काफ़ी दूर चले, काफ़ी चलना बाकी: मनमोहन

प्रधानमंत्री ने कहा की उनके सरकार के द्वारा उठाए गए कदमों का आर्थिक मोर्चे पर असर दिख रहा है लेकिन इसमें वक्त लगेगा.
इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री ने कहा की उनके सरकार के द्वारा उठाए गए कदमों का आर्थिक मोर्चे पर असर दिख रहा है लेकिन इसमें वक्त लगेगा.

यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल की चौथी वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि देश ने इस दौरान मीलों का सफर तय किया है लेकिन अभी और मीलों चलना है.

आर्थिक वृद्घि का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने माना कि ये घटकर पांच प्रतिशत हो गई है लेकिन इसके लिए उन्होंने वैश्विक कारणों को जिम्मेदार बताया. उन्होंने आर्थिक मोर्चे पर सरकार जो कदम उठा रही है उसका असर हो रहा है.

उन्होंने कहा, "आर्थिक स्थिति बदल रही है. मुद्रास्फीति नियंत्रण में आ रही है. वित्तीय घाटों को भी नियंत्रित किया जा रहा है. चालू खाता घाटा अभी ज्यादा है. लेकिन हम इसे भी धीरे धीरे नीचे लाएंगे."

मनमोहन सिंह ने सर्वशिक्षा अभियान, मिड डे मील योजना, ग्राणीम स्वाथ्य सेवा योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी योजनाओं को अपनी सरकार की उपलब्धियों में गिनाया.

साथ ही सूचना के अधिकार और लोकपाल बिल को संसद में पेश किए जाने का श्रेय भी मनमोहन सिंह ने यूपीए सरकार को दिया. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच हो रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

सोनिया का समर्थन

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि वो अपनी जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभा रही है.

सोनिया ने प्रधानमंत्री का समर्थन करते हुए विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए.
इमेज कैप्शन, सोनिया ने प्रधानमंत्री का समर्थन करते हुए विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए.

सोनिया ने कहा, "मैं अपनी इस निराशा को नहीं छिपा सकती हूं कि किस तरह मुख्य विपक्षी पार्टी ने संसद को अपनी संवैधानिक भूमिका और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को पूरा नहीं करने दिया. जिसकी वजह से कई अहम बिल पास नहीं हो पाए."

लेकिन विपक्ष ने यूपीए सरकार को विफलताओं का पुलिंदा बताया है. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं.

सुषमा ने कहा, “बड़े दुख से कहना पड़ता है कि यूपीए में डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री तो हैं, लेकिन नेता नहीं है. नेता तो ना ही अपनी पार्टी के है और ना ही देश के हैं.”

विपक्ष का हमला

साल 2004 में यूपीए गठबंधन सरकार बनने के बाद से ही उसे बाहर से समर्थन दे रहे समाजवादी पार्टी जैसे सहयोगी भी सरकार के कामकाज से खुश नहीं हैं.

सपा नेता कमाल फारूकी ने कहा, "यूपीए के चार साल का कार्यकाल कोई बहुत उम्दा तो नहीं रहा है. जनता उससे संतुष्ट तो नहीं है और चुनाव में उन्हें इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ेगा."

यूपीए गठबंधन की पहली सरकार को समर्थन देने वाले देने वाले वामपंथी कह रहे हैं कि यूपीए 2 सरकार की अकेली उपलब्धि यही है कि इसने चार साल पूरे कर लिये हैं.

सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, “यूपीए2 की सरकार जैसे तैसे चार साल चल गई. इस सरकार की यही इलकौती सफलता है. बस ये सरकार अब तक चली है और चलती जा रही है. यही इसकी उपलब्धि है. इसे छोड़ दें, विफलता के अलावा कुछ नहीं है.”

अगले साल आम चुनाव होने हैं, जिसके लिए सरगर्मियां शुरू भी हो गई है. सरकार ने जहां अपनी योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए व्यापक मुहिम छेड़ी है, वहीं विपक्ष भी चुनावी मूड में है और इसीलिए सरकार पर उसके हमले तेज हो रहे हैं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>