इलाहाबाद में रेलवे स्टेशन पर भगदड़, 35 मरे

इलाहाबाद में रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 36 लोग मारे गए हैं और 30 से ज़्यादा घायल हुए हैं.
इलाहाबाद में रेलवे के प्रवक्ता अमित मालवीय के अनुसार मारे जाने वालों में ज़्यादातर लोग उत्तरप्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार, और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं.
इससे पहले उत्तरप्रदेश सरकार में रेलवे पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक गुर्दर्शन सिंह ने कहा कि मरने वालों में 28 महिलाएं और सात बच्चे शामिल हैं. ये हादसा रविवार की शाम लगभग सात बजे हुआ.
इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार में नगर विकास मंत्री और कुंभ मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष मोहम्मद आज़म ख़ान ने कहा है कि लगभग 15 से 20 लोगों के मारे जाने का अंदेशा है.
आज़म ख़ान ने कहा कि ट्रेनें सूचारू रूप से चल रही हैं और यात्रियों या कुंभ में आए श्रद्धालुओं को परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम बरतने की अपील की .
लेकिन इस बीच केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. केंद्र सरकार ने जहां इस हादसे के लिए राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया वहीं आज़म ख़ान ने इसके लिए केंद्र सरकार ख़ासकर रेल मंत्रालय को ज़िम्मेदार क़रार दिया.
<bold>बीबीसी संवाददाता मुकेश शर्मा</bold> के अनुसार यह हादसा इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर छह पर उस वक़्त हुआ जब हज़ारों की संख्या में कुंभ में अमावस्या के मौक़े पर स्नान करके लौट रहे श्रद्धालु स्टेशन पर जमा थे.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ प्लेटफ़ॉर्म संख्या छह की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर अचानक भगदड़ मच गई. हालांकि पहले ख़बर आ रही थी कि फुटओवर ब्रिज की रेलिंग टूटने से ये हादसा हुआ.
इस हादसे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रामदत्त त्रिपाठी का कहना है कि सुबह शाही स्नान के समय पर हुई अव्यवस्था के बाद से ही मार्क टुली समेत कई समीक्षक कह रहे थे कि इस बार के कुम्भ में भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस की व्यवस्था चुस्त नही है.
शाही स्नान का जो घाट अखाड़ों के नागा साधुओं के लिए आरक्षित था, वहाँ भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिसे घुड़सवार पुलिस की मदद से बड़ी मुश्किल से ख़ाली कराया जा सका.
यातायात नियंत्रण की तमाम योजना के बावजूद एक साथ इतनी भारी भीड़ घाटों पर आने देने का कोई औचित्य नही था.
और फिर घाटों पर भीड़ कम करने के लिए जितनी तेज़ी से लोगों को बाहर निकाला गया , उस समय भी शायद यह ध्यान नही दिया गया कि स्टेशन के अंदर उतने ही लोग जाने दिया जाए जितनी क्षमता है.
तालमेल की कमी
शायद रेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस में पर्याप्त तालमेल नही था.
राजकीय रेलवे पुलिस की ज़िम्मेदारी थी कि स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण का बंदोबस्त होता.
आगे चलकर शायद यह भी सोचना पड़े कि एक शहर में एक दो दिन के बीच इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आने के लिए प्रोत्साहित करने की कितनी आवश्यकता है.
उपलब्ध स्थान के अनुसार ही भीड़ शहर में आए इसका कोई उपाय सोचना होगा.
कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि जब दुनिया का सबसे बड़ा कुम्भ मेला चल रहा था , पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के एक साथ इतनी बड़ी संख्या में तबादलों की क्या ज़रुरत थी?
हादसे के बाद स्टेशन पर पहुंचे मुकेश शर्मा ने कहा कि प्लेटफ़ॉर्म नंबर छह पर जहां हादसा हुआ था वहां आवागमन सामान्य हो चुका है.
एक प्रत्यक्षदर्शी उमा देवी ने बीबीसी को बताया कि उनके साथ दो महिलाएं थीं और उन दोनों की ही हादसे में मौत हो गई है.
घटनास्थल पर बच्चों और महिलाओं की चप्पलें और दूसरे सामान बिखरे हुए हैं.
घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
फ़िलहाल वहां बहुत सारे लोग स्टेशन के आस-पास जमा है. पुलिस ने पूरे इलाक़े की घेराबंदी कर ली है और केवल उन्हीं लोगों को स्टेशन के भीतर जाने की इजाज़त दी जा रही है जिनके पास टिकट हैं.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस हादसे पर गहरा शोक जताया है और रेल मंत्रालय को हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया है.












