कैसे होती है महाकुंभ की महागिनती?

कुंभ मेला

भारत के कुंभ मेले को आम तौर से विश्व का सबसे बड़ा <link type="page"> <caption> लोगों का जमावड़ा</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130113_kumbh_logistics_pp.shtml" platform="highweb"/> </link> कहा जाता है. लोग इस विश्वास के साथ हर 12 वर्ष पर इलाहाबाद में गंगा और यमुना के संगम पर आते हैं कि यहाँ <link type="page"> <caption> पवित्र दिनों</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130112_kumbh_setup_piece_ramdutt_vd.shtml" platform="highweb"/> </link> में डुबकी लगाने से उनके सभी पाप धुल जाएंगे.

इस आयोजन के प्रभारी अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को जब 55 दिवसीय मेले की शुरुआत हुई तो उस दिन 85 लाख लोगों ने स्नान किया.

2001 के <link type="page"> <caption> कुंभ मेले</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130113_tully_kumbh_vk.shtml" platform="highweb"/> </link> के पहले दिन आधिकारिक तौर पर 25 लाख लोगों ने स्नान किया था. कुंभ मेला भारत के तीन और स्थानों पर आयोजित किया जाता है लेकिन इलाहाबाद के कुंभ में सबसे अधिक लोग आते हैं.

इस मेले के इंतेजाम के लिए राज्य सरकार के हज़ारों कर्मचारियों को तैनात किया जाता है. नागरिक प्रशासन की ज़िम्मेदारी एक मजिस्ट्रेट और सुरक्षा बलों की ज़िम्मेदारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हाथ में होती है.

भिन्न आकलन

एक रिपोर्ट के अनुसार इस स्नान में भाग लेने वाले कुल लोगों की संख्या दस करोड़ के आँकड़े को छू लेगी. लेकिन सोमवार को प्रशासन द्वारा नहाने वालों की दी गई संख्या, मेले के चोटी के पुलिस अधिकारी आलोक शर्मा के आकलन से काफी भिन्न है.

आलोक शर्मा का कहना है, "मेरे अनुमान के अनुसार पहले दिन सिर्फ <link type="page"> <caption> 15 से 18 लाख</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130114_kumbh_stampede_sm.shtml" platform="highweb"/> </link> लोगों ने स्नान किया. असली गिनती कर पाना बहुत मुश्किल है. आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ा कर बताने का भी चलन है."

छह साल पहले अर्ध कुंभ के पहले स्नान के दिन मैंने वहाँ मौजूद सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से पूछा था कि उनकी नज़र में कितने लोगों ने स्नान किया होगा. उन्होंने उल्टे मुझसे ही सवाल कर डाला, "आपकी नज़र में नहाने वाले कितने लोग होंगे?"

मैंने कहा शायद 30 लाख के आसपास. उन पुलिस अधिकारी ने कहा, "यह ठीक है. मैं इससे सहमत हूँ."

लेकिन आलोक शर्मा यूँ ही अपना बात नहीं कह रहे. वह बेहतर जानते हैं. वह 2001 में इलाहाबाद में हुए कुंभ और 1998 और 2010 में हरिद्वार में हुए कुंभ के भी प्रभारी रह चुके हैं.

उनके पास काफी अनुभव है और उनके नेतृत्व में काम कर रहे 8500 पुलिसकर्मी भी उन्हें उनके आकलन में मदद करते हैं. आलोक का कहना है कि उनके लोग पवित्र दिनों में स्नान करने वाले लोगों की संख्या का पता दो तरीकों से लगाते हैं.

पहला तरीका है कि <link type="page"> <caption> इलाहाबाद</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130114_kumbh_clickablemap_pp.shtml" platform="highweb"/> </link> जाने वाली सभी सात सड़कों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को गिना जाए और यह माना जाए कि सभी लोग कुंभ मेले की तरफ ही जा रहे हैं.

इन सात सड़कों पर हर दस मीटर पर निशान लगा दिया जाता है और हर मिनट पर इन निशानों से गुज़रने वाले लोगों को गिना जाता है.

कुंभ में श्रद्धालु
इमेज कैप्शन, कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या के अलग-अलग अनुमान मिलते हैं

आलोक शर्मा का कहना है कि पुलिस गली-कूचों से मेला आने वाले लोगों को नहीं गिन सकती है लेकिन उनका अनुमान है कि इस तरह के लोग मेला आने वाले कुल लोगों का 30% हैं.

दूसरे तरीके में पहले तरीके से मिलने वाले आंकड़ों की पुष्टि की जाती है. इसमें संगम के चारों तरफ फैले 2250 एकड़ के इलाके में पहुँचने वाले लोगों को गिना जाता है.

आलोक शर्मा का कहना है कि इलाहाबाद शहर से <link type="page"> <caption> मेला स्थल</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130114_kumbh_business_sdp.shtml" platform="highweb"/> </link> पर पहुँचने के लिए तीन सड़कें हैं और हम गिनने के लिए वही तरीका अपनाते हैं.

पहले दिन गंगा नदी पर स्थित पॉनटून पुल से मेला पहुँचने वाले लोगों को नहीं गिना गया. दोनों तरीकों के मिश्रण और इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों की संख्या को जोड़ कर आलोक शर्मा इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि सोमवार को <link type="page"> <caption> नहाने वाले</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130114_social_media_reactions_on_kumbh_pn.shtml" platform="highweb"/> </link> लोगों की संख्या 15 से 18 लाख के बीच रही होगी.

उपग्रह का सहारा

क्या इस तरह के मेले में पहुँचने वाले लोगों की वास्तविक संख्या निकाली जा सकती है?

आलोक शर्मा कहते हैं, "2010 के हरिद्वार के कुंभ मेले में हमने <link type="page"> <caption> उपग्रह चित्रों</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130117_kumbh_infotech_sdp.shtml" platform="highweb"/> </link> से लोगों को गिनने की कोशिश की. इससे हमें दो सबसे व्यस्त दिनों में लगभग डेढ़ करोड़ तीर्थ यात्रियों के स्नान करने का आँकड़ा मिला. लेकिन हमें ऐसा नहीं लगा कि यह वास्तविक आँकड़ा है. मैं इससे प्रभावित नही हुआ."

उपग्रह और आलोक शर्मा के ख़ुद के आँकड़ों में कितना अंतर था? उनके अनुसार, "करीब आधे यानी आठ लाख लोगों का."

फिर सोमवार को 85 लाख लोगों के नहाने के आँकड़े पर किस तरह पहुँचा गया? पुलिस के सहायक निरीक्षक हरि नारायण सिंह उस दिन लोगों की गिनती पर नज़र रखने वाले नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे.

वह दिन भर स्नान के इलाके में मौजूद <link type="page"> <caption> निगरानी टावर्स</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130112_kumbh_logistics_pix_gallery_arm.shtml" platform="highweb"/> </link> से संपर्क बनाए रहे. उनके अनुसार शाम सात बजे तक 85 लाख लोगों ने स्नान किया था. उन्होंने यह आँकड़ा प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक पहुँचाया, जिन्होंने मीडिया को यह बात बताई.

हरि नारायण सिंह के साथी इस आँकड़े पर किस तरह पहुँचे? उन्होंने कहा, "पहले हमने नज़रों से देख कर हर मिनट पानी से अंदर और बाहर जाने वाले लोगों का अंदाज़ा लगाया. फिर हमने हर घंटे आने वाले आंकड़ों को जोड़ दिया."

क्या यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं है कि आँकड़ों में बहुत भारी अंतर न आए? उनका कहना था, "ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि इसके पीछे कोई वास्तविक विज्ञान नहीं है."