'हमने दुष्प्रचार के विरोध में अभियान छेड़ा है'

    • Author, सुशील झा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

कांग्रेस पार्टी का इतिहास सवा सौ साल से भी पुराना है और उसे अभी भी एक पारंपरिक राजनीतिक दल के रुप में देखा जाता है, जो टेक्नोलॉजी और प्रचार को लेकर अलग तरह का रुख रखती है.

पार्टी की <link type="page"><caption> वेबसाइट</caption><url href="http://www.aicc.org.in/new/" platform="highweb"/></link> बहुत ही बेसिक है और सोशल मीडिया पर पार्टी का कोई आधिकारिक पन्ना नहीं है. ट्विटर पर भी पार्टी मौजूद नहीं है.

हालांकि पार्टी का कहना है कि वो जल्दी ही फेसबुक और ट्विटर पर भी आएगी और वेबसाइट भी पूरी तरह बदल जाएगी.

उल्लेखनीय ये है कि पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का <link type="page"><caption> फेसबुक पर आधिकारिक पन्ना</caption><url href="https://www.facebook.com/India.RahulGandhi?fref=ts" platform="highweb"/></link> है और उसके दो लाख साठ हज़ार से अधिक लाइक्स भी हैं.

चाहे नक्सली हमले पर राहुल गांधी का बयान हो या फिर कहीं और राहुल गांधी के भाषण हों. पन्ने पर ताज़ा जानकारी रहती है.

सकारात्मक खबर

यूपीए सरकार की उपलब्धियों से लेकर सरकार से जुड़ी सकारात्मक ख़बरों की पोस्टिंग इस पन्ने पर होती है.

इसके अलावा यूथ कांग्रेस का पन्ना <link type="page"><caption> युवा देश</caption><url href="https://www.facebook.com/YuvaDesh?fref=ts" platform="highweb"/></link> भी काफी सक्रिय है फेसबुक पर, जिसे दस लाख से अधिक लाइक्स मिले हुए हैं.

युवा देश से जुड़े लोग बताते हैं कि वो एक सोची समझी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं.

इतना ही नहीं पार्टी के कई नेता अब ट्विटर पर भी हैं. चाहे दिग्विजय सिंह हों, दीपेंदर हुड्डा हों या फिर प्रवक्ता शकील अहमद हों वो मुद्दों पर ट्वीट भी करते हैं.

राजस्थान में पार्टी के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तो मोबाईल पर एक ऐप के ज़रिए भी लोगों से जुडे हैं जहां वो अपने कार्यक्रमों के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं.

रणनीति

लेकिन पार्टी का अपना पन्ना ट्विटर और फेसबुक पर क्यों नहीं हैं?

अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की संचार पर बनी उप समिति के सदस्य संजय झा कहते हैं, "पार्टी ने अब जाकर ये काम शुरु किया है और जून तक ज़रुर सब कुछ उपलब्ध हो जाएगा. सोशल मीडिया की पूरी ज़िम्मेदारी दीपेंदर हुड्डा के पास है और हम इस दिशा में कुछ लोगों की नियुक्तियां भी करने वाले हैं. वैसे कुछ औपचारिक और अनौपचारिक ग्रुप्स हैं जो पार्टी से जुड़े हुए हैं. ये ग्रुप्स अपने स्तर पर काम कर रहे हैं और ये हमारी बड़ी ताकत हैं."

लेकिन क्या कारण है कि पार्टी सोशल मीडिया पर सक्रिय होना चाहती है?

संजय कहते हैं, "सोशल मीडिया पर एकपक्षीय हिंदुत्व दुष्प्रचार और कांग्रेस पार्टी के ख़िलाफ ग़लत, पक्षपातपूर्ण बयानबाज़ी के जवाब में हमने सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज की है. एक ख़ास किस्म का एजेंडा चल रहा था दुष्प्रचार का. मुझे इससे आपत्ति नहीं है कि लोग अपनी तरह की बात रखें लेकिन इस दुष्प्रचार में पार्टी के ख़िलाफ गलत, नकारात्मक बयानबाज़ी थी. हमने बस इसी के जवाब में अपनी बात रखनी शुरू की ताकि युवा लोगों के सामने सही बात आ सके."

एकाधिकार नहीं

तो क्या कहीं बदले की भावना भी थी?

संजय बीच में ही टोकते हैं, "नहीं-नहीं, हम कभी भी किसी से बदतमीजी या गाली गलौज वाली भाषा में यकीन नहीं रखते. अगर हम भी उनके जैसे हो गए तो ठीक नहीं होगा. हम मजाक, कटाक्ष, जानकारी और उसे अलग तरीके से कहने में यकीन रखते हैं और यही हुआ था 'फेकू अभियान' के दौरान."

उधर रणनीति के बारे में युवा देश से जुड़े एक व्यक्ति अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर कहते हैं, "देशभक्तों पर भाजपा ने कब्ज़ा सा कर लिया था. भगत सिंह हैं या फिर मैरी कॉम और सचिन जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर किसी का एकाधिकार नहीं है. बीजेपी वाले तो भगत सिंह के बारे में ऐसा लिखते थे कि मानो भगत सिंह सिर्फ उनके ही हों. अब बताइए भगत सिंह भाजपा के कैसे होंगे. वो तो वामपंथी थे. हमने इस तरह के वातावरण को चुनौती दी है. एक माहौल बनाया गया था कि कांग्रेस में सिर्फ गांधी-नेहरु परिवार है. यहां तक कि पटेल को भी हिंदूवादी ताकतें अपना हीरो बना रही थीं. हमने इसे चुनौती दी है."

ऑनलाइन माध्यम

वो बताते हैं, "हमारे फेसबुक के पोस्ट हमेशा ऐसे नहीं होते जो पार्टी से जुड़े हों. हम ऐसे लोगों का जिक्र करते हैं जिनसे युवाओं को प्रेरणा मिले. देशभक्तों पर किसी एक पार्टी का अधिकार नहीं हो सकता है. क्या परमवीर चक्र विजेता किसी पार्टी के हो सकते हैं. वो पूरे देश के होते हैं. अभी अरुणिमा सिन्हा एवरेस्ट पर चढ़ी तो हमने उस बारे में पोस्ट किया. इस तरह के पोस्ट करते हैं हम."

सरकार में होने के कारण कांग्रेस पार्टी पर ऑनलाइन माध्यम में सबका ध्यान अधिक जाता है.

कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वो इस ध्यान को अपने फायदे में कैसे मोड़े.

आम आदमी पार्टी या बीजेपी की तरह कांग्रेस का सोशल मीडिया व्यवस्थित नहीं है.

उन्हें मज़बूर होकर ही सही सोशल मीडिया को गंभीरता से लेना पड़ा है.

इसे देखते हुए वर्ष 2014 के आम चुनावों से पहले सोशल मीडिया पर कांग्रेस की उपस्थिति पर सबकी नज़रें टिकी होंगी.

इस शृंखला की अगली कड़ी में आप पढ़ेंगे मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति के बारे में.

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