बचपन में हुई शादी को बड़ी होकर तोड़ दिया

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भारत में अपने तरह के पहले मामले में एक युवती ने अपने बाल विवाह को चुनौती दी और इस संबंध को खत्म करने में सफल रही है.
18 वर्ष की लक्ष्मी सरगारा का विवाह राकेश के साथ तब हुआ था जब उसकी उम्र मात्र एक वर्ष थी जबकि राकेश उस वक्त तीन वर्ष का था.
वह अपने माता-पिता के पास रहकर पली बढ़ी और उसे अपने विवाह के बारे में इसी महीने तब पता चला जब उसके ससुराल के लोग उसे ले जाने के लिए पहुंचे.
उसने अपने ससुराल वालों के साथ जाने से इनकार कर दिया.
वैसे तो भारत में बाल विवाह गैरकानूनी है, लेकिन ग्रामीण और गरीब तबकों में यह अभी भी आम बात है.
लक्ष्मी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "मैं अपनी इस शादी से नाखुश थी. मैंने यह बात अपने माता पिता से कही लेकिन वे मुझसे सहमत नहीं थे, तब मैंने सहायता के लिए गुहार लगाई."
लक्ष्मी ने सहायता मांगी एक जोधपुर के सारथी ट्रस्ट नाम की स्वयंसेवी संस्था से.
'पहला मामला'

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सारथी ट्रस्ट की कृति भारती बताती हैं, "लक्ष्मी बहुत निराश थी. उसे लड़का पसंद नहीं था और वह अपने माँ बाप के कहने पर इस रिश्ते को नहीं निभाना चाहती थी."
कृति भारती का कहना है, "मेरी जानकारी में यह पहला मामला है जब बाल विवाह के बाद किसी ने शादी खत्म करने की पहल की है. उम्मीद करनी चाहिए कि इससे और लोग भी प्रेरणा लेंगे."
पहले तो लड़का राकेश चाहता था कि यह रिश्ता बना रहे लेकिन स्वयंसेवी संस्था के समझाने पर वह शादी खत्म करने पर राजी हो गया.
इसके बाद लक्ष्मी और राकेश दोनों ने नोटरी के समक्ष पेश होकर एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए कि वे इस शादी को खत्म कर रहे हैं.
जयपुर में पत्रकार नारायण बारेठ का कहना है कि हाल ही में एक सर्वेक्षण से पता चला है कि राजस्थान में अभी भी 10 प्रतिशत लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में कर दिया जाता है.
संवाददाताओं का कहना है कि ऐसा बहुत कम होता है जब लड़कियाँ बाल विवाह से इनकार करती हों.
यूनीसेफ का कहना है कि दुनिया भर में होने वाले बाल विवाह में से 40 प्रतिशत भारत में होते हैं, हालांकि हाल के वर्षों में इसमें कमी आई है.












