भगदड़...और अब आरोप-प्रत्यारोप की कड़ी

कुंभ मेले के दौरान इलाहबाद रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद विभिन्न प्रभागों में आरोप-प्रत्यारोप की कड़ी शुरू हो गई है.
उत्तर प्रदेश के गृह मंत्री आज़म खान ने ‘नैतिक ज़िम्मेदारी’ लेते हुए कुंभ मेला प्रबंधन समिति की अध्यक्षता से इस्तीफा दे दिया.
लेकिन इस घटना के पीछे ज़िम्मेदार कारण को लेकर हर प्रभाग ने अपनी गलती मानने से इंनकार कर दिया है.
जहां रेलवे मंत्री पवन कुमार बंसल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है वहीं राज्य सरकार का कहना है कि कुंभ मेले के लिए किए गए बंदोबस्त में कोई कमी नहीं थी.
हालांकि आज़म खान ने नैतिक ज़िम्मेदारी ली, लेकिन उन्होंने भी अप्रत्यक्ष रूप से आरोप रेलवे प्रबंधन पर ही डाला.
‘हम ज़िम्मेदार नहीं’
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “अध्यक्ष की हैसियत से मेरी ज़िम्मेदारी कुंभ मेले की थी. रेलवे स्टेशन की ज़िम्मेदारी तकनीकी तौर पर मेरी नहीं थी.”
तो उधर उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री बलराम यादव ने सोमवार को हुई प्रेस वार्ता में घटना के पीछे के कारण के बारे में बात करने के बजाय कुंभ मेले प्रबंधन की प्रशंसा की.
उनका कहना था, “मेले में बहुत भीड़ भरी पड़ी है. उनके लिए स्पेशल बस व्यवस्था चलाई गई, पूरे राज्य की बसें लगा दी गईं. स्नान करने में साधु-संत से लेकर आम व्यक्ति तक, किसी को भी कोई असुविधा नहीं हुई. भगदड़ इसलिए मची क्योंकि बहुत से लोग उसी दिन घर वापस जाने की होड़ में थे.”
रविवार को इलाहाबाद के रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में कम से कम 36 लोगों की मौत हो चुकी है.
कुंभ के मेला क्षेत्र से बाहर हुई भगदड़ में जहां बड़ी संख्या में लोगों का स्टेशन पर पहुंचना एक कारण बताया जाता है वहीं प्रशासन में सामंजस्य की कमी भी साफ दिखती है.
कारण क्या था?

इस हादसे में यूपी सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं जिसकी रिपोर्ट एक महीने के भीतर आने की उम्मीद है.
राज्य सरकार की तरह ही रेलवे मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि भारी भीड़ की वजह से स्टेशन पर भगदड़ मची.
रेलवे मंत्री ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि पुलिस के लाठीचार्ज के कारण अफरा-तफरी मची.
उधर रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी आलोक जौहरी ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन के प्लेटफॉर्म बदले जाने की घोषणा की जिसके बाद वहां भगदड़ मच गई.
इस बीच मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इस हादसे के लिए राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी ज़िम्मेदार ठहराया है.
हरकत में आई सरकार
<bold>इलाहबाद से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी</bold> का कहना है कि चौतरफा आलोचना के बाद राज्य सरकार की मशीनरी इस समय दुर्घटना पीडितों की मदद में जुट गई है.
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि 36 मरने वालों में से जिन 22 की शिनाख्त हो गयी है, उनमे से 19 का पोस्ट मार्टम हो गया है.
इनमे से 16 के शव सरकारी साधन से भेजे गए हैं.
इस समय 39 घायल अस्पताल में हैं.
इसके बाद प्रशासन की चुनौती बसंत पंचमी 15 फरवरी को तीसरा शाही स्नान संपन्न कराना है.
समझा जाता ही कि आज़म खान के त्याग पत्र से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जवाबदेही और बढ़ जायेगी, क्योंकि वे गृह मंत्री भी है और पुलिस उनके अधीन है.












