'मौनमोहन' नहीं हैं मनमोहन: पीएमओ

मनमोहन
इमेज कैप्शन, मनमोहन की छवि बदलने की कोशिश

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर उनके राजनीतिक विरोधी बार-बार आरोप लगाते हैं कि वो बड़े मुद्दों पर चुप्पी साधे रहते हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इस नकारात्मक छवि को लेकर प्रधानमंत्री का कार्यालय खुश नहीं है.

पीएमओ ने मनमोहन की इस छवि को तोड़ने की कोशिश की है और अब प्रधानमंत्री के सभी भाषणों को प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दिया गया है.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बारे में <link type="page"><caption> एक ट्वीट भी किया है</caption><url href="https://twitter.com/PMOIndia" platform="highweb"/></link>. जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने 2004 में कार्यभार संभालने के बाद से 1300 भाषण दिए हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक प्रधानमंत्री ने सिर्फ इस जुलाई में ही तीन भाषण दिए हैं जिनमें उनका 19 जुलाई का भाषण भी है. 19 जुलाई को उद्योगपतियों के संगठन एसोचैम की बैठक में मनमोहन ने कहा था कि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएगी.

भाषणों का ब्यौरा वेबसाइट पर डालने से साफ है कि मनमोहन ख़ामोश रहें या नहीं उनका कार्यालय नहीं चाहता कि मीडिया उनकी खामोशी को लेकर जनता के सामने उनकी गलत छवि पेश करे.

चुप्पी से पहुंचा नुकसान

असल में मनमोहन की इस चुप्पी की वजह से देशी-विदेशी मीडिया ने उनकी आलोचना भी की है. उनकी इस चुप्पी को लेकर उन पर कई चुटकुले बने हैं और इसी चुप्पी की वजह से वो कार्टूनिस्टों के भी पसंदीदा हैं. हालांकि ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खामोश रहना पसंद करते हैं. मनमोहन की इस बात के लिए तारीफ़ भी होती है कि वो तीखे हमलों को भी खामोशी से झेल जाते हैं.

कोयला घोटाले को लेकर भी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे तब उन्होंने उर्दू के एक शेर के साथ जवाब दिया था. मनमोहन ने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा था

"हज़ारों जवाबों से अच्छी है ख़ामोशी मेरी, न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली."

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