पाकिस्तान नहीं लौटना चाहते हिंदू परिवार
पाकिस्तान के सिंध सूबे में बाढ़ से मची तबाही के बाद बीते साल करीब 150 हिंदुओं का एक जत्था भारत आया था.
इन हिंदुओं ने पाकिस्तान में उनके साथ मजहब के नाम पर होने वाले भेदभाव और ज्यादती की बुनियाद पर भारत में सियासी पनाह की दरख्वास्त दी थी.
हूकुमत ने उन्हें पाकिस्तान वापस जाने के लिए कहा, लेकिन अदालती हस्तक्षेप के बाद पनाह की दरख्वास्त पर फैसला आने तक उन्हें भारत में रहने की इजाज़त दे दी गई.
कुछ हिंदू संगठन इन लोगों के रहने-खाने की व्यवस्था कर रहे हैं.
खबरें हैं कि बीते कुछ महीनों में <link type="page"><caption> पाकिस्तान से आए सौ से ज्यादा हिंदुओं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/pakistan/2012/08/120810_pakistani_hindus_aa.shtml" platform="highweb"/></link> ने राजस्थान में पनाह ले रखी है.
भारत सरकार नहीं चाहती है कि वो पाकिस्तान से आए इन हिंदुओं का पक्ष लेते हुए नजर आए.
दिल्ली की व्यस्त रिंग-रोड के किनारे मजनूं का टीला नामक एक जगह है जहां लगभग आधा दर्जन हिंदू परिवारों ने शरण ली हुई है.
ये सभी लोग पिछले साल ही पाकिस्तान से आए थे, लेकिन फिर वापस नहीं गए.
क्यों वापस नहीं गए, ये पूछने पर पाकिस्तान के सिंध हैदराबाद इलाके से यहां आए कृष्ण ने बताया, ''मैं वहां मंडी में काम करता था, खेती-किसानी का भी काम करते थे. हम ये सोचकर भारत आए हैं कि हमारे बच्चों की जिंदगी सुधर जाएगी. यहां वे अपने धर्म में सुरक्षित रहेंगे, यहां इन्हें कोई तंग नहीं करेगा. हम पाकिस्तान में रहते तो वहां कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर होती. पिछले साल ही तीन-चार डॉक्टरों को मार दिया गया था.''
पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल के वर्षों में कई पाकिस्तानी हिंदू परिवारभारत चले गए हैं और उनका आरोप है कि वे हत्या, अपहरण और जबरन धर्मांतरण से बचना चाहते हैं.












