'गोरखालैंड पर समझौता अंतिम नहीं'

ममता बैनर्जी

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इमेज कैप्शन, ममता बैनर्जी ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि समस्या हल हो गई है

पश्चिम बंगाल सरकार से समझौता करने पर दार्जिलिंग में विरोध का सामना कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने कहा है कि समझौते में नए स्वायित्व काउंसिल के गठन की जो बात कही गई है वो दर असल एक अलग राज्य या केंद्र शासित राज्य बनाने की दिशा में उठाया गया क़दम है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मंगलवार को दार्जिलिंग के जिमख़ाना क्लब में दार्जिलिंग, कलिमपोंग और कुर्सियोंग के नेताओं की बैठक हुई थी.

बैठक के एक दिन बाद बुधवार को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष बिमल गुरूंग ने एक बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार से किया गया समझौता अंतिम नहीं है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बिमल गुरूंग ने कहा, ''इस बारे में अंतिम फ़ैसला पहाड़ के लोगों की इच्छाओं के अनुसार ही लिया जाएगा, और ज़्यादातर लोग एक अलग राज्य चाहते हैं.''

बयान में ये भी कहा गया है कि मोर्चा नए काउंसिल के गठन के लिए कोई संवैधानिक ज़मानत नहीं चाहता है क्योंकि इससे इस समझौते को अंतिम स्वरूप दे दिया जाएगा.

मोर्चा के सूत्र बताते हैं कि जिमख़ाना क्लब की बैठक गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के दो गुटों के बीच टकराव होने के बाद की गई थी.

'विरोध'

दार्जिलिंग (फ़ाईल फ़ोटो)

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इमेज कैप्शन, दार्जिलिंग के कई गुट अपने लिए अलग राज्य की मांग कर रहे हैं

कोलकाता में राज्य सरकार से समझौते पर हस्ताक्षर करने के दो दिन बाद कलिमपॉंग में मोर्चा के दो गुटों में झड़प हो गई थी क्योंकि समझौते में अलग राज्य की पूरानी मांग को कथित तौर पर कमज़ोर कर दिया गया है.

सूत्रों के अनुसार समझौते के बाद से ही तीनों उपमंडल में निचले स्तर के नेताओं में काफ़ी रोष है.

जिमख़ाना कलब की बैठक में मोर्चा के महासचिव रौशन गिरि, प्रमुख नेता हरकाबहादुर क्षेत्री, दार्जिलिंग के विधायक त्रिलोक दिवान के अलावा दूसरे कई नेता शामिल थे.

उस इलाक़े में सक्रिय दूसरे संगठन जैसे ऑल इंडिया गोरखा लिग और सीपीआरएम ने धमकी दी है कि अगर नई काउंसिल का गठन हुआ तो वो आंदोलन शुरू करेंगे क्योंकि इससे पहाड़ के लोगों की अलग राज्य की पुरानी मांग कमज़ोर पड़ती है.

गोरखा लीग के नेता लक्ष्मण प्रधान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पार्टी चाहती है कि उनके पूर्व पार्टी प्रमुख मदन तमांग की हत्या की सीबीआई जांच जल्द पूरी की जाए. मदन तमांग की हत्या के पीछे कथित तौर पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता शामिल थे.

लक्ष्मण प्रधान ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि मोर्चा के जिन नेताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज है मदन तमांग की हत्या में उनकी भूमिका की जांच की जाए.