मणिपुर: अब तक 52 लोगों की मौत, मुख्यमंत्री ने कहा- सुधर रहे हैं हालात - प्रेस रिव्यू

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मणिपुर में हिंसा जारी है. राज्य में बुधवार को शुरू हुए कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष में अब तक 52 लोगों की मौत हो गई है.

'इंडियन एक्सप्रेस' ने लिखा है राज्य के हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक की.

साथ ही एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिये सुरक्षाकर्मियों को भी संबोधित किया ताकि हिंसा पर तुरंत काबू किया जा सके.

मुख्यमंत्री ने शनिवार की रात कहा कि राज्य में 'क़ानून-व्यवस्था' की स्थिति सुधर रही है.

"राज्य सरकार और विवाद से जुड़े सभी पक्षों के बीच बातचीत" के बाद उन्होंने चुराचांदपुर में हालात सुधरने का दावा किया गया है.

उन्होंने कहा, "मुझे ये बताते हुए खुशी हो रही है कि कर्फ्यू आंशिक तौर पर हटाया जाएगा."

वहीं शनिवार रात मणिपुर सरकार के सुरक्षा अधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा, "राज्य में अनुच्छेद 355 (क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र को आपातकाल लागू करने का अधिकार देने से जुड़ा अनुच्छेद) लागू नहीं किया गया है. कुछ तत्वों ने भ्रम फैलाया है. ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. "

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अब तक 52 लोगों की मौत

इंडियन एक्सप्रेस ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि यहां के तीन प्रमुख अस्पतालों में लाए गए शवों के बाद अब तक हिंसा में मरने वालों की संख्या 52 हो गई है. हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या अभी जारी नहीं की है.

चुराचांदपुर में शुक्रवार की हिंसा में सात मौतें हुई थीं. पुलिस के मुताबिक़ इनमें से तीन लोग ऐसे थे, जो मैतेई लोगों को हटाने वाले लोगों पर हुई पुलिस फायरिंग में मारे गए थे.

चुराचांदपुर जिला अस्पताल के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर के मुताबिक़ 3 मई को हिंसा भड़कने के बाद से यहां 12 शव आ चुके हैं.

इम्फाल में रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज में अब तक 26 शव आ चुके हैं. इनमें महिलाओं के दो शव भी शामिल हैं.

इम्फाल ईस्ट स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज में भर्ती दो घायलों की मौत हो गई है. यहां अलग-अलग जिलों से 12 शव लाए गए थे. हालांकि अभी तक एक भी शव पर किसी परिवार ने दावा नहीं जताया है.

चुराचांदपुर में कथित फायरिंग में जिन लोगों की मौत हुई है उनमें 34 वर्षीय महिला नियांगचोइचिंग भी शामिल हैं. उनके भाई लैम जैकब ने बताया कि वह 2021 से ही चुराचांदपुर जिला अस्पताल में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रही थीं. इससे पहले वो दिल्ली में आठ साल काम कर चुकी थीं.

जैकब ने बताया, "शाम को हम घर पर थे. तभी हमने आर्मी के लोगों की ओर मैतेई लोगों को वहां से निकालने का शोर सुना. हमें सड़क बंद करनी थी. हर कोई सड़क की ओर भागा. वो भी निकलीं. मैं घर में था. दस से पंद्रह मिनट के बाद ही हमने सुना कि वो घायल हो गई हैं. हम उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे लेकिन रास्ते में ही हमें बताया गया कि उनकी मौत हो गई है."

मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह

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कर्नाटक में सोनिया की पहली रैली

कर्नाटक के चुनाव प्रचार अभियान में सोनिया गांधी की एंट्री चर्चा का विषय बना हुआ है. शनिवार को सोनिया गांधी ने हुबली में एक चुनावी सभा को संबोधित किया.

इस सभा में उन्होंने कहा कि बीजेपी देश को 'विनाश के रास्ते' पर ले जा रही है.

सोनिया ने बीजेपी नेताओं की उन टिप्पणियों की आलोचना की जिनमें उन्होंने कहा था कि लोग पार्टी को वोट देकर नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद लें.

सोनिया गांधी ने कहा कि लोगों की किस्मत किसी एक नेता के आशीर्वाद पर नहीं टिकी है. लोग अपनी किस्मत का फ़ैसला खुद करें.

वहीं बीजेपी की एक चुनावी सभा में बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने कहा था कि लोग बीजेपी के पक्ष में वोट दें ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से वंचित न रह जाएं.

सोनिया गांधी

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'इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर के मुताबिक़ सोनिया गांधी ने अपनी चुनावी सभा में कहा, "राज्य में सामाजिक न्याय का एक इतिहास रहा है, इससे खिलवाड़ न करें. अपने राजनीतिक लालच को पूरा करने के कर्नाटक और देश को विनाश के रास्ते पर न ले जाएं."

उन्होंने कहा, "आज हालात ये हैं कि बीजेपी के नेता खुलेआम धमकी दे रहे हैं. वे कह रहे हैं कि अगर बीजेपी नहीं जीती तो कर्नाटक के लोगों को मोदी का आशीर्वाद नहीं मिलेगा."

"वो कह रहे हैं कि बीजेपी जीती तो दंगे नहीं होंगे. लेकिन राज्य के लोग किसी के आशीर्वाद पर निर्भर नहीं हैं. वो उनकी मेहनत और समर्पण पर भरोसा करते हैं. समय आ गया है कि कर्नाटक के लोग बताएं कि लोगों की किस्मत नेताओं के आशीर्वाद पर निर्भर करता है. नेताओं की किस्मत लोगों के आशीर्वाद पर निर्भर करती है. लोग नेताओं की किस्मत तय करते हैं."

इस साल की सोनिया की ये पहली चुनावी सभा थी. राज्य में अब तक राहुल गांधी 17 रैलियां और रोड शो कर चुके हैं, वहीं प्रियंका गांधी ने 19 रैलियां की हैं.

सोनिया ने 1999 में राज्य की बेल्लारी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. वो बीजेपी नेता सुषमा स्वराज को हराकर लोकसभा पहुंची थीं.

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हरियाणा के मंत्री अनिल विज बोले, पहलवानों के मामले में मध्यस्थता करने को तैयार...

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने जंतर-मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों का समर्थन किया है.

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की ख़बर के मुताबिक़ विज ने कहा कि पहलवानों की चिंताओं का समाधान सम्मानजनक ढंग से होना चाहिए. इसके लिए वो मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं.

अख़बार के मुताबिक़ विज ने कहा, "मैं खेल मंत्री रह चुका हूं. मैं खिलाड़ियों का पूरा समर्थन करता हूं. अगर मध्यस्थता में मेरी जरूरत पड़ी और मुझे सरकार में ऊपर के लोगों से बात करनी होगी तो मैं तैयार हूं."

विज हरियाणा में बीजेपी के पहले नेता हैं जिन्होंने बीजेपी नेता और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर दे रही पहलवानों साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया का समर्थन किया है.

ये पहलवान 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हैं. इन लोगों ने बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

अनिल विज

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जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तान क्यों लगा रहा है मोबाइल टावर?

'अमर उजाला' ने जम्मू-कश्मीर से सटे नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से मोबाइल टावर लगाने की ख़बर छापी है.

अख़बार ने लिखा है कि जम्मू-कश्मीर में तीन दशक से अधिक समय से जारी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जहां अब दम तोड़ने लगा था, वहीं इसे जिंदा करने के लिए अब पाकिस्तान नई साजिश रच रहा है.

अख़बार लिखता है कि आतंकियों की घुसपैठ कराने और ड्रोन से हथियार, ड्रग्स व पैसा भेजने के साथ अब पाकिस्तान अपने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एलओसी के पास धड़ल्ले से मोबाइल टावर लगा रहा है.

इसका प्रमाण पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर स्थित किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में देखने को मिलता है, जहां पर पिछले कुछ महीने में पाकिस्तान ने बड़े-बड़े और उच्च क्षमता के मोबाइल टावर लगाए हैं.

कश्मीर

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भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव दिगवार के सरपंच परविंदर सिंह के हवाले से ख़बर में लिखा है कि उनके गांव से पाकिस्तान की ओर से हाल ही में नियंत्रण रेखा के पास लगाए गए दो मोबाइल टावर दिखते हैं. जबकि खड़ी करमाड़ा, सलोत्री से लेकर बालाकोट और साब्जियां में भी पाकिस्तानी टावर दिख रहे हैं.

अख़बार लिखता है कि इसका प्रयोग यहां मौजूद आतंकी और उनके मददगार आपस में संपर्क साधने के साथ ही उस पार बैठे आकाओं से भी आसानी से बात कर सकेंगे.

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