क्यों भगोड़ा है नरेद्र मोदी के राज का 'दबंग'

पीपी पांडे, गुजरात पुलिस अधिकारी
इमेज कैप्शन, पांडे के वकील का कहना है कि वे फरार नहीं हैं.
    • Author, अंकुर जैन
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए अहमदाबाद से

पृथ्वीपाल पांडे उन शर्मीले और विनम्र पुलिस अफ़सरों में शुमार किए जाते थे जो पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते थे.

साल 2003 में <link type="page"><caption> अहमदाबाद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/04/130405_ishrat_encounter_arrest_vd.shtml" platform="highweb"/></link> क्राइम ब्रांच का मुखिया बनने से पहले तक 1982 बैच के इस आईपीएस अधिकारी का करियर विवादों से लगभग दूर ही रहा था.

लेकिन जल्द ही शर्मीला सा यह पुलिस अधिकारी गुजरात पुलिस का 'दबंग' पांडे बन गया.

उनकी अगुवाई में पुलिस की <link type="page"><caption> अपराध शाखा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/01/120125_modi_sc_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> ने 11 कथित चरमपंथियों को मुठभेड़ों में मार दिया. ऐसे आरोप भी लगे कि इन मुठभेड़ों में कई फर्ज़ी थीं.

मारे गए कथित चरमपंथियों में इशरत जहाँ और उनके तीन दोस्त भी शामिल थे.

इशरत जहाँ की कथित <link type="page"><caption> फर्जी मुठभेड़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130701_cbi_ishrat_sb.shtml" platform="highweb"/></link> मामले की जाँच कर रही सरकारी एजेंसी सीबीआई अब इस 'दबंग' पुलिस अफ़सर को पकड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है.

कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़

पीपी पांडे को अब एक भगोड़ा करार दिया जा चुका है और माना जा रहा है कि इस मामले में वो एक अहम कड़ी हो सकते हैं.

उन पर 15 जून 2004 को अहमदाबाद शहर के बाहरी हिस्से में इशरत, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लै, अमजद अली, अकबर अली राणा और जीशान जौहर को एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने की <link type="page"><caption> साजिश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130612_ishrat_encounter_dp.shtml" platform="highweb"/></link> में शामिल होने का आरोप है.

सीबीआई का दावा है कि वह पांडे ही थे जिन्होंने अपराध शाखा के अधिकारियों को एक फर्ज़ी मुठभेड़ में चार कथित <link type="page"><caption> चरमपंथियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/12/111218_ishrat_ml.shtml" platform="highweb"/></link> को मार गिराने की योजना का ब्यौरा दिया था.

पांडे के ही कार्यकाल के दौरान इन कथित चरमपंथियों में से ज्यादातर को मुठभेड़ों में मार दिया गया.

इन पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या या साल 2002 के <link type="page"><caption> गुजरात</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/12/111201_ishrat_cbi_skj.shtml" platform="highweb"/></link> दंगों का बदला लेने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था.

इन मुठभेड़ों में से ज्यादातर की जाँच अलग-अलग एजेंसियाँ कर रही हैं.

हत्या की साज़िश

नब्बे के दशक में पीपी पांडे ने सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर तीन साल काम किया था लेकिन बदली परिस्थितियों में आज वो इस एजेंसी के सबसे वांछित लोगों की सूची में शामिल हैं.

फर्जी मुठभेड़
इमेज कैप्शन, इशरत के मामले में चार जुलाई को चार्जशीट दायर की जा सकती है.

सीबीआई का दावा है कि पांडे ने इंटेलीजेंस ब्यूरो के कुछ अफ़सरों के साथ मिलकर इस कथित फर्जी मुठभेड़ की 'साजिश' रची.

जाँच एजेंसी का कहना है कि इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारी राजेंद्र कुमार ने कथित तौर पर ये सूचना दी कि इशरत और तीन अन्य लोग लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं और नरेंद्र मोदी की हत्या को अंजाम देने के अभियान पर हैं.

मोदी की सरकार में पांडे को अलग-अलग महकमों में तरक्की दी गई.

भगोड़ा करार दिए जाने से पहले वे सीआईडी की अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की हैसियत से काम कर रहे थे.

इस जिम्मेदारी से पहले पांडे पर सीआईडी की गुप्तचर शाखा के प्रमुख का कार्यभार था.

मध्यवर्गीय जीवनशैली

पांडे के साथ काम करने वाले पुलिस अफ़सर उन्हें खरी बात करने वाले अधिकारी के तौर पर जानते हैं.

उनके बारे में यह माना जाता रहा है कि वे अपने काम को गंभीरता से लेते थे और जूनियर अफ़सरों के साथ लगातार बैठकें करते थे.

पांडे के साथ बैठकों में शामिल होने वाले इन अफ़सरों में कभी डीजी वंजारा भी मौजूद थे.

वंजारा इन दिनों सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में जेल में हैं.

अहमदाबाद के भव्य बंगलों में रहने वाले दूसरे पुलिस अफ़सरों के विपरीत पांडे पत्नी और दो बेटों के साथ एक सरकारी क्वॉर्टर में रहते थे.

उनकी जीवनशैली भी मध्य वर्गीय ही रही. उनका एक बेटा इन दिनों लंदन में है और दूसरा अहमदाबाद में ही उनके साथ रहता है.

गिरफ्तारी की कोशिशें

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक पांडे पर इस मामले में अपना बयान न देने के लिए दबाव डाला जा रहा है और यही वजह है कि जाँच एजेंसी उनकी गिरफ्तारी की कोशिशों को पूरी रफ्तार देना चाहती है.

हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब पांडे पर अपने राजनीतिक संरक्षकों को बचाने के आरोप लगे हैं.

इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामला
इमेज कैप्शन, इशरत के कथित फर्जी मुठभेड़ का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

इससे पहले पांडे के दफ्तर से 2002 के दंगों की जाँच से जुड़ी एक सीडी कथित तौर पर गायब हो गई थी.

पुलिस उप महानिरीक्षक राहुल शर्मा ने एक विशेष अदालत को बताया कि उन्होंने कुछ वरिष्ठ नेताओं, नौकरशाहों और पुलिस अफ़सरों के कॉल रिकॉर्ड जमा कर एक सीडी पांडे को सुपुर्द की थी.

इस कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई की तरफ से पैरवी कर रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह पांडे को 'रैम्बो' कहती हैं.

पांडे के वकील के जवाब पर इंदिरा जय सिंह ने कहा, "उन्होंने वास्तव में 'रैम्बो' की तरह काम किया है. 'रैम्बो' या 'लौहपुरुष' को किसी बात से डरना नहीं चाहिए. अगर वे निर्दोष हैं तो अदालत की ओर से जारी किए गए वारंट की इज्जत करते हुए उन्हें कोर्ट में हाजिर होना चाहिए."

दरअसल पांडे के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में फँसाया जा रहा है और वे कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं.

पांडे की पैरवी कर रहे वकील का कहना है कि वे फरार नहीं हैं.

चार जुलाई को चार्जशीट

अदालत में पांडे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उन्हें इस मामले में आईपीएस अधिकारी सतीश वर्मा फँसा रहे हैं.

वर्मा ने सीबीआई की तरफ से इस मुठभेड़ मामले की जाँच की थी.

याचिका में पांडे ने कहा है कि वर्मा उनके करियर से जलते हैं और इस मामले में उन्हें फँसाकर बदला लेना चाहते हैं.

सीबीआई अधिकारियों को लगता है कि अगर वे पांडे के मामले में सच उजागर करने में कामयाब हो गए तो इस कथित फर्जी मुठभेड़ की गुत्थियों को सुलझा सकते हैं.

न्यायिक दंडाधिकारी एसपी तमांग ने भी अपनी शुरुआती जाँच में इशरत जहाँ की कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में पांडे और अन्य पुलिस अधिकारियों का नाम लिया था.

उन्होंने कहा था कि इस मुठभेड़ को उन अफ़सरों ने अंजाम दिया है जिन्हें तरक्की के लिए गोली चलाने में दिक्कत नहीं होती है.

माना जा रहा है कि सीबीआई इस मामले में चार जुलाई को चार्जशीट दायर कर सकती है.

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