नियमगिरि: वेदांता को नौवीं ग्राम सभा से भी झटका

- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, रायगढ़ा के बिश्मकटक से
जिस समय लंदन में ब्रितानी कंपनी वेदांता की वार्षिक बैठक हो रही है, नियमगिरि क्षेत्र के एक और आदिवासी गांव ने इस कंपनी की खनन परियोजना को नामंजूर कर दिया है.
लांबा में हुई ग्राम सभा के बाद अब परियोजना को अस्वीकार करने वाले गांवों की तादाद नौ हो गई हैं. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कहने पर इनका गठन किया था.
लांबा आदिवासी ग्राम सभा की बैठक का नतीजा भी पहले हुई आठ सभाओं की तरह ही रहा.
<link type="page"><caption> बच गया आदिवासियों का नियमगिरी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2010/09/100901_niyamgiri_gallery_vv.shtml" platform="highweb"/></link>
ग्राम सभा के सदस्य गांव में लगाए गए शामियाने में जमा हुए. उड़िया भाषा में कार्यवाई की घोषणा हुई. लांबा के 38 मौजूद मतदाताओं ने आदिवासियों की स्थानीय ज़बान कुई में अपना फैसला सुना दिया –‘हम नियमगिरि पर्वत में खनन नहीं होने देंगे.’
साल 2003 में राज्य सरकार ने ओडिशा खान निगम और <link type="page"><caption> वेदांता कंपनी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/08/100826_vedanta_rahul_pa.shtml" platform="highweb"/></link> के बीच हुए समझौते के तहत वेदांत को 15 लाख टन बॉक्साइट खनन की इजाज़त दी गई है.
समझौते का विरोध

ये समझौता 30 साल तक के लिए है.
नियमगिरी पर्वत को भगवान और ख़ुद को उनका वंशज मानने वाले डोंगरिया कोंध, झरनिया और कुटिया आदिवासी इस <link type="page"><caption> परियोजना का विरोध</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/business/2010/08/100824_vedanta_rejected_vv.shtml" platform="highweb"/></link> कर रहे हैं.
चंद दिनों पहले मैंने डोंगरिया के मंडोल जानी यानी सबसे बड़े सरदार लदो सिकाका से पूछा कि, "परियोजना से रोज़गार उपलब्ध होंगे तो आप इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?"
उन्होंने कहा, “हम इस जंगल से जुड़े हैं. कंपनी हमें हमारी ज़िंदगी गुज़ारने का तरीक़ा नहीं दे सकती है. वो पैसा देंगे तो भी कोई फ़ायदा नहीं होगा क्योंकि वो नहीं रहेगा.”
19 अगस्त को होने वाली अंतिम ग्राम सभा की बैठक के बाद गांव वालों के फैसले की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी.
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