पंजाब: अमृतपाल और साथियों ने ख़त्म किया थाने का घेराव, क्या हुआ समझौता?

अमृतपाल सिंह के समर्थक

'वारिस पंजाब दे' नामक संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह और उनके समर्थकों ने अमृतसर के अजनाला थाने के घेराव को खत्म कर दिया है.

अमृतपाल सिंह अपने सहयोगी तूफान सिंह को रिहा करने के लिए अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ थाने पहुंचे थे. इनमें कुछ के पास बंदूकें और तलवारें भी थीं.

इसके अलावा वे अपने पांच साथियों के ख़िलाफ़ दर्ज शिकायतों को भी रद्द करने की बात कर रहे थे.

पुलिस प्रशासन और उनके बीच कई घंटों तक गतिरोध चला जो आखिर में बातचीत के जरिए खत्म हो गया है.

प्रदर्शनकारी अजनाला थाने छोड़कर अमृतपाल सिंह के नेतृत्व गुरुद्वारा साहिब में चले गए हैं.

अमृतसर के पुलिस आयुक्त जसकरन सिंह ने कहा, "इन लोगों ने पुलिस को पर्याप्त सबूत दिए हैं कि गिरफ्तार व्यक्ति लवप्रीत तूफान सिंह वहां मौजूद नहीं था. उसी के आधार पर उसे छोड़ा जाएगा."

उन्होंने कहा, ''इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है.''

अमृतसर के एसएसपी ने भी मीडिया को बताया है कि तूफ़ान सिंह को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.

अमृतपाल सिंह ने भी कहा है कि पुलिस केस खत्म कर रही है.

अजनाला पहुँचे अकाली दल(अमृतसर) के नेता हरपाल सिंह ब्लेयर ने कहा, "प्रशासन ने मान लिया है कि लवप्रीत इस झगड़े में शामिल नहीं थे, इसलिए वे उसे कल रिहा कर देंगे और केस अपने आप रद्द हो जाएगा."

इससे पहले आज यानी 23 फरवरी को अमृतपाल सिंह ने अपने समर्थकों के साथ गांव जल्लूपुर खेड़ा से अजनाला थाने की ओर पदयात्रा शुरू की. उनके समर्थक कई जगहों पर बैरिकेड्स तोड़ते हुए आगे बढ़ते रहे. कई बार पर पुलिस और समर्थकों के बीच झड़प भी हुई.

अमृतपाल सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हमारे साथी के ख़िलाफ़ राजनीतिक मंशा के साथ एफ़आईआर दर्ज की गई है. इनको लगता है कि हम कुछ करने लायक़ नहीं है. अगर वो एक घंटे के भीतर केस को रद्द नहीं करते हैं तो जो कुछ यहां होगा उसके लिए प्रशासन ज़िम्मेदार होगा."

उनका दावा है कि जिस व्यक्ति की शिकायत पर उनके साथी को गिरफ़्तार किया गया है उसका दिमागी संतुलन ठीक नहीं है.

अमृतपाल सिंह ने कहा, "इन्होंने छह व्यक्तियों को नामज़द किया और 20 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ पर्चा लिखा...ये सब एक ऐसे व्यक्ति के बयान पर जो मानसिक रूप से बीमार है."

क्या था मामला?

अमृतपाल सिंह के समर्थक

आपको बता दें कि 15 फरवरी को एक शख्स की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ था. इसके बाद वरिंदर सिंह नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमृतपाल सिंह और उसके साथियों ने उनके साथ मारपीट की थी.

वरिंदर सिंह की तहरीर पर अजनाला पुलिस ने अमृतपाल सिंह और उसके कुछ साथियों के ख़िलाफ़ मारपीट और लूट का मामला दर्ज किया था.

शिकायतकर्ता वरिंदर सिंह चमकौर साहिब के गांव सलेमपुर के रहने वाले हैं. वे धर्म प्रचार करते हैं.

डीएसपी संजीव कुमार ने कहा था, 'वरिंदर सिंह ने सोशल मीडिया पर लाइव जाकर अमृतपाल के खिलाफ अपनी बात रखी, जिसके बाद दोनों में अनबन बढ़ गई.'

'वारिस पंजाब दे'

दीप सिद्धु

इमेज स्रोत, DEEP SIDHU

'वारिस पंजाब दे' संगठन की स्थापना दीप सिद्धू ने की थी.

अभिनेता और किसान कार्यकर्ता संदीप सिंह उर्फ ​​दीप सिद्धू की 15 फरवरी, 2022 को हरियाणा के सोनीपत में दिल्ली से पंजाब जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी

किसान आंदोलन के दौरान 26 जनवरी 2021 को दिल्ली हिंसा में दीप सिद्धू मुख्य अभियुक्त थे.

26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर शांतिपूर्ण ट्रैक्टर परेड के दावों के विपरीत, प्रदर्शनकारियों ने लाल किले में जो कुछ किया था, उसकी तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं.

दिल्ली पुलिस ने कुछ दिनों बाद उन्हें करनाल से गिरफ्तार कर लिया था. दीप सिद्धू की मृत्यु के बाद अमृतपाल सिंह ने इस संगठन की कमान संभाल ली थी.

22 फरवरी को अमृतपाल सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि अगर तूफान सिंह को रिहा नहीं किया गया तो वह 23 फरवरी को अजनाला थाने पहुंचकर उसे रिहा करवा लेंगे.

खालिस्तान की मांग और जानकारों की राय

जगतार सिंह

अमृतपाल सिंह ख़ालिस्तान के समर्थक हैं और इसपर आए दिन बयान देते रहते हैं. हाल ही में वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में दिए गए बयान के बाद ख़बरों में आए थे.

उन्होंने कहा था, "वे कहते हैं कि ख़ालिस्तान की लहर को हम कुचल देंगे. ख़ालिस्तान क्या है? ख़ालसा राज. सिखों की एक इच्छा है कि वे अपना राज चाहते हैं. अगर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का गृह मंत्री ये कहे कि हम विशेष समुदाय को दबाएंगे."

"मेरा सवाल है कि आजतक अमित शाह ने हिंदू राष्ट्र के बारे में ऐसा बयान क्यों नहीं दिया है. ये असमानता क्यों है? मुझे मतांतर से दिक्कत नहीं है, आलोचना से कोई प्रॉब्लम नहीं लेकिन मेरे आयडिया का अपराधीकरण कर देना...इस बात पर सबको दिक्कत होनी चाहिए."

उन्होंने कहा था कि वे हिंदू राष्ट्र के ख़िलाफ़ नहीं हैं और ख़ालिस्तान हासिल करना सिखों के लिए गुनाह नहीं सम्मान की बात है.

वरिष्ठ पंजाबी पत्रकार जगतार सिंह, अमृतपाल सिंह के बयानों की विवेचना कुछ यूं करते हैं, "1978 में दल ख़ालसा ने भी ख़ालिस्तान की मांग की थी. उससे पहले जगजती सिंह चौहान ने भी यही मांग की थी. ये कोई नई बात नहीं है. ये नारा लगातार चलता आ रहा है. इससे बढ़कर इसमें कुछ नहीं है, फ़िलहाल."

पंजाब के मौजूदा माहौल पर जगतार सिंह कहते हैं, "भारत के बाहर मौजूद सिख खालिस्तान की बात कर रहे हैं लेकिन पंजाब के भीतर नहीं कर रहे. लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई चिंता वाली बात है."

"चिंता की बात है कि इस बार अलगाववाद का एक नया रूप देखने को मिल रहा है. एजेंसियां इसे गैंगस्टर आतंकवाद कह रही हैं. ये एक नया रूप है."

कॉपी - पवन सिंह अतुल

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