जावा में महाभारत...

- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जयपुर
शिखंडी भारत में कुछ भी रहा हो, लेकिन इंडोनेशिया के जावा द्वीप पहुंचते पहुंचते शिखंडी एक औरत हो गया. जावा की महाभारत कथा उसकी मांग में अर्जुन का सिंदूर देखती है.
वो अर्जुन की दूसरी पत्नी है. अगर जावा की सदियों से प्रचलित महाभारत कथा पर भरोसा करें तो द्रौपदी धर्मराज युधिष्ठिर की पत्नी है, न कि पांच पांडव भाइयों की. बाकी महाभारत वैसी ही है, उतनी ही लोकप्रिय है जितनी भारत में.
इंडोनेशिया के जावा में महाभारत का मंचन बहुत लोकप्रिय है. जावा में महाभारत का मंचन करने वालों का एक दल भारत पिछले दिनों भारत आया और इस पौराणिक कथा का मंचन किया. ये उनके लिए बहुत अदभुत अनुभूति थी कि इसका मंचन दिल्ली यानी इंद्रप्रस्थ में किया गया जो कभी पांडवों की राजधानी थी.
ये दल जयपुर भी आया और महाभारत कथा की जावा शैली से लोगों को रूबरू कराया. वे जावा में पुतलियों के जरिए महाभारत का मंचन करते है.
कला मंडप के पट खुले और पर्दा गिरा तो महाभारत के पात्र सामने थे, मगर पुतलियो में. भाषा की भिन्नता, मगर भाव वही.
इस दल के साथ अमरीका की कैथरीन एमर्सन भी थी. वो 20 पहले जावा पहुंची, महाभारत का मंचन देखा और अभिभूत हो गई.
उसने जावा की जबान सीखी और अब इन कलाकारों की मदद में हर जगह जाती है. ये कलाकार जावा की भाषा में मंचन करते है. कैथरीन साथ साथ अंग्रेजी में अनुवाद कर इस कथा के भाव से लोगों को समझाती है.
कैथरीन को इस महाभारत कला के मंचन का बहुत ज्ञान है.
वो कहने लगी, " इंडोनेशिया के बाली द्वीप में रामायण का बोलबाला है तो जावा तो महाभारत के लिए समर्पित है. बस, रमजान को छोड़ कर पूरे वर्ष महाभारत कथा का मंचन होता रहता है. अगर जावा में रामायण का मंचन साल में 20 बार होता है तो महाभारत का कोई 100 बार.''
क्या ये कथा सामाजिक समरसता में कोई योगदान करती है. कैथरीन कहती है, " हाँ बिलकुल, ये कलाकार अपनी कथा के जरिए सदभाव का सन्देश देते है. एक मंचन में 30 कलाकार होते है.''
सामाजिक समरसता
भारत में इस दल के साथ सात लोग आये थे. ये पहला मौक़ा था जब जावा का ये दल उस धरती पर आया जहां महाभारत हुआ था.
भारत के महाभारत से जावा की कथा कितनी भिन्न है. कैथरीन बताने लगी, " कुछ फर्क है, जैसे शिखंडी वहां अर्जुन की दूसरी पत्नी है. द्रोपदी पांचों भाइयों की नहीं, केवल युधिष्ठिर की धर्मपत्नी हैं. शकुनी को वहां भी एक बुरे पात्र के रूप में देखा जाता है. हाँ भीम का पुत्र घटोत्कच बहुत लोकप्रिय है."
जावा में कोई 150 से ज्यादा ऐसे कलाकार है जो महाभारत के मंचन से जुड़े है. लेकिन इनमें पांच तो ऐसे है जो वहां सुपर स्टार माने जाते है. उनमें से एक पुरबो अस्मोरो भारत में हमें मिले.
हमने उनसे पूछा महाभारत का कौन सा पात्र उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है, वे बोले, " भीम, अर्जुन और युधिष्ठिर. मेरे बच्चे भी इस कला को सीख रहे है."
पुरबो प्रोफेसर है और केंद्रीय जावा में रहते है. कितना फर्क है दोनों देशो की महाभारत में? पुरबो बोले कहाँ से शुरू करूँ, कहना मुश्किल है.
कुछ मसखरे पात्र भी

जावा के लोगो ने अपने हिसाब से कुछ तब्दीलियाँ की होगीं. इसमें द्रोण और शकुनी की पिटाई के दृश्य हैं, कुछ जावा के लोगों ने इस कथा में मसखरे पात्र भी शामिल किए है, जो पूरी कथा में दर्शको का मनोरंजन करते रहते हैं.
भारत में शिखंडी क्या था. मैंने जयपुर में धर्म ग्रंथों के ज्ञाता कलानाथ शास्त्री से पूछा, उन्होंने बताया, " शिखंडी ध्रुपद की कन्या थी. उसके चरित्र में एक अदभुत बात थी कि वो किसी से पुरुषत्व ग्रहण करता है. वो दो लैंगिक चरित्र वाला था. उसने लिंग परिवर्तन करवाया था. वो नपुंसक था, उसे किन्नर के रूप में ही देखा जाता है.''
इंडियन कॉउसिल ऑफ़ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सतीश शर्मा इंडोनेशिया जाते रहे है.
वो कहते हैं, " पहली सदी में भारतीय व्यापारी वहाँ जाते रहे और अपने साथ ये कथा भी ले गए. रामायण और महाभारत का वहां बहुत प्रचलन है. बाद में वायंग नाम के नाट्य दल इसका मंचन करने लगे.''
वो बताते हैं कि महाभारत और रामायण वहाँ घर-घर में है. पात्र थोड़े से भिन्न है, मगर कथानक वही है. थोड़ा बदलाव आप जरूर देख सकते है. मगर महाभारत के मौलिकता में कोई अंतर नहीं किया गया है.
कैथरीन कहती हैं कि एक-एक प्रदर्शन को देखने पांच-पांच हज़ार लोग आते है. वे कहती हैं, " जब भी घर परिवार में कोई मुबारक मौका होता है, शुभ घड़ी आती है, महाभारत कथा का मंचन किया जाता है. हाँ ये इस्लामिक देश है, मगर लोग बहुत उदार है. बहुत सहिष्णु है."
भारत हो या सुदूर इंडोनेशिया, ये पौराणिक गाथा ये ही आह्वान करती है कि सच को प्रताड़ित तो किया जा सकता है, मगर पराजित नहीं.












