नरोदा पाटिया कांड: फ़ैसला 29 अगस्त को

अहमदाबाद की एक विशेष अदालत नरोदा पाटिया हत्याकांड में 29 अगस्त तक के लिए फैसला सुरक्षित कर लिया है.
अतिरिक्त प्रमुख न्यायाधीश ज्योत्सना याज्ञनिक ने कहा कि इस मामले में फैसला अब 29 अगस्त को सुनाया जाएगा.
इस घटना में 97 मुसलमान मारे गए थे और आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल एक मंत्री ने उस भीड़ का नेतृत्व किया था जिसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया.
घटना के 61 अभियुक्तों में नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री और नरोदा पाटिया से विधायक माया कोडनानी, पूर्व विश्व हिंदू परिषद नेता बाबू बजरंगी, स्थानीय भाजपा नेता बिपिन पांछाल, किशन कोरानी, अशोक सिंधी और राजू चौमल शामिल हैं.
कांड
ये वाकया 28 फरवरी 2002 को गोधरा कांड के बाद हुआ था जब शहर के नरोदा पाटिया इलाके को घेर कर 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी.
आरोप है कि इस भीड़ का नेतृत्व कोडनानी ने किया था.
गुजरात दंगों के दौरान सबसे क्रूरतम घटनाओं में से एक इस दंगे में 33 लोग घायल भी हुए थे.
नरोदा पाटिया कांड का मुकदमा अगस्त 2009 में शुरू हुआ और 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए थे. सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त विजय शेट्टी की मौत हो गई.
अदालत ने सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए. इनमें पत्रकार, कई पीड़ित, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी शामिल थे.












