मोदी को संघ के समर्थन का इशारा?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री पद के लिए एक तरह से नरेंद्र मोदी के नाम का समर्थन किया है.
इलाहाबाद में जारी महाकुंभ में विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद को संबोधित करते हुए भागवत ने बिना नाम लिए मोदी के लिए देश में व्याप्त समर्थन का ज़िक्र किया.
दरअसल विहिप की धर्म संसद की शुरुआत से ही कई साधु-संतों ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र में जो सरकार चाहिए उसकी कमान नरेंद्र मोदी के हाथों में होनी चाहिए.
संतों ने खुलकर मोदी का नाम लिया और जितनी बार मोदी का नाम लिया गया उतनी बार वहाँ मौजूद सभी लोगों ने काफ़ी बुलंद आवाज़ में मोदी का समर्थन किया.
इस दौरान वहाँ मौजूद भागवत मुस्कुराते रहे मगर जब ख़ुद बोलने की बारी आई तो उन्होंने पहले तो इस चयन की ज़िम्मेदारी पार्टी पर ही डाली.
मोदी को समर्थन
भागवत ने कहा, “तात्कालिक परिस्थिति का विचार व्यक्त करके यहाँ कहा गया है कि चुनाव में किसे आना चाहिए, किसको लाना चाहिए. मगर हम यहाँ कितना भी बोलें आख़िर में जिन्हें करना है ये उन्हीं का कर्तव्य है, उन्हीं का अधिकार है.”
इसके बाद उन्होंने बिना नाम लिए मोदी का ज़िक्र किया, “उनको (पार्टी को) करने देना चाहिए. उनका करना अगर ग़लत हुआ तो उन्हें उसका फल खाने देना चाहिए. लोग जानते ही हैं कि आपके मन में क्या है. केवल यहाँ मंडप में बैठे लोग ऐसा नहीं बोलते हैं, सारे देश में आवाज़ यही गूँजती है.”
अब यूँ तो इस पूरे बयान में कहीं भी मोदी का नाम नहीं लिया गया है मगर जिस संदर्भ में ये बयान दिया गया और यहाँ महाकुंभ में धर्म संसद के दौरान जिस तरह मोदी का नाम लिया जाता रहा उससे स्पष्ट है कि संघ प्रमुख ने भी मोदी की लोकप्रियता को स्वीकार किया है.
जब से राजनाथ सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का पद सँभाला है तब से किसी न किसी रूप में लगातार नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी की बात उठ रही है.
बयानों का सिलसिला

एक ओर जहाँ वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बताया तो ख़ुद पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह ने भी माना था कि मोदी देश में सबसे लोकप्रिय नेता हैं.
इसके बाद राजनाथ सिंह जब विहिप के मार्गदर्शक मंडल की बैठक के दौरान महाकुंभ पहुँचे थे तो वहाँ विहिप नेताओं से मुलाक़ात से पहले भी ये चर्चा ज़ोरों पर थी कि मोदी की उम्मीदवारी पर बात होगी.
हालाँकि खुले तौर पर तो इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है और राजनाथ सिंह ने कहा है कि पार्टी संसदीय बोर्ड इस बारे में अंतिम फ़ैसला करेगा मगर मोदी के नाम का शोर आरएसएस से जुड़े संगठनों की ओर से भी तेज़ी से उठ रहा है.
मगर विहिप ने मोदी का नाम लेने के साथ ही ये भी चेताया है कि 'सिर्फ़ मुसलमानों का वोट लेने के लिए जैसे इससे पहले भाजपा ने राम मंदिर निर्माण का मुद्दा छोड़ दिया था वैसा न हो इसका आश्वासन मोदी को देना होगा'.












