बनारसी पान और बनारसी लंगड़ा आम को मिला GI टैग - प्रेस रिव्यू

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बनारसी पान के क़िस्से आपने ख़ूब सुने होंगे. अब इससे जुड़ी एक ख़बर भी पढ़िए.
बनारसी पान को अब जीआई टैग मिल गया है. बनारस का पान अकेला नहीं है बल्कि बनारसी लंगड़ा आम को भी जीआई टैग मिला है.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़, 31 मार्च को 33 चीज़ों को जीआई टैग दिया गया है. ये पहली बार है जब एक साल में इतनी सारी चीज़ों को जीआई टैग दिया गया है.
जिन 33 चीज़ों को जीआई टैग दिया गया है, उनमें 10 चीज़ें यूपी की हैं. इसके साथ यूपी के कुल जीआई टैग वाले उत्पादों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है. इनमें 20 चीज़ें को वाराणसी से ही हैं.
आज तक कुल 441 भारतीय उत्पादों और 34 विदेशी उत्पादों को जीआई टैग दिया गया है.
जीआई टैग के ज़रिए किसी क्षेत्र विशेष के उत्पाद या चीज़ को मान्यता दी जाती है. इसके ज़रिए किसी चीज़ को किसी जगह से प्रमाणित किया जाता है.

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चीन ने अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों के नाम बदले
अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच फिर तक़रार बढ़ सकती है.
द हिंदू अख़बार की ख़बर के मुताबिक़, चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 11 जगहों के नाम बदलने का एलान किया है. चीन ने इन 11 जगहों की लिस्ट और इनके ''मानकीकृत भौगौलिक नाम'' भी जारी किए हैं.
इस लिस्ट में दो रिहाइशी इलाक़े, पांच पर्वत चोटियां, दो नदियां और दो अन्य इलाक़े शामिल हैं. लिस्ट के साथ मैप भी जारी किया गया है.
चीन ने जिन जगहों के नाम बदलने या 'मान्यता' देने का फ़ैसला किया है, उसमें अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के पास की एक जगह भी शामिल है.
इस ख़बर को दूसरे अख़बारों ने भी प्रमुखता से छापा है.
अख़बारों ने ये ख़बर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स के हवाले से लिखी है.
बीते छह सालों में ये तीसरी बार है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश की जगहों के नाम बदले हैं. चीन अरुणाचल प्रदेश के इस हिस्से को ज़ंगनान प्रांत बताता है और इससे पहले 2017 में भी ज़ंगनान के छह नामों को मान्यता दी गई थी.
2021 में भी 15 जगहों के नामों की लिस्ट जारी की गई थी. तब भारत सरकार ने इन बदले हुए नामों के मामले में चीन की निंदा की थी.
भारत सरकार ने कहा था, ''नाम ईजाद करके रख देने से ज़मीन पर तथ्य नहीं बदलेंगे और अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी हमेशा रहेगा.''
चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अपना बताता है.
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन पहले भी लगातार दावे करता रहा है और भारत हर बार उसका सख़्ती से खंडन करता आया है.
चीन अरुणाचल प्रदेश को अपनी ज़मीन बताता है और उसे दक्षिण तिब्बत कहता है.
अपने दावे को मज़बूती देने के इरादे से वो अरुणाचल प्रदेश में भारत के वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के दौरे के समय अपनी आपत्ति ज़ाहिर करता रहता है.
अरुणाचल प्रदेश में कई बार भारतीय सैनिकों के चीनी सैनिकों के सामने-सामने आने की ख़बरें भी बीते सालों में आती रही हैं.

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सीबीआई से बोले पीएम मोदी- आपको कहीं रुकने की ज़रूरत नहीं है
विपक्षी पार्टियों की ओर से सीबीआई, ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों के ग़लत इस्तेमाल का आरोप मोदी सरकार पर लगता रहा है.
अब पीएम मोदी ने भी इस पर टिप्पणी की है.
द हिंदुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर छपी ख़बर के मुताबिक़, सीबीआई के 60 साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने हिस्सा लिया और इस कार्यक्रम के दौरान सीबीआई को एक सलाह भी दी.
पीएम मोदी ने सीबीआई अधिकारियों की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में कहा, ''आपको कहीं पर भी रुकने की ज़रूरत नहीं है. मैं जानता हूं आप जिनके खिलाफ एक्शन ले रहे हैं वे बेहद ताकतवर लोग हैं, बरसों तक वे सरकार और सिस्टम का हिस्सा रहे हैं.''
पीएम मोदी ने कहा, ''बरसों बरस तक ये लोग सरकार में रहे. एक इको सिस्टम बनाया. ये सिस्टम कई बार उनके काले कारनामों को कवर देने के लिए सक्रिय हो जाता है. ये एजेंसियों पर भी हमला बोलने लगते हैं. पर आपको अपने काम पर फ़ोकस करना है. कोई भी भ्रष्टाचारी बचना नहीं चाहिए.''
पीएम मोदी बोले, ''भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में राजनीति की इच्छा शक्ति में कहीं कोई कमी नहीं है. आपको कहीं भी हिचकने की ज़रूरत नहीं है.''
इससे कुछ दिन पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था, ''सीबीआई, ईडी वालों ने सारे भ्रष्टाचारियों को एक मंच पर नहीं, इनकी पार्टी में इकट्ठा कर दिया है. सीबीआई, ईडी वाले आते हैं, रेड मारते हैं. कहते हैं कि जेल जाना है या बीजेपी में जाना है.'
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कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले इलेक्टोरल बॉण्ड की बिक्री
कर्नाटक चुनाव का प्रचार शुरू हो गया है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मतदान 10 मई को होगा और नतीजे 13 मई को आएंगे.
द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, राजनीतिक पार्टियों को फ़ंडिंग देने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री भी शुरू हो गई है.
ये बॉन्ड सोमवार से बिकने शुरू हुए हैं और इन्हें 12 अप्रैल तक ख़रीदा जा सकता है.
ये बॉन्ड एसबीआई की अधिकृत शाखाओं से ही खरीदे जा सकते हैं. इस स्कीम के तहत कोई भी भारतीय नागरिक या कॉर्पोरेट कंपनियां अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टियों को फ़ंड दे सकती हैं.
भारत में चुनावी चंदे के लिए इलेक्टोरल बॉण्ड 2018 में लाए गए थे. ये बॉण्ड तयशुदा समय के लिए जारी किए जाते हैं जिन पर ब्याज नहीं मिलता.
ये बॉण्ड एक हज़ार रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक की तय रक़म की शक्ल में जारी किए जा सकते हैं. इन्हें साल में एक बार तय समय-सीमा के भीतर कुछ ख़ास सरकारी बैंकों से ख़रीदा जा सकता है.
भारत के आम नागरिकों और कंपनियों को ये इजाज़त है कि वो ये बॉण्ड ख़रीदकर सियासी पार्टियों को चंदे के रूप में दे सकते हैं. दान मिलने के 15 दिन के अंदर राजनीतिक दलों को इन्हें भुनाना होता है.
एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स के मुताबिक़, 2019 से 2021 के दौरान सात राष्ट्रीय पार्टियों की 62 फ़ीसदी से ज़्यादा आमदनी इलेक्टोरल बॉण्ड से मिले चंदे से हुई थी.
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