सोहराबुद्दीन मामले की सीबीआई जाँच

सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी क़ौसर बी
इमेज कैप्शन, गुजरात सरकार ने इस मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों को गिरफ़्तार किया है

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख़ मुठभेड़ मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से करवाने के आदेश दिए हैं.

सोहराबुद्दीन के परिजन कहते रहे हैं कि वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन को फ़र्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था.

सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने अदालत में याचिका दायर कर कथित फ़र्जी मुठभेड़ की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने और सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी को अदालत में पेश करने की माँग की थी.

बाद में गुजरात सरकार ने यह भी स्वीकार किया था कि सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की भी हत्या हो चुकी है और उनके शव को जला दिया गया था.

गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार इस मामले की जाँच कर रही थी और उसका कहना है कि विशेष जाँच दल (एसआईटी) निष्पक्ष रुप से जाँच कर रहा है.

इस मामले में तीन आईएएस अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया है.

लेकिन सोहराबुद्दीन के परिवारजन और उनके वकील इस मामले की सीबीआई जाँच करवाने की माँग करते रहे हैं.

मामला

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी और न्यायमूर्ति आफ़ताब आलम के पीठ ने सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन की माँग स्वीकार करते हुए मंगलवार को इस पूरे मामले की जाँच सीबीआई से करवाने के आदेश दिए हैं.

रुबाबुद्दीन के वकील एजाज़ अहमद ने इस फ़ैसले पर संतुष्टि ज़ाहिर करते हुए कहा है, "हम चाहते थे कि इस मामले दोषियों को सज़ा मिले और हमें लगता है कि सीबीआई इस मामले की ठीक तरह से जाँच कर सकेगी."

26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस की एक मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे.

गुजरात पुलिस ने कहा था कि सोहराबुद्दीन शेख़ चरमपंथी थे. लेकिन बाद में गुजरात सरकार की जाँच में पुलिस का यह दावा ग़लत साबित हुआ था.

इसके बाद सोहराबुद्दीन शेख़ के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाकर न्याय की गुहार लगाई और दावा किया कि मुठभेड़ फ़र्जी थी.

इसके बाद इस मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों- डीजी वंज़ारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश कुमार एमएन को गिरफ़्तार किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सोहराबुद्दीन के परिजनों को मुआवज़ा देने के आदेश दिए थे.