू होना अपराध है. हमें इस बात का दुख है कि हिंदुओं पर घातक प्रहार करने वाले भी हिंदू ही हैं.

शिवसेना ने कहा था कि इस बात पर दो राय नहीं हो सकती कि अपराधी दंडित किए जाएं. लेकिन जब अदालत पहले ही कोडनानी और बजरंगी को कठोर सज़ा सुना चुकी है, तो गुजरात सरकार मृत्युदंड की मांग कर दुनिया को क्या दिखाना चाहती है.

सूत्रों का कहना है कि अगर गुजरात सरकार सज़ा के खिलाफ अपील करने से इनकार करती है तो एसआईटी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा सकती है.

इस मामले में एक गवाह और नरोदा पाटिया निवासी नज़ीर रहीम ख़ान ने कहा,''कोडनानी और बजरंगी को अदालत ने दोषी पाया है. उनके गुनाह को देखते हुए फ़ांसी की सज़ा हो सकती है. अगर गुजरात सरकार की अपील पर उन्हें यह सज़ा मिले तो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने का सपना टूट सकता है. इसलिए यह फैसला लिया गया है.''

सांप्रदायिकता के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा कि नरेंद्र मोदी ख़ुद को धर्मनिरपेक्ष दिखाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने दोनों दोषियों के लिए फांसी की सज़ा की मांग की थी.

लेकिन उनके इस फैसले पर जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और विहिप ने नाराज़गी जताई तो उन्होंने इसे वापस ले लिया.

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