संसदीय समिति ने UPSC को दिया परीक्षा प्रक्रिया बदलने का ये सुझाव: प्रेस रिव्यू

यूपीएसएसी

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संसद की एक समिति ने पिछले हफ़्ते संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से कहा है कि वह प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए सवालों का जवाब परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह ख़त्म होने के बाद देकर अभ्यर्थियों के साथ एक तरह का अन्याय कर रही है.

यूपीएससी ने हाल ही में इस समिति को बताया था कि वह आईएएस, आईपीएस जैसे पदों के लिए ली जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा के प्रारंभिक चरण में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू हो जाने के बाद देती है.

द टेलीग्राफ़ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने यूपीएसएसी से कहा है कि 'ये प्रक्रिया उस परीक्षा की वैधता और निष्पक्षता को चोट पहुंचाती है जिससे भारत के लोकसेवक चुने जाते हैं.

समिति ने कहा है, "दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आयोग अभ्यर्थियों से परीक्षा का दूसरा चरण शुरू होने से पहले उत्तर कुंजी (आन्सर की) को चुनौती देने का अवसर छीन नहीं रही है?"

''ये तरीका न सिर्फ़ अभ्यर्थियों का मनोबल गिराता है बल्कि परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया की वैधता और निष्पक्षता को भी चोट पहुंचाता है."

संसदीय समिति ने ये भी कहा कि यूपीएससी उत्तर कुंजी को त्रुटिरहित बनाने की दिशा में पूरी सावधानी बरतती है, लेकिन ग़लतियों की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.

इसके बाद समिति ने यूपीएससी से कहा, "समिति इसी वजह से यूपीएससी को सुझाव देती है कि वह सिविल सेवा परीक्षा के प्रारंभिक चरण के तुरंत बाद उत्तर कुंजी जारी करे और अभ्यर्थियों को आपत्ति दर्ज कराने की इजाज़त दे."

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे

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आर्मी चीफ़ बोले, सीमा पर चीनी गतिविधियां चिंता का विषय

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने बीते सोमवार कहा है कि चीन से लगने वाली सीमा पर चीनी सेना की गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं.

जनरल पांडे ने ये बात सावित्रीबाई फूले यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्थित सेंटर फ़ॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रेटजी की ओर से आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, जनरल पांडे ने कहा है कि चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अतिक्रमण और सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन भारत के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं.

जनरल पांडे का बयान चीन को लेकर भारत की नीति में परिवर्तन को रेखांकित करता है. साल 2012 में जनरल बिक्रम सिंह ने चीन को प्रतिद्वंद्वी करार दिया था. और अब जनरल पांडे ने चीन को लेकर ये बयान दिया है.

भारत और चीन के बीच हुए सीमा से जुड़े चार समझौतों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, "चीन की ओर से इनका उल्लंघन और सीमा पर अतिक्रमण की कार्रवाइयां चिंता का विषय बनी हुई हैं.

आर्मी चीफ़ ने ये भी बताया कि चीन ने सीमा पर अपनी सैन्य क्षमताओं में काफ़ी विकास किया है जिसमें ढांचागत विकास जैसे एयरफ़ील्ड और हेलीपैड जैसी चीजें शामिल हैं.

उन्होंने कहा, "भारत ने उत्तरी सीमाओं पर शक्ति के संतुलन की दिशा में ज़रूरी कदम उठाए हैं ताकि मौका पड़ने पर उचित ढंग से जवाब दिया जा सके. हमारे पास पर्याप्त रिज़र्व सैनिक हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं.

हमारी तैयारी भी उच्ततम स्तर पर है और भारतीय सैन्य टुकड़ियां संयमित ढंग से चीनी सेना का मज़बूती के साथ सामना कर रही हैं."

दवाएं

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अप्रैल से बढ़ेंगे ज़रूरी दवाओं के दाम

आगामी एक अप्रैल से 384 आवश्यक दवाओं और 1000 से ज़्यादा फ़ॉर्मूलों के दामों में 11 फ़ीसद का उछाल आने जा रहा है.

द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, दवाओं के दामों में बढ़त की वजह थोक मूल्य सूचकांक में तेज़ उछाल आना है.

नेशनल फ़ार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने बीते 25 मार्च को भेजे संदेश में बताया है कि साल 2022 में थोक मूल्य सूचकांक में वार्षिक बदलाव 12.12 फ़ीसद था.

पिछले साल एनपीपीए ने बताया था कि थोक मूल्य सूचकांक में वार्षिक बदलाव 10.7 फ़ीसद था.

किरेण रीजीजू

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कॉलेजियम पर रिजिजू की टिप्पणियों से आहत बॉम्बे लॉयर्स एसोशिएसन

बॉम्बे लायर्स एसोसिएशन ने कॉलेजियम सिस्टम पर उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू के बयानों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है.

एसोसिएशन का कहना है कि दोनों नेताओं ने कॉलेजियम के ख़िलाफ़ टिप्पणी करके संविधान का अपमान किया है, क्योंकि कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट का हिस्सा है और शीर्ष अदालत संविधान के तहत स्थापित की गई एक संस्था है.

जनसत्ता अख़बार में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, बॉम्बे लायर्स एसोसिएशन ने पहले ये याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे ख़ारिज कर दिया.

अब एसोसिएशन ने हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पटीशन दाखिल की है.

शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि वो जगदीप धनखड़ और किरेन रिजिजू के ख़िलाफ़ एक्शन ले. दोनों अपने पदों पर काम करने के योग्य नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने विधान का अपमान किया है.

एसोसिएशन का कहना है कि 'जगदीप धनखड़ और किरेन रिजिजू ने कॉलेजियम की सरेआम आलोचना करके सुप्रीम कोर्ट की छवि को जनता की नज़रों में गिराने की कोशिश की है. और धनखड़ उप-राष्ट्रपति और रिजिजू क़ानून मंत्री के पद पर बने रहने लायक नहीं हैं.'

बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकीलों की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की छवि आसमान सरीखी है. उसे कोई भी आघात नहीं पहुंचा सकता.

हाईकोर्ट का ये भी कहना था कि वो उप-राष्ट्रपति और क़ानून मंत्री को केवल वकीलों की मांग पर पद से बर्ख़ास्त करने का आदेश जारी नहीं कर सकती.

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