हादसे के लिए रेलवे कितनी ज़िम्मेदार

हादसे के शिकार लोगों के परिजन मृतकों की तस्वीरों में अपनों की पहचान करते हुए.
इमेज कैप्शन, हादसे के शिकार लोगों के परिजन मृतकों की तस्वीरों में अपनों की पहचान करते हुए.

इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के कुछ कर्मचारियों और राजकीय रेलवे पुलिस अधिकारियों से बातचीत में कुछ नये तथ्य सामने आए हैं जिनसे लगता है कि शहर में क्षमता से अधिक भीड़ आने के अलावा स्टेशन के अंदर के इंतजाम में कमियां भी हादसे का कारण बनीं.

राजकीय रेलवे पुलिस के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि रेलवे ने मौनी अमावस्या पर जरूरत के मुताबिक संख्या में ट्रेनें नहीं चलाईं क्योंकि पहले के दो स्नान पर्वों पर अपेक्षा से कम यात्रियों के आने से रेलवे को वित्तीय नुकसान हुआ था.

यह बात सबको पता थी कि मौनी स्नान कुंभ का मुख्य स्नान पर्व है और मकर संक्रांति या पौष पूर्णिमा के मुकाबले कई गुना लोग ज्यादा लोग कुंभ स्नान के लिए इलाहाबाद पहुंचेंगे.

मीडिया भी लगातार ख़बरें दे रहा था कि 10 फरवरी को तीन करोड़ से ज्यादा लोग शहर में हैं. कम से कम इसके बाद रेलवे को पहले से ज्यादा ट्रेनें चलानी चाहिए थीं.

उधर, पुलिस को भी रेलवे अफसरों से बात करके उतनी ही भीड़ जाने देनी चाहिए थी जितनी कि प्लेटफॉर्म पर जगह थी.

प्लेटफार्म बदलना खतरनाक

रविवार को इलाहाबाद स्टेशन पर मची भगदड़ में 36 लोगों की मौत हो गई.
इमेज कैप्शन, रविवार को इलाहाबाद स्टेशन पर मची भगदड़ में 36 लोगों की मौत हो गई.

स्टेशन के कुछ रेल कर्मचारियों ने पत्रकारों को बताया कि प्लेटफॉर्म नंबर चार और छह से मेला स्पेशल ट्रेनें जानी थीं.

लेकिन दुर्घटना से कुछ समय पहले इन दोनों प्लेटफॉर्म पर राजधानी और धनबाद एक्सप्रेस ट्रेनें लाई गईं.

इसकी वजह से मेला स्पेशल ट्रेन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से चलाने की घोषणा की गई.

हालांकि नए यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आना आसान था, लेकिन जो यात्री चार और छह नंबर पर थे वे भी एक नंबर की तरफ जाने लगे.

मगर फुट ओवर ब्रिज खचाखच भरे थे. यात्री देख नहीं पा रहे थे कि उनके आगे क्या है.

कुछ यात्री सीढ़ी के रास्ते प्लेटफॉर्म पर ठीक से पैर नहीं रख पाए और गिर गए.

बस फिर लोग एक के बाद एक ऊपर गिरते गए और इतना बड़ा हादसा हो गया.

मतलब यह कि स्टेशन के अंदर बहुत ज़्यादा भीड़, प्लेटफॉर्म बदलने की घोषणा और पैर फिसलना फिलहाल दुर्घटना के कारण समझ में आते हैं.