मणिपुर पर अमित शाह का यह बयान और जस्टिस चंद्रचूड़ ने जो कहा- प्रेस रिव्यू

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मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के हिंसक संघर्ष के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि बहुसंख्यक मैतेई को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने वाले अदालती आदेश पर सभी पक्षों के साथ मिल कर बात की जाएगी.
उन्होंने कहा कि किसी को डरने की ज़रूरत नहीं है.
'द हिंदू' ने मणिपुर के ताजा हालात के बारे में ब्योरा देते हुए लिखा है कि राज्य में हिंसा और उसके बाद सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई के बीच अमित शाह ने आठ मई के अपने बयान में राज्य के लोगों से कहा कि कोर्ट के फैसले पर चर्चा होगी.
इस बीच, सेना ने मणिपुर-म्यांमार बॉर्डर पर हवाई गश्त की ताकि विद्रोही गुटों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके.
मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह ने 'द हिंदू' से राहत शिविरों में रह रहे 35 हज़ार लोगों में से 20 हज़ार को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाया जा चुका है. अब भी 15 हज़ार लोग इन कैंपों में रह रहे हैं.
इस बीच कई जगह कर्फ्यू में ढील दी गई है. सिंह ने कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है. पुलिस के शस्त्रागार से लूटे गए 215 हथियार बरामद कर लिए गए हैं.
इम्फाल में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने बताया कि 60 'बेकसूर' लोगों की मौत हुई. 231 लोग घायल हुए हैं और 1700 घरों को जला दिया गया है.
उन्होंने बताया कि हिंसा भड़काने वाले लोगों का पता करने के लिए एक हाई लेवल कमिटी बनाई जाएगी. साथ ही अपना कर्तव्य निभाने में नाकाम रहे अधिकारियों की भी पहचान की जाएगी.
क्या है कोर्ट का निर्देश
मणिपुर हाई कोर्ट ने 27 मार्च को राज्य सरकार को ये निर्देश दिया था कि वो मैतेई को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए अपनी सिफ़ारिश दे.
कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार चार हफ़्ते में इस प्रस्ताव पर विचार कर लेने को कहा था. हालांकि अंतिम फ़ैसला केंद्र का होगा.
लेकिन मौजूदा 34 अनुसूचित जनजातियों ने कोर्ट के इस प्रस्ताव का विरोध किया.
राज्य में इन जनजातियों की 41 फ़ीसदी आबादी है और ये पहाड़ी इलाकों में रहते हैं. कोर्ट के इस निर्देश के बाद तीन मई को चुराचांदपुर में एक ट्राइबल 'सॉलिडेरिटी रैली' निकाली गई.
इसके बाद राज्य में हिंसा भड़क उठी. मुख्यमंत्री एन वीरेन सिंह के मुताबिक़ इस हिंसा में 60 लोग मारे गए हैं.
'द हिंदू' लिखता है कि अमित शाह ने इंडिया टुडे के दिए गए गए इंटरव्यू में कहा, ''कोर्ट ने एक फ़ैसला दिया है. अब मणिपुर सरकार सभी पक्षों से मशविरा कर उचित फ़ैसला लेगी. किसी समुदाय या व्यक्ति को इससे डरने की ज़रूरत नहीं है.''
हालांकि राज्य सरकार ने इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी है.
'द हिंदू' की एक ही दूसरी ख़बर में अनुसूचित जातियों की लिस्ट में नए समुदाय को जोड़ने या हटाने के संबंध में देश के चीफ़ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की टिप्पणी का ज़िक्र किया है.
अख़बार लिखता है कि मणिपुर में हिंसा के बाद हालात सामान्य होने की ख़बरों के बीच जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा है कि मणिपुर हाई कोर्ट को इस संबंध में 23 साल पुराने संवैधानिक पीठ का फैसला क्यों नहीं दिखाया गया. इस फैसले में कहा गया है कि कोई भी अदालत या सरकार को अनुसूचित जनजाति की लिस्ट में कुछ जोड़ने, घटाने या उसे संशोधित करने का अधिकार नहीं है.
जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि होई कोर्ट के पास अनुसूचित जाति की लिस्ट में संशोधन का अधिकार नहीं है. ये अधिकार राष्ट्रपति के पास है कि वो किसे अनुसूचित जाति या जनजाति का दर्जा दे.

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मणिपुर में क्या हैं हालात?
फ़िलहाल राज्य में हालात सामान्य करने की कोशिश हो रही है. आर्मी और असम राइफल्स ने अब तक अपने घरों से विस्थापित हुए 23 हजार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया है.
इनमें 9500 हजार लोग मैतेई समुदाय के हैं और 10000 लोग कुकी समुदाय के. इन्हें राज्य के अलग-अलग मिलिट्री कैंपों में रखा गया है. दूसरे राज्यों के भी कुछ हजार लोगों को राज्य से बाहर ले जाया गया है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि मणिपुर के 2000 परिवारों ने उनके राज्य के कछार जिले में शरण ली है.

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समुद्र में फिर उतरा चीन का सर्विलांस जहाज, भारत-आसियान पर नजर
चीन का एक सर्विलांस जहाज ज़ियांग यांग होंग 10 और कम से कम कम से कम आठ मैरिटाइम मिलिशिया जहाज उस समुद्री इलाके में घुस आए, जहां सोमवार को भारत और आसियान का संयुक्त नौसेना अभ्यास खत्म हुआ था.
ये जहाज चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के अग्रिम मोर्चे में शामिल हैं.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' ने इस मामले पर विस्तार से ख़बर देते हुए लिखा है कि ये चीनी जहाज भारत-आसियान नौसेना अभ्यास की जगह में घुसने के बाद वियतना के खास इकोनॉमिक जोन में पहुंच गया.
हालांकि इस मामले की जानकारी रखने वाले आला अधिकारियों ने कहा कि अभी ये पता नहीं चल पाया है कि उनका इरादा नौसेना अभ्यास पर नज़र रखना था या वियतनाम के इकोनॉमिक जोन में घुसना. समुद्र में चीन का इस क्षेत्र को लेकर विवाद है.
अख़बार लिखता है कि इस चीनी जहाज की इस क्षेत्र में मौजूदगी की सबसे पहले ख़बर सोशल मीडिया पर रे पॉवेल ने दी.
रे पॉवेल अमेरिकी वायुसेना में काम कर चुके हैं और स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में गॉर्डियन नॉट सेंटर फॉर नेशनल सिक्योरिटी इनोवेशन में दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों पर नज़र रखते हैं.
इस मामले की जानकारी रखने वाले हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि इस नौसना अभ्यास में शामिल भारतीय जहाज ने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) को स्विच ऑफ कर दिया ताकि अंधेरा हो जाए. नौसेना अभ्यास में शामिल दूसरे जहाजों ने भी ऐसा ही किया.

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ईबी-5 वीजा क्या है, भारतीय क्यों लगा रहे हैं इसके लिए लंबी लाइन
अमेरिका में नौकरियों में कटौती को लेकर बढ़ती चिंता के बीच ईबी-5 वीजा हासिल करने के लिए भारतीय आवेदकों की संख्या बढ़ती जा रही है.
'इकोनॉमिक्स टाइम्स' में अमेरिकी नागिरकता और आव्रजन सेवा ( यूएससीआईसी) के आंकड़ों का हवाला देकर छापी गई
ख़बर में लिखा है कि ईबी-5 वीजा के आवेदकों को कम से कम वहां आठ लाख डॉलर निवेश करना होता है ताकि कम से कम 10 नौकरियां पैदा हों.
ईबी-5 कार्ड लगभग ग्रीन कार्ड के बराबर होता है, जो अमेरिका में स्थायी नागरिकता के लिए जरूरी है. अख़बार ने लिखा है कि कई भारतीय नागरिक वहां रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए आपस में पैसा इकट्ठा कर रहे हैं. इस तरह की पूलिंग का पैसा वो इस सेक्टर में लगा रहे हैं ताकि उन्हें ईबी-5 वीजा मिल सके.
आंकड़ों के मुताबिक़ 2019 में ईबी-5 वीजा के लिए 756 भारतीयों ने आवेदन किया था लेकिन 2022 में ये संख्या बढ़ कर 1381 हो गई. किसी एक साल में ईबी-5 वीजा के लिए ये आवेदकों की सबसे बड़ी संख्या थी.
अमेरिका में रहने वालों के लिए ईबी-5 वीजा की प्रक्रिया चार महीनों में पूरी हो जाती है. वहीं भारत में रहने वालों के लिए इसमें लगभग एक साल लगता है.
फिलहाल चीन के लोगों के पास सबसे ज्यादा ईबी-5 वीजा है.लगभग नब्बे फीसदी ईबी-5 वीजा चीनियों के पास है.

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भारत में 72 फीसदी मौतें बगैर डॉक्टरी प्रमाण के घोषित
देश में 72 फीसदी मौतें डॉक्टर के जरिये प्रमाणित नहीं होती हैं.
'अमर उजाला' ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों को हवाला देकर लिखा है कि घरों में होने वाली इन मौतों पर परिजन खुद ही फैसला ले लेते हैं, जबकि 23 फीसदी मौतों पर नीति बनाई जा रही है.
अख़बार लिखता है कि बिना डॉक्टर से प्रमाणित मौतों की असल वजह की जानकारी पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती है. केवल 22.5 फीसदी मौतें डॉक्टर द्वारा प्रमाणित होती हैं. और उन्हीं के जरिये मौत के कारणों की जानकारी का एक अनुमान लगा लिया जाता है.

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अख़बार ने लिखा है कि डब्ल्यूएचओ के एक अध्ययन में कहा गया है कि भारत में कंप्यूटर की तुलना में चिकित्सक प्रमाणित मौखिक शव परीक्षण ज्यादा कारगर है.
बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हुए इस अध्ययन में डब्ल्यूएचओ के अलावा दिल्ली एम्स और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) सहित कई संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं. इसमें नागरिक पंजीकरण प्रणाली रिपोर्ट (सीआरएस) 2020 का हवाला देते हुए बताया गया कि बीते कुछ साल से भारत में मृत्यु पंजीयन तेजी से बढ़ा है. आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा है कि अध्ययन के परिणाम अहम होंगे.
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