उत्तराखंडः बचाव कार्य में लगा हेलीकॉप्टर गिरा, 8 मृत

उत्तराखंड की त्रासदी जैसे किसी अभिशाप में तब्दील हो गई है और हर दिन मौत और तबाही की नई–नई कहानी सामने आ रही है.
बारिश और धुंध के बीच चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यक्रम के दौरान मंगलवार को वायुसेना का एक हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
ये वायुसेना का एम-आई 17 हेलीकाप्टर था और बताया जाता है कि गौचर से गुप्तकाशी और केदारनाथ तक की फेरी लगाने के बाद वापस लौट रहा था जब गोविंदघाट के इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसमें 8 लोगों की मौत हो गई जिसमें पांच जवान और तीन नागरिक थे.
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ये एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और मनोबल तोड़नेवाली घटना है.
बताया जाता है कि ये वायुसेना का अत्याधुनिक हेलीकाप्टर है और इसमें हर तरह की प्रतिकूल परिस्थितियों में उड़ान भरने के यंत्रों और तकनीक से लैस है.
वायुसेना के हवाले से कहा गया है कि इस हादसे की जांच कराई जाएगी लेकिन इस हादसे की वजह से राहत और बचाव अभियान पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा और पहले की तरह ही इसे जारी रखा जाएगा.
पयलटों पर है दबाव
राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहत और बचाव के लिये बहुत ज्यादा दबाव है और कई बार पायलट के मना करने और अनुकूल स्थितियां न होने के बावजूद उड़ान भरना पड़ रहा है.
इस बीच आज खराब मौसम की वजह से फंसे हुए लोगों को निकालने में कठिनाई आई. देहरादून,पौड़ी,ऋषिकेश,रूद्रप्रयाग,उत्तरकाशी और चमोली के इलाकों में कई जगह रूक-रूक कर तेज बारिश होती रही और धुंध छाई रही.
हेलीकाप्टरों की उड़ान दोपहर 12 बजे के बाद ही शुरू हो पाई. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अब सारा फोकस बद्रीनाथ पर है.बद्रीनाथ में अभी भी करीब 4000 यात्री फंसे हुए हैं.
ध्यान देने की बात ये है कि बद्रीनाथ में यात्री किसी तरह की विपदा के शिकार नहीं हुए हैं और सिर्फ सड़क मार्ग के ध्वस्त हो जाने के कारण उन्हें वहां रूकना पड़ा है.
सड़क का रास्ता जोखिम भरा

वहां से लोगों को हवाई मार्ग से तो निकाला ही जा रहा है कुछ लोग राहतकर्मियों और सेना के जवानों की मदद से पैदल मार्ग से भी ट्रैकिंग करते हुए जोशीमठ तक पंहुच रहे हैं.
हांलाकि जोशीमठ के एसडीएम ए.के. नौटियाल ने बताया कि वही लोग सड़क मार्ग से आ पा रहे हैं जो स्वस्थ और दिलेर हैं क्योंकि ये रास्ता काफी जोखिम भरा है.
उधर गंगोत्री और यमुनोत्री इलाके में भी फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित लाने की कोशिश चल रही है.
इस विभीषिका में अब तक कितने लोग मारे गये और कितने सुरक्षित बचे, इसकी गिनती ही अपने आप में चुनौती बनी हुई है क्योंकि सरकार, उसके विभागों, निजी और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच तालमेल और समन्वय का घोर भाव नजर आ रहा है और हर दिन जैसे जिंदगी और मौत के बीच झूलता हुआ बीत रहा है.












