जुड़े दिल के रिश्ते

अस्पताल
इमेज कैप्शन, भारत में इलाज के लिए बहुत सारे पाकिस्तानी हर साल आते हैं
    • Author, गीता पांडे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत और पाकिस्तान को कूटनीति भले ही दूर रख रही हो, लेकिन दोनों देशों के बीच दिल का रिश्ता जुड़ चुका है.

दक्षिण भारत के शहर बंगालुरू के नारायण हृदयालय में पाकिस्तान से आए दिल के ऐसे कई मरीज़ हैं जिन्हें यहाँ दूसरी ज़िंदगी मिली है.

पाकिस्तान के कराची शहर से आए अब्दुल ग़फ़्फ़ार ऐसे ही कई पाकिस्तानियों में से एक हैं, जो इन दिनों अपने इलाज के लिए भारत का रूख़ कर रहे हैं.

अब्दुल ग़फ़्फ़ार के भाई अली बख़्श का कहना है कि अब्दुल को जन्म से ही दिल की बीमारी थी.

अली बख़्श ने कहा "उनके दिल में दो बड़े छेद थे और कुछ वाल्व भी ग़ायब थे. वो बहुत कमज़ोर थे और चल भी नहीं पाते थे. उनके हाथों में कोई दम नहीं रह गया था. लेकिन अल्लाह का शुक्र है, वो अब बिलकुल ठीक हैं."

अली बख़्श ने बताया कि वो अब्दुल ग़फ़्फ़ार को भारत इसलिए ले आए क्यूंकि पाकिस्तान में डॉक्टरों ने बताया कि उनका इलाज पाकिस्तान में नहीं किया जा सकता, उन्हें भारत ले जाना चाहिए.

पाकिस्तान के डॉक्टरों ने अब्दुल ग़फ़्फ़ार के बारे में नारायण हृदयालय को ईमेल से सूचना दी और अस्पताल ने सर्जरी करने का प्रस्ताव अपनी ओर से भेज दिया.

अस्पताल के अध्यक्ष और मुख्य चिकित्सक डॉक्टर देवी शेट्टी का कहना है, "अब्दुल को पलमनरी अट्रेसिया था, जिसका मतलब ये हुआ कि उनके दिल और फेफड़ों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं था. हमने इन्हें जोड़ने के लिए एक कृत्रिम ट्यूब का इस्तेमाल किया है."

तनाव के बाद भी

तार, भारत-पाक सरहद पर
इमेज कैप्शन, भारत और पाकिस्तान के बीच का रिश्ता काफ़ी उल्झा हुआ रहा है

1947 में देश के विभाजन के बाद से भारत और पकिस्तान के बीच अबतक तीन युद्ध हो चुके हैं और दोनों देशों के बीच लंबे समय से रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं.

हालांकि दोनों देशों के बीच कश्मीर के विवादित मामले पर टकराव हमेशा से ही चला आ रहा है लेकिन 2008 के मुंबई हमलों के बाद से दोनों के बीच रिश्तों में और भी कड़वाहट आई.

भारत ने इन हमलों के लिए पाकिस्तान स्थित चरमपंथी गुट, लश्कर-ए-तैयबा को ज़िम्मेदार ठहराया और शुरूआती इंकार के बाद पाकिस्तान ने ये माना कि मुंबई पर हमले की योजना आंशिक तौर पर उसी की धरती पर बनी थी.

नाराज़ भारत ने उसके बाद पाकिस्तान के साथ अपनी आधिकारिक बातचीत रोक दी और उसके बाद से दोनों देशों के बीच के रिश्तों में ठहराव सा आ गया.

इस माहौल में नारायण हृदयालय अपनी तरफ़ से "ट्रैक टू" की कूटनीति को जारी रखे है--भारत में पाकिस्तानियों के हृदय को जोड़कर.

डॉक्टर शेट्टी ने बताया कि हर साल उनका अस्पताल क़रीब 100 पाकिस्तानियों का ऑपरेशन करता है और मरीज़ों में ज़्यादातर बच्चे होते हैं.

डॉक्टर शेट्टी के आलावा अली बख़्श का भी कहना था कि मरीज़ों के लिए वीज़ा के मामले पर भारत सरकार का रुख़ हमदर्दी का होता है.