'मेरे परिवार के पांच लोग बह गए हैं'

बीबीसी हिंदी से केदारनाथ मंदिर के पुरोहित दिनेश बगवाड़ी ने बात की और बाढ़ के मंजर को बयान किया. बाढ़ में दिनेश के परिवार के पांच लोग लापता हैं. उनका 17 साल का बेटा अभी भी केदारनाथ में फंसा हुआ है. पढ़िये उन्होंने क्या बताया-
रविवार की रात भारी बारिश हुई थी जिससे केदारनाथ में इमारतों को काफ़ी नुकसान हुआ था, हालांकि लोग सलामत थे. लेकिन सोमवार की सुबह केदारनाथ में प्रलय बनकर आई.
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सुबह 6 बजे से ही केदारनाथ पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा था. लोग भारी बारिश से हुए नुकसान का जायजा ले रहे थे.
सुबह आठ बजे के करीब मैं मंदिर के प्रांगड़ में था और लोगों का हौसला बढ़ा रहा था. यहीं मेरी मुलाकात सर्किल ऑफिसर से हुई. वह बाढ़ में बहते-बहते बचे थे. बाढ़ के खतरे के बारे में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया था.
तबाही का मंजर
आठ बजकर दस मिनट के करीब एक धमाके की आवाज आई. केदारनाथ से करीब तीन किलोमीटर ऊपर स्थित गांधी सरोवर फट गया और मलबा बहकर केदारनाथ आने लगा.
सवा आठ बजे प्रलय आया. मलबे और पानी का प्रवाह इतना तेज था कि 15 मिनट में केदारनाथ तबाह हो गया. बड़े-बड़े पत्थर, रेत, कंक्रीट और पानी के प्रवाह ने केदारनाथ को बर्बाद कर दिया. चारों ओर हाहाकार मच गया. दो घंटे बाद तबाही का मंजर नजर आने लगा.
लाशें ही लाशें
केदारनाथ के चारों ओर लाशें ही लाशें पड़ीं थी. मेरे अपने परिवार के पांच लोग लापता हैं. छत्तीसगढ़ से आ कर होटल में रुके एक परिवार के 11 सदस्य भी लापता हो गए. एकमात्र बचे व्यक्ति को हमने ढांढस बंधाने की कोशिश की.
पीढ़ितों तक कोई मदद नहीं पहुंच रही थी. सरकार को इस तरह की बाढ़ का पहले से ही अंदेशा था. स्थानीय प्रशासन ने सुबह 6 बजे ही वरिष्ठ अधिकारियों को खतरे के बारे में अवगत करा दिया था. लेकिन केदारनाथ तक किसी भी प्रकार की मदद नहीं पुहंची. आईटीबीपी या कोई अन्य सैन्य दल हम तक नहीं पहुंचा.
बाढ़ और तबाही के बाद हम 36 घंटे केदारनाथ में फंसे रहे. यहां देशभर से आए लोग सहमे हुए थे. हमारे पास न खाने के लिए कुछ था और न ही पीने के लिए पानी. लोगों ने 36 घंटे बिना साफ़ पानी के बिताए.
नहीं पहुंची मदद
जब सरकार से कोई मदद नहीं पुहंची तो लोगों ने प्राइवेट एविएशन कंपनियों पर दबाव बनाया. प्राइवेट कंपनियों ने मंगलवार शाम रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और लोगों को सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाया.
मैंने हज़ारों की तादाद में लोगों को फंसे हुए देखा. ज्यादा तबाही पानी के साथ आए मलबे और पत्थरों से हुई. बह जाने से ज्यादा संभावना लोगों के मरने की है.
फ़िलहाल जैसे-तैसे मैं सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया हूं. मेरे परिवार की हालत खराब है. पांच लोग अभी भी लापता हैं. आर्थिक नुकसान का हिसाब अभी हमने नहीं लगाया है. बस किसी भी तरह हम अपने बेटे को सुरक्षित वापस लाने की जुगत में लगे हैं.
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