राहुल गांधी के अलावा और किन नेताओं की सदस्यता जा चुकी है?

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- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आपराधिक मानहानि के चार साल पुराने एक मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कोर्ट ने दो साल की सज़ा सुनाई है. सज़ा मिलने के एक दिन बाद ही लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी है.
अधिसूचना में बताया गया है कि केरल की वायनाड लोकसभा सीट के सांसद राहुल गांधी को सज़ा सुनाए जाने के दिन यानी 23 मार्च, 2023 से अयोग्य करार दिया जाता है.
ऐसा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102(1) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किया गया है.
साल 2019 का ये मामला 'मोदी सरनेम' को लेकर राहुल गांधी की एक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है जिसमें उन्होंने नीरव मोदी, ललित मोदी और अन्य का नाम लेते हुए टिप्पणी की थी.
ऐसे दूसरे मामले भी हैं जिनमें दो साल की सज़ा मिलने पर कई सांसदों और विधायकों की सदस्यता रद्द हुई है. लेकिन, मानहानि मामले में संभवत: यह पहली बार है जब किसी सांसद को अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी है,
सदस्यता रद्द होने के बाद बहाल हुई
इनमें एक मामला ऐसा भी है जहां विधायक की सदस्यता रद्द होने के बाद बहाल की गई है. इसलिए बात सबसे पहले हरियाणा में कालका विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की.
प्रदीप चौधरी को हिमाचल प्रदेश के बद्दी की एक अदालत ने 28 जनवरी 2021 को तीन साल की सज़ा सुनाई थी. कोर्ट ने 2011 में एक युवक की मौत के बाद हिमाचल प्रदेश के बद्दी चौक पर जाम लगाने और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया था.
दो दिन बाद ही हरियाणा विधानसभा ने उनकी सदस्यता रद्द करते हुए अधिसूचना जारी कर दी थी. प्रदीप कुमार ने सज़ा के ख़िलाफ़ हिमाचल हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और कोर्ट ने 19 अप्रैल 2021 को उनकी सज़ा पर रोक लगा दी.
20 मई 2021 को हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान गुप्ता ने कांग्रेस के विधायक प्रदीप चौधरी की सदस्यता बहाल करने की घोषणा की.
बीबीसी से बात करते हुए प्रदीप चौधरी के बेटे अमन चौधरी ने कहा, "अप्रैल महीने में हाई कोर्ट ने मेरे पिता की सज़ा पर रोक लगा दी थी जिसके क़रीब एक महीने बाद हरियाणा के स्पीकर ने उनकी सदस्यता बहाल कर दी."

एनसीपी सांसद मोहम्मद फैज़ल
कालका से विधायक प्रदीप चौधरी की सदस्यता तो बहाल हो गई लेकिन लक्षद्वीप से एनसीपी सांसद मोहम्मद फैज़ल अभी भी अपनी सदस्यता बहाली के इंतजार में हैं.
लक्षद्वीप की एक अदालत ने 11 जनवरी 2023 को हत्या के प्रयास के मामले में एनसीपी सांसद मोहम्मद फैज़ल को दस साल की सज़ा सुनाई. इसके दो दिन बाद लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी.
25 जनवरी 2023 को केरल हाई कोर्ट ने दस साल की सज़ा पर रोक लगा दी. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़ क़ानून मंत्रालय लोकसभा में उनकी सदस्यता बहाल करने के लिए सिफारिश कर चुका है, लेकिन अभी तक बहाली नहीं हुई है.

अब्दुल्ला आज़म खान
अब्दुल्ला आजम खान को 13 फरवरी 2013 को मुरादाबाद में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आईपीसी की धारा 353, 341 और 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत दो साल की सज़ा और तीन हज़ार रुपये जुर्माना लगाया था.
दोषी ठहराए जाने के दो दिन बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने 15 जनवरी 2023 को अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी.
अधिसूचना में कहा गया था कि दोषी ठहराए जाने के दिन से विधानसभा में उनका स्थान रिक्त माना जाएगा. वे स्वार विधानसभा से चुनकर आए थे.

समाजवादी नेता आज़म खान
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान को हेट स्पीच से जुड़े एक मामले में एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने आईपीसी की धारा 153ए, 505(1)बी और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत तीन साल की सज़ा और तीन हज़ार रुपये जुर्माना लगाया था.
कोर्ट ने ये फ़ैसला 27 अक्टूबर, 2022 को सुनाया था. एक दिन बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर आजम ख़ान की सदस्यता रद्द कर दी थी.
वे उत्तर प्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट से चुनकर आए थे.

अनिल कुमार सहनी
दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 सितंबर, 2022 को राष्ट्रीय जनता दल के विधायक अनिल कुमार सहनी को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी ठहराया था.
कोर्ट ने उन्हें 2012 में यात्रा किए बिना जाली हवाई टिकट का इस्तेमाल कर, यात्रा भत्ता हासिल करने का प्रयास करने का दोषी ठहराया था और तीन साल की सज़ा सुनाई थी.
दोषी ठहराए जाने के क़रीब 40 दिन बाद, 14 अक्टूबर को बिहार विधानसभा ने अधिसूचना जारी कर उन्हें दोषी ठहराने जाने और सज़ा शुरू होने की तारीख से अयोग्य घोषित किया था.
वे बिहार के कुढ़नी विधानसभा सीट से चुनकर आए थे.

विक्रम सिंह सैनी
विक्रम सिंह सैनी को स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने 11 अक्टूबर 2022 को दो साल की सज़ा सुनाई थी. कोर्ट ने उन्हें साल 2013 में हुए मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के लिए दोषी ठहराया था.
4 नवंबर, 2022 को उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द की थी. उस समय सदस्यता रद्द करने में देरी का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा था.
विक्रम सिंह सैनी उत्तर प्रदेश की खतौली विधानसभा से चुनकर आए थे.

अनंत सिंह
21 जून 2022 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने आरजेडी के विधायक अनंत सिंह को आर्म्स एक्ट के मामले में दस साल की सजा सुनाई थी. उनके घर से एके-47 मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई थी.
15 जुलाई 2022 को बिहार विधानसभा ने उनकी सदस्यता रद्द की. वे बिहार में मोकामा विधानसभा से चुनकर पहुंचे थे.

कुलदीप सिंह सेंगर
उत्तर प्रदेश में बांगरमऊ से विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 20 दिसंबर 2019 को रेप के मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी.
उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने 25 फरवरी 2020 को सदस्यता रद्द की.

जे जयललिता
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में कोर्ट ने 27 सितंबर 2014 को चार साल की सज़ा सुनाई थी. जयललिता को तुरंत ही मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था.
8 नवंबर 2014 को तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर पी धनपाल ने जयललिता की सदस्यता रद्द करते हुए अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि सज़ा सुनाए जाने की तारीख से ही उनकी सदस्यता रद्द मानी जाएगी.
अधिसूचना में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के सेक्शन 8 का हवाला देते हुए कहा गया था कि सज़ा पूरी करने के बाद भी छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी.

राशिद मसूद
दिल्ली की एक अदालत ने 1 अक्टूबर 2013 को 1990-91 में अयोग्य छात्रों को फर्ज़ी तरीक़े से एमबीबीएस सीट दिलाने के मामले में रशीद मसूद को दोषी ठहराया था.
उस वक्त रशीद मसूद कांग्रेस से राज्यसभा सांसद थे. उन्हें कोर्ट ने चार साल की सज़ा सुनाई थी.
राज्यसभा सचिवालय ने 21 अक्टूबर 2013 को सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी.

लालू प्रसाद यादव
रांची में सीबीआई के विशेष सीबीआई कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2013 को राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को पांच साल की सज़ा सुनाई थी.
कोर्ट ने 30 सितंबर को लालू प्रसाद यादव, जगदीश शर्मा और अन्य अभियुक्तों को चाईबासा कोषागार से फर्ज़ी तरीक़े से साल 1994-95 के दौरान करोड़ों रुपये निकालने के मामले में दोषी ठहराया था. लालू प्रसाद उस वक्त बिहार के सारण से सांसद और राज्य के मुख्यमंत्री थे.
लोकसभा सचिवालय ने 23 अक्टूबर 2013 को अधिसूचना जारी कर लालू प्रसाद यादव की सदस्यता रद्द की थी.

जगदीश शर्मा
रांची में सीबीआई के विशेष सीबीआई कोर्ट 3 अक्टूबर 2013 को जगदीश शर्मा को पांच साल की सजा सुनाई थी.
लोकसभा सचिवालय ने 23 अक्टूबर 2013 को अधिसूचना जारी कर जगदीश शर्मा की सदस्यता रद्द की. उस वक्त वे जनता दल यूनाइटेड पार्टी के सांसद थे.

कैसे जा सकती है सदस्यता?
अनुच्छेद 102(1) और 191(1) के अनुसार अगर संसद या विधानसभा का कोई सदस्य, लाभ के किसी पद को लेता है, दिमाग़ी रूप से अस्वस्थ है, दिवालिया है या फिर वैध भारतीय नागरिक नहीं है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है.
अयोग्यता का दूसरा नियम संविधान की दसवीं अनुसूची में है. इसमें दल-बदल के आधार पर सदस्यों को अयोग्य ठहराए जाने के प्रावधान हैं.
इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किसी सांसद या विधायक की सदस्यता जा सकती है. इस क़ानून के ज़रिए आपराधिक मामलों में सज़ा पाने वाले सांसद या विधायक की सदस्यता को रद्द करने का प्रावधान है.
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (3) के तहत किसी अगर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या उससे अधिक की सज़ा मिलती है तो वह सदन के सदस्य बने रहने के योग्य नहीं रह जाएगा. इस मामले में अंतिम निर्णय सदन के स्पीकर का होता है.
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