ईरोम शर्मिला के समर्थन में 'संगीत सत्याग्रह'

ईरोम शर्मीला का समर्थन
इमेज कैप्शन, ईरोम शर्मीला के समर्थन में दिल्ली में आयोजित संगीत सत्याग्रह में हालाँकि गिने-चुने लोग ही आए लेकिन उनमें जोश की कमी नहीं थी.

शायद कुछ मीडियाकर्मी ना होते तो ट्रैफ़िक के शोर के बीच शायद किसी ने देखा भी नहीं होता कि संगीतकारों और युवा मानवाधिकार कार्यकर्ता का एक बेहद छोटा सा गुट दिल्ली के पटियाला अदालत के बाहर <link type="page"><caption> ईरोम शर्मिला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130304_irom_sharmila_del_court_fma.shtml" platform="highweb"/></link> के समर्थन में ‘संगीत सत्याग्रह’ कर रहा है.

इस गुट ने खुद को नाम दिया था ‘ईरोम शर्मिला के दोस्त’ और वो मणिपुर और भारत-प्रशासित कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का संगीत के माध्यम से विरोध कर रहे थे. उनके गानों में <link type="page"><caption> कथित उल्लंघनों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/11/111105_afspa_protest_ia.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए भारतीय सेना की आलोचना की गई थी.

ईरोम शर्मीला
इमेज कैप्शन, ईरोम शर्मीला

इस कार्यक्रम के पीछे सोच 23-वर्षीय साक्षी कुमार (बाएँ) की थी जिसमें उनकी बहन प्रतीक्षा ने भी उनका साथ दिया. साक्षी ने अप्रैल में <link type="page"><caption> ईरोम शर्मिला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2006/11/061127_ebadi_chanu.shtml" platform="highweb"/></link> के समर्थन में एक फ़ेसबुक पेज की शुरुआत की जिस पर उन्हें बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली. उनके फ़ेसबुक पेज से कई लोग जुड़े. फिर उन्होंने युवा कलाकारों के साथ मिलकर ईरोम शर्मिला के समर्थन में संगीत सत्याग्रह करने की सोची.

आयोजक साक्षी कुमार और बहन प्रतीक्षा
इमेज कैप्शन, आयोजक साक्षी कुमार और बहन प्रतीक्षा

<link type="page"><caption> ईरोम शर्मिला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2006/09/060920_sharmila_hungerstrike.shtml" platform="highweb"/></link> पिछले 12 सालों से मणिपुर में सैन्य विशेषाधिकार क़ानून के ख़िलाफ़ अनशन पर हैं. दिल्ली पुलिस ने उन पर आत्महत्या का मुक़दमा दर्ज किया था. ये मुक़दमा साल 2006 के एक अनशन से संबंधित है. भारतीय कानून के मुताबिक अपनी जान लेने की कोशिश के लिए व्यक्ति को सज़ा दी जा सकती है.

कार्यक्रम का आयोजन सुबह आठ से दस के बीच किया गया था
इमेज कैप्शन, कार्यक्रम का आयोजन सुबह आठ से दस के बीच किया गया था

ईरोम शर्मिला के मंगेतर डेसमंड कूटिन्हो ने बीबीसी को बताया कि बुधवार को शर्मिला को अदालत में पेश होना था ताकि उन्हें उनपर लगे आरोपों के बारे में बताया जा सके लेकिन वो पेश नहीं हो सकीं. डेसमंड के मुताबिक अभी स्पष्ट नहीं है कि अदालती कार्यवाही आगे कैसे बढ़ेगी.

आयोजकों का कहना है कि वो इस प्रयास को आगे भी ले जाने का सोचेंगे
इमेज कैप्शन, आयोजकों का कहना है कि वो इस प्रयास को आगे भी ले जाने का सोचेंगे

ईरोम शर्मिला पिछले बारह सालों से भोजन ग्रहण नहीं कर रही हैं, और उन्हे नाक के रास्ते जबरन तरल आहार दिया जाता है. मार्च में उनके ऊपर आत्महत्या के आरोपों पर शर्मिला ने कहा था कि वो जिंदगी से प्यार करती हैं.

मुंबई के हिप-हॉप गायक अश्विनी मिश्रा
इमेज कैप्शन, मुंबई के हिप-हॉप गायक अश्विनी मिश्रा

बुधवार के कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों का कहना था कि वो ईरोम शर्मिला के समर्थन में आगे भी आवाज़ें उठाते रहेंगे. युवा हिप-हॉप गायक अश्विनी मिश्रा ने कहा कि वुधवार के कार्यक्रम का मक़सद था ईरोम शर्मिला के अनशन और सैन्य विशेषाधिकार कानून के बारे में युवाओं को अवगत करवाना. उन्होंने कहा, "हम लोगों को बताना चाहते हैं कि भारतीय प्रशासन ने इलाकों में लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया है."

संगीत का आनंद लेते कुछ युवा गायक
इमेज कैप्शन, संगीत का आनंद लेते कुछ युवा गायक

उधर आयोजक साक्षी कुमार कहती हैं कि उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में नहीं सोचा है लेकिन अगर अदालत ईरोम शर्मिला को अदालत में पेश होने का आदेश देती है तो वो इसी प्रकार आगे भी "समान विचार वाले लोगों के साथ संगीत सत्याग्रह आयोजित करने के बारे में सोचेंगी".

(तस्वीरें: असद अली और समाचार एजेंसी पीटीआई)

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