मातम के बीच अफ़ज़ल के परिवार ने मांगा शव

अफ़ज़ल के परिवार वालों ने शव की मांग की.
इमेज कैप्शन, अफ़ज़ल के परिवार वालों ने शव की मांग की.

भारतीय संसद पर हमले के लिए <link type="page"> <caption> शनिवार की सुबह फाँसी </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130209_afzal_guru_hanged_pk.shtml" platform="highweb"/> </link>पर लटकाए गए अफ़ज़ल गुरु के परिजनों ने भारतीय राष्ट्रपति और गृहमंत्री से अपील की है कि उन्हें अफ़ज़ल का शव सुपुर्द किया जाए.

वैसे बताया जा रहा है कि अफ़ज़ल के शव को तिहाड़ जेल में ही दफ़ना दिया गया है.

अफ़ज़ल गुरु कश्मीर के उत्तरी कस्बे सोपोर के रहने वाले हैं.

लिहाजा अफ़ज़ल को फांसी दिए जाने के दिन कश्मीर की वादी में बगैर किसी पूर्व घोषणा के कर्फ़्यू लागू कर दिया गया और शब्बीर शाह सहित कई अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया है.

गिरफ्तारियां

अफ़ज़ल गुरु के भाई मोहम्मद यासीन गुरु ने बीबीसी को बताया, “यह एक बर्बर हरकत है. अफ़ज़ल को फांसी की सजा दी गई और हमें ख़बर भी नहीं. इतना ही नहीं हमें मातम मनाने की अनुमति नहीं दी गई है. हमारे गाँव को सैनिक छावनी बना दिया गया है.”

श्री यासीन का कहना है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस अधिकारियों की मदद से भारत के राष्ट्रपति और गृहमंत्री से अफ़ज़ल के शव की घर वापसी के लिए आवेदन किया है.

उन्होंने बताया कि कश्मीर सरकार को इस घटना की पूर्व जानकारी थी. पिछले साल ही राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने ट्विट किया था, “मिस्टर यासीन कहते हैं कि यहां के शासक वोट बैंक राजनीति करते हैं. लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे.”

अफ़ज़ल को फांसी दिए जाने के बाद उमर अब्दुला ने राज्य की अवाम से शांति बरतने की अपील करते हुए कहा है कि वे अलगाववादी तत्वों के बहकावे में नहीं आएं.

पचास वर्षीय अफ़ज़ल गुरू को तेरह दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद पर हुए सशस्त्र हमले के लिए दोषी ठहराया गया था.

जनजीवन ठप

इस बीच कश्मीर में कर्फ्यू और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण जनजीवन ठप होकर रह गया है. श्रीनगर और बड़े कस्बों में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है.

सोपोर से स्थानीय नागरिकों ने बताया कि अफ़ज़ल के परिजनों और स्थानीय लोगों ने अफ़ज़ल के लिए ग़ायबाना नमाज़े जनाज़ा पढ़ने का आयोजन किया है और इसकी अनुमति के लिए उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क किया है.

उल्लेखनीय है ग्यारह फरवरी, 1984 को कश्मीर में सशस्त्र आंदोलन के संस्थापक मक़बूल बट को फांसी दी गई थी. उन्हें तिहाड़ जेल में ही दफ़ना गया.

इस साल उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर यहां के अलगाववादियों ने उनके अवशेष वापस लाने के लिए आंदोलन का ऐलान किया था. अब अफ़ज़ल गुरु के अवशेष के लिए इस तरह का कदम उठाया जा सकता है.