नार्को टेस्ट असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फ़ैसले में नार्को टेस्ट और ब्रेन मैपिंग को असंवैधानिक करार दिया है.
बुधवार को सुनाए गए फ़ैसले में सर्वोच्च न्यायालय का कहना था कि दवा के प्रभाव में अभियुक्त या संदिग्ध अभियुक्त से लिए गए बयान से उसकी निजता के अधिकार का हनन होता है.
मुख्य न्यायाधीश के जे बालाकृष्णन के नेतृत्व वाले बेंच ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को नार्को टेस्ट के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
साथ ही ये भी कहा है कि अगर कोई अपनी मर्ज़ी से इसके लिए तैयार होता है तब भी उसके बयान को सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता.
अबतक की स्थिति भी यही थी कि नार्को टेस्ट से लिया गया बयान एक पुख़्ता सबूत के तौर पर पेश नहीं हो सकता था लेकिन उसे अदालत में मुख्य सबूत के साथ जोड़कर देखा जा सकता था.
अब ऐसा तो नहीं हो सकेगा लेकिन फ़ैसले से ये लगता है कि जांच पड़ताल में इसके इस्तेमाल पर रोक नहीं लगी है.
पिछले दिनों में कई बड़े मामले, मिसाल के तौर पर तेलगी केस, आरूषि हत्याकांड, निठारी केस सबमें इसका इस्तेमाल हुआ था.
पूरे देश में की अभियुक्तों ने इसके ख़िलाफ़ अलग अलग अदालतों में अपील दायर की थी और सुप्रीम कोर्ट ने इन सब मामलों पर सुनवाई के बाद अपना फ़ैसला सुनाया है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर विधि आयोग की भी सलाह ली थी.
संयुक्त राष्ट्र में इस तरह के टेस्ट पर प्रतिबंध है.












