मालेगांव धमाके के अभियुक्तों को ज़मानत

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साल 2006 में हुए महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए धमाकों के आरोप में गिरफ़्तार सभी नौ लोगों की ज़मानत मिल गई है.
मामले की जांच कर रही नेशनल इवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने मुंबई की एक मकोका (महाराष्ट्र का आतंकवाद और संगठित अपराध निरोधी क़ानून) अदालत में इनकी ज़मानत का विरोध नहीं किया.
मालेगांव धमाके में 37 लोग मारे गए थे.
बचाव पक्ष के एक वकील जलील ने बीबीसी को बताया, “अदालत में एनआईए की वकील रोहिणी सालियान ने कहा कि उन्हें सभी नौ अभियुक्तों के ख़िलाफ़ अब तक कोई बाजिव सबूत नहीं मिला है. उन्होंने इन लोगों की ज़मानत पर कोई आपत्ति नहीं जताई. इस पर अदालत ने कहा इन सभी को 50 हज़ार के मुचलके छोड़ा जाता है. ”
'इंसाफ़ अधूरा है'
वकील ने बताया कि इंसाफ़ की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, “इंसाफ़ अभी पूरा नहीं हुआ है. क्योंकि इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने जो चार्जशीट दाख़िल की और बेगुनाहों को फंसाया उसके बारे में एनआईए की आख़िरी रिपोर्ट आने के बाद ही हम अपना अगला क़दम तय करेंगे. ”
ज़मानत मिलने वाले अभियुक्तों में से एक शब्बीर मसीउल्लाह के भाई जमील मसीउल्ला भी अदालत में मौजूद थे.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि पिछले पांच साल उनके परिवार के लिए मुश्किलों भरे रहे हैं.
जमील मसीउल्लाह ने बीबीसी को बताया, “ये पांच साल रोज़ाना ज़िंदगी और मौत की कशमकश के लम्हों से भरे रहे हैं. कभी अच्छी ख़बर मिलती थी लगता था कि वो बाहर आ जाएंगे. बाद में जब असीमानंद ने बयान दिया तो उम्मीद बंधी थी कि ये लोग बाहर आ जाएंगे. ”
ग़ौरतलब है कि स्वामी असीमानंद ने एक इकबालिया बयान में मालेगांव धमाके ज़िम्मेदार स्वीकार ली थी. उसके बाद से ही इन सभी लोगों को ज़मानत मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी.
हालांकि बाद में असीमानंद अपने बयान से पलट भी गए थे.












