'कहा था केदारनाथ अभी मत जाओ'

    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, देहरादून से

गुजरात में नडियाड के रहने वाले व्यवसायी मुकेश तापडिया पहली बार उत्तराखंड आए हैं.

लेकिन ऋषिकेश-देहरादून को दुनिया से जोड़ने वाले जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही उनके चेहरे की रंगत उतर चुकी है.

<bold><link type="page"><caption> (विकास की होड़ में तबाही को दावत)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130619_uttarakhand_kedarnath_disaster_vs.shtml" platform="highweb"/></link> </bold>

लगभग दस दिन पहले मुकेश के परिवार और इलाके से कुल मिलाकर 32 लोग केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकले थे.

लेकिन शनिवार के बाद से मुकेश का संपर्क इन 32 लोगों में से सिर्फ आठ से ही हो सका है.

जब गुजरात से लगातार फोन करने पर भी दूसरे 24 लोगों से संपर्क नहीं हो सका, तब मुकेश ने आनन फानन में हवाई टिकट कराया और यहाँ पहुँच गए.

मुकेश ने बताया, "आठ लोग तो गौरीकुंड में दो दिन से फंसे हैं. लेकिन दूसरों का कुछ अता पता नहीं है. नडियाड के साथ साथ पूरे गुजरात में मातम का माहौल हैं क्योंकि हर साल की तरह इस बार भी हज़ारों की तादाद में लोग केदारनाथ यात्रा पर निकले थे. ये तमाम लोग अभी कहाँ हैं कुछ पता नहीं."

राजस्थान में चिंता

अशोक सिंघवी राजस्थान के भीलवाड़ा से अपने चाचा-चाची की तलाश में उत्तराखंड पहुंचे हैं.

<link type="page"><caption> ('मेरे परिवार के पांच लोग बह गए हैं') </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130619_kedarnath_eyewitness_account_dil.shtml" platform="highweb"/></link>

अशोक ने बताया, "चाचा-चाची के साथ तीन और परिवार केदारनाथ धाम के दर्शन करके उतर रहे थे. चाचा पैदल उतर रहे थे इसलिए आगे निकल आए. इस बीच बादल फटा और पीछे के लोग कहाँ रह गए कुछ पता नहीं. चाचा ने एक राहत शिविर से फ़ोन करके बताया और मैं उलटे पाँव चला आया."

अशोक सिंघवी ने बताया कि उन्होंने अपने चाचा-चाची से खासतौर पर कहा था कि बारिश का मौसम आने को है आप लोग इस मौसम में यात्रा पर मत निकलिए.

उन्हें डर इसी बात का है पीछे की तीन टोलियों में से किसी एक पर कहीं पहाड़ न खिसक गया हो.

व्यथा

ऋषिकेश में ज़्यादातर लोगों की चिंताएं इस बात पर भी हैं कि सरकार ने जो हेल्पलाईन उपलब्ध कराई है वो कुछ ख़ास कारगर नहीं हो पा रहा है.

मुकेश और अशोक सिंघवी से बात करने पर पता चला कि इन लोगों ने यहाँ पहुँचने से पहले सैंकड़ों दफा इन नंबरों पर कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए.

प्रदेश में आलम ये है कि जिन 67,000 से भी ज्यादा लोगों के फंसे होने की बात सामने आ रही है, उनमे से अधिकाँश के परिवार वाले अपनों की सुध लेने पहुँच रहे हैं.

देहरादून-ऋषिकेश आने वाले हवाई जहाजों के किराए आसमान छू रहे हैं और प्रदेश सरकार को हर एक व्यक्ति को जवाब देने में मुश्किल भी आ रही है.

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