उत्तराखंड: मौत से बचते ही मदद के लिए निकाली कार

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
<link type="page"><caption> देहरादून</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130624_uttarakhand_relief_update_rd.shtml" platform="highweb"/></link> के रहने वाले रवि वर्मा 13 जून को उत्तरकाशी के लिए रवाना हुए थे. इरादा था इस बढ़िया खुशनुमा मौसम में तीर्थ करने का.
उन्हें इस बात का ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि इस यात्रा के बाद उनकी <link type="page"><caption> ज़िन्दगी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130623_ks_valdiya_uttarakhand_rns.shtml" platform="highweb"/></link> बदल जाएगी.
उन्होंने बताया, "मैं उत्तरकाशी से बडकोट के रास्ते में था. यात्रा ख़त्म करके निकल रहा था तभी रात को सैलाब सा आया. छोटी सी पहाड़ी पर जाकर जान बचाई और मलबे की धार बस एक फुट नीचे बह रही थी. लग रहा था कि अब तो जान बचनी मुश्किल है."
रवि वर्मा घंटों इस छोटी सी पहाड़ी पर खड़े रहे और पानी कम होने का इंतज़ार करते रहे.
इसके बाद उन्होंने अगले दिन नीचे उतरना शुरू किया और चार दिन के बाद घर पहुंचे.
सेवा
रवि वर्मा के परिवार वालों को यही लगा था कि उनका <link type="page"><caption> घर लौटना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130624_uttarakhand_relief_sk.shtml" platform="highweb"/></link> मुश्किल है.

रवि ने कहा, "मैंने घर पहुँचते ही एक रात आराम किया. फिर घर वालों के लाख मना करने पर भी सुबह से ही अपनी नैनो गाड़ी पर 'बाढ़ से राहत' का स्टीकर लगाकर मुफ्त में देहरादून से उन लोगों को जॉली ग्रांट <link type="page"><caption> हवाई अड्डे</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130622_environment_uttarakhand_analysis_vr.shtml" platform="highweb"/></link> तक पहुंचा रहा हूँ जिन्हें अपने परिजनों की तलाश है और बाहर से यहाँ आए हैं. ऐसे लोगों के पास गाड़ी या टैक्सी किराए पर लेने के लिए पैसे ही नहीं है."
रवि को लगता है कि उनकी जान बचाने के पीछे ऊपर वाले का एक मकसद है और वे अब इससे दूसरों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं.
वह कहते हैं, "समझिए कि ऊपर इलाकों में सड़कें ख़त्म हो चुकी हैं और गाँव के गाँव साफ़ हो गए हैं. इसको देखते हुए अभी हताहतों की संख्या बहुत बढ़ सकती है."
उमड़ पड़ी मदद
उत्तराखंड में बाढ़ और <link type="page"><caption> भूस्खलन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130622_uttarakhand_flood_survivors_life_vr.shtml" platform="highweb"/></link> से मची तबाही के बाद तमाम ऐसी संस्थाएं, अखाड़े, गैर सरकारी संगठन और विभाग हैं जो उन लोगों को निशुल्क खाना-पीना मुहैया करा रहे हैं जो अपने परिजनों की तलाश में आए हैं.
जॉली ग्रांट हवाई अड्डे के बाहर जहाँ पर भारतीय <link type="page"><caption> वायु सेना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130623_uttarakhand_rescue_update_akd.shtml" platform="highweb"/></link> का बेस हैं, उसके दरवाजे के इर्द गिर्द सैकड़ों ऐसे चेहरे दिखते हैं जिन्हें अपनों की तलाश में हफ्ते से ज्यादा समय हो गया है.
कुछ ने उनसे कई दिन पहले बात की थी और दूसरे इतने ख़ुशनसीब भी नहीं.
इन तमाम लोगों को हाथ पकड़-पकड़ कर खाना खिलाया जा रहा है और पानी पूछा जा रहा है.
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