बच्चे के जन्म के दिन ही परीक्षा देने क्यों पहुँच गईं रुक्मिणी?

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- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पटना से
बिहार में बांका ज़िले से एक महिला के साहस और विश्वास की कहानी सामने आई है. बिहार में आज कल मैट्रिक की परीक्षाएं चल रही हैं और इसकी एक परीक्षार्थी 22 वर्षीय रुक्मिणी हैं.
रुक्मिणी ने इस परीक्षा की तैयारी गर्भवती रहने के दौरान की और मंगलवार, 14 फ़रवरी को वे गणित की परीक्षा में शामिल हुई थीं.
इसके बाद उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. परिवार के लोग उन्हें नज़दीक के सरकारी अस्पताल ले गए, जहां बुधवार की सुबह (15 फ़रवरी) क़रीब छह बजे उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया.
परिवार वाले अपने इस नए सदस्य के आगमन की ख़ुशियां ही बटोर रहे थे कि रुक्मिणी ने एक फ़ैसला लिया जो ख़बरों में छा गया.
बच्चे के जन्म के कुछ घंटे बाद ही मैट्रिक की परीक्षा का दूसरा पेपर होने वाला था और रुक्मिणी ने ये फ़ैसला लिया कि वो उस परीक्षा में शामिल होंगी.
इस पर घर वालों ने पूछा कि ऐसी हालत में वो परीक्षा कैसे दे सकती हैं? लेकिन रुक्मिणी ज़िद पर अड़ी रहीं.
तब डॉक्टरों से इस बारे में विचार विमर्श किया गया.
डॉक्टरों ने क्या बताया?

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रुक्मिणी के आग्रह और साहस को देख कर डॉक्टरों ने उन्हें परीक्षा में शामिल होने की इजाज़त दे दी.
स्थानीय अस्पताल के मुख्य चिकित्सक भोलानाथ मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहते हैं, "सबने रुक्मिणी को समझाने की कोशिश की लेकिन उनकी ज़िद के आगे किसी की नहीं चली."
फिर उन्होंने बताया, "परीक्षा को लेकर उनके उत्साह को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तय किया कि रुक्मिणी एंबुलेंस से परीक्षा केंद्र तक जाएंगी और परीक्षा देकर वापस लौटेंगी. साथ ही अस्पताल प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो."

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रुक्मिणी बांका ज़िले के कटोरिया प्रखंड के एक स्कूल की नियमित छात्रा रही हैं. लेकिन जब उनकी शादी इसी प्रखंड के पैलवा गांव में हुई, जो उनके मायके से क़रीब 25 किलोमीटर दूर है, तब उनकी पढ़ाई कुछ समय के लिए छूट गई.
बीबीसी से बातचीत में रुक्मिणी के ससुर सुरेंद्र दास कहते हैं, "वो पढ़ने में ठीक रही हैं लेकिन कुछ समय के लिए उनकी पढ़ाई छूट गई थी."

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वे कहते हैं, "रुक्मिणी का मन था कि वो मैट्रिक की परीक्षा दें तो हमने भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. डिलीवरी के बाद उन्होंने दो परीक्षाएं अस्पताल से ही जाकर दीं. अब वे घर आ गई हैं. घर से भी हम उन्हें परीक्षा दिलाने ले गए हैं. पूरा परिवार बहुत खुश है."
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