क्या बचपन के कुम्हलाए चेहरों पर मुस्कान लौटेगी?

जयपुर में बच्चो के एक चाइल्ड होम से पूर्वोत्तर भारत के 50 बच्चों को छुडा़या गया है जो वहां दयनीय हालत में रह रहे थे. इन बच्चो को पूर्वोतर से क्यों लाया गया था और यहा क्यों रखा गया था पुलिस इसकी तहकीकात कर रही है.
छुड़ाए गए बच्चों में से ज्यादातर <link type="page"> <caption> पूर्वोतर भारत</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/08/120820_northeastern_kalden_sy.shtml" platform="highweb"/> </link> के है और इनमे 27 बालिकाएँ है. इनमें से ज्यादातर की उम्र पांच से 12 के बीच है
चाइल्ड होम के संचालक जैकब गिरफ्तार है और उससे पूछताछ की जा रही है.फिलहाल इन <link type="page"> <caption> बच्चो को जयपुर में</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130206_rajasthangirl_dies_ss.shtml" platform="highweb"/> </link> सरकार के बाल सुधार घर में रखा गया है.
राज्य की महिला कल्याण मंत्री बीना काक कहती है कि बच्चे डरे सहमे है. काक कहती हैं, “मैंने उनकी आँखों में खामोशी और भय देखा है. उनके चेहरो पर मायूसी के भाव हैं जो बयां करती है कि वो मुश्किल हालात से गुजरे है, हम उनको सामान्य होने देना चाहते हैं."
आयोग के सदस्य गोविन्द बेनीवाल ने बताया कि बाल परामर्शदाताओ की सहायता ली गई है ताकि बच्चे सहज हो और आपबीती बयान कर सके.
तालीम के नाम पर
आयोग के सदस्यों के साथ पुलिस जब मौके पर पहुंची तो ये बच्चे बहुत दयनीय हाल में रहते मिले. पुलिस के मुताबिक जैकब ‘ग्रेस होम’ नाम से बाल घर चलाता है और इन बच्चो को पढ़ाने के नाम से जयपुर में रखे हुए था.
मगर मौके पर ऐसा कुछ नहीं मिला जो ये साबित कर सके कि इन बच्चो को तालीम दी जा रही थी. उलटे वहां से काफी संख्या में शराब की खाली बोतले मिली.
बेनीवाल ने बताया कि इन बच्चो को बेहद ख़राब हालत में रखा जा रहा था, उन्होंने कहा, “कमरे बेहद गंदे थे, खाने पीने का इंतजाम भी ख़राब था. जैकब कई साल से ये संस्था चला रहा था, लेकिन कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करा रखा था.”
जयपुर के एक पुलिस अधिकारी सुखदेव जांगिड कहते हैं, “हमने जैकब को गिरफ्तार कर लिया है. उससे इन बच्चो के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है. वो कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाया है."
जैकब का कहना है कि माँ-बाप खुद पढाई के लिए इन बच्चो को उसके यहाँ छोड़ कर गए हैं.
मणिपुर में हुई शिकायत

आयोग के मुताबिक, इनमे से मणिपुर की एक बच्ची यहाँ बीमार हो गई थी. ये बच्ची जब बीमारी की हालत में मणिपुर लौट गई तो वहां उसकी मौत हो गई. इस बारे में अभिभावकों ने मणिपुर में शिकायत दर्ज कराई. इसी शिकायत पर जब जाँच पड़ताल की गई तो बच्चो की दयनीय हालत की जानकारी मिली.
राज्य सरकार का कहना है कि वो इन बच्चों के अभिभावकों का रुख देखेंगे. अगर किसी बच्चे के अभिभावक उन्हें लेने को राजी नहीं हुए तो सरकार अपने दम पर इनका भविष्य सँवारने का काम करेगी.
जिस इलाके में ये बाल गृह चलाया जा रहा था, उसके पड़ोसियों ने आयोग को बताया कि ये बच्चे कम ही बाहर दिखते थे. यहाँ तक भी खेलने भी बाहर नहीं आने दिया जाता था. ये बच्चे जब आजाद हुए तो बचपन के कुम्लाहाए चेहरों पर थकी हुई मुस्कान बिखर आई.
राज्य आयोग और भारत के बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पहल पर पिछले हफ्ते भर में <link type="page"> <caption> राजस्थान और उत्तर प्रदेश</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130125_rajasthan_girl_sold_bareth_vd.shtml" platform="highweb"/> </link> से 374 बच्चो को मुक्त कराया गया है.
आयोग के मुताबिक इन बच्चों से जयपुर में हाथ की चूड़िया बनाने के कारखानों में काम करवाया जाता था. इस सिलसिले में 49 लोगो को गिरफ्तार किया गया है.












