मोदी सरकार बिलावल भुट्टो के बाद पाक पीएम शहबाज़ शरीफ़ को भी क्यों भेज रही है न्योता - प्रेस रिव्यू

शहबाज़ शरीफ़

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भारत सरकार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को आगामी जून में होने जा रही एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आने का न्योता भेजने जा रही है.

अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, भारत सरकार ने इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी को भारत आने का न्योता भेजा है.

इन दोनों बैठकों की तारीख़ों और स्थानों पर बीती 17 जनवरी को वाराणसी और उससे पहले दिल्ली में हुईं एससीओ समन्वयकों की बैठकों में चर्चा हुई थी.

पाकिस्तान के शंघाई सहयोग संगठन के समन्वयक ने वाराणसी वाली बैठक में वर्चुअल लिंक के माध्यम से हिस्सा लिया.

हालांकि, संघाई सहयोग संगठन को लेकर होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए भेजे जाने वाले निमंत्रण काफ़ी आम माने जाते हैं क्योंकि इस साल भारत इस सम्मेलन को आयोजित कर रहा है.

लेकिन पाकिस्तानी नेताओं को निमंत्रण दिया जाना ख़ास माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तानी नेतृत्व लगभग एक दशक बाद भारत पहुंचने जा रहा है.

इसी साल चीनी और रूसी नेता भी भारत आएंगे क्योंकि उन्हें जी-20 देशों की इवेंट्स में हिस्सा लेना है.

मुलायम सिंह यादव के साथ पीएम नरेंद्र मोदी

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सरकार ने मुलायम सिंह समेत किन राजनेताओं को दिया पद्म अवॉर्ड

केंद्र सरकार ने बीते बुधवार एक के बाद एक कई राजनेताओं को पद्म अवॉर्ड से सम्मानित किया है जिनमें कर्नाटक के नेता एसएम कृष्णा से लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख रहे मुलायम सिंह यादव शामिल हैं.

अंग्रेजी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इन अवॉर्ड्स की घोषणा करते हुए राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखा गया है.

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में इस अवॉर्ड के लिए मुलायम सिंह को चुना है जिन्हें ओबीसी राजनीति को नयी दशा और दिशा देने का श्रेय दिया जाता है. ये वो वर्ग है जिस तक पहुंच बनाने के लिए बीजेपी भरसक प्रयास कर रही है.

इसी तरह कर्नाटक में प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय के नेता एसएम कृष्णा को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है. साथ ही त्रिपुरा में आदिवासी नेता एनसी देबबर्मा को पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है.

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए ओबीसी समुदाय जहां आगामी आम चुनाव के लिहाज़ से काफ़ी अहम है. वहीं, कर्नाटक और त्रिपुरा में आने वाले कुछ समय में ही चुनाव होने जा रहे हैं.

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, पीएम मोदी

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भारत-मिस्र के रिश्तों पर क्या बोले मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी

भारतीय गणतंत्र दिवस के मौके पर चीफ़ गेस्ट के रूप में दिल्ली आने वाले मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी ने दोनों देशों के बीच रिश्तों पर हिंदुस्तान टाइम्स के साथ विशेष बातचीत की है.

अल-सीसी ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि 'उनका देश भारत के साथ गहरे संबंध चाहता है ताकि अरब और अफ़्रीकी देशों को फायदा पहुंचाने के लिए एक सहयोग का वातावरण तैयार किया जा सके.'

अल-सीसी ने अपने इसी बयान में दक्षिण-दक्षिण कोऑपरेशन फ़्रेमवर्क की भी बात की. इससे आशय वैश्विक दक्षिण में पड़ने वाले देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी सहयोग के लिए माहौल तैयार करने से है.

उन्होंने कहा, 'मिस्र चाहता है कि दोनों देशों के बीच क़रीबी संबंधों के आधार पर दक्षिण-दक्षिण फ़्रेमवर्क के तहत सहयोग की व्यवस्था बननी चाहिए क्योंकि जहां भारत के पास तकनीकी और आर्थिक क्षमताएं हैं, वहीं मिस्र एक बेहद ख़ास और रणनीतिक स्थिति में है जो अफ़्रीका के लिए भारत के गेटवे के रूप में काम कर सकता है.'

अल सीसी ने ये भी कहा कि 'इस सबके साथ मिस्र भारतीय निवेश का स्वागत करता है और भारतीय उत्पादों को अफ़्रीकी देशों में निर्यात किया जा सकता है जिनके साथ मिस्र के मुक्त व्यापार समझौते हैं.'

अल-सीसी के इस दौरे पर भारत और मिस्र के बीच पांच क्षेत्रों में आपसी सहयोग समझौते किए गए हैं.

जनसत्ता अख़बार में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, इन समझौतों को संस्कृति, आईटी, सायबर सुरक्षा, और युवा मामलों के साथ-साथ प्रसारण के क्षेत्र में किया गया है.

इनमें प्रसार भारती और मिस्र के राष्ट्रीय मीडिया प्राधिकरण के बीच सामग्री के आदान-प्रदान को लेकर किया गया समझौता शामिल है.

गेहूं

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गेहूं और आटे की कीमतें दस सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर

गेहूं और आटे की क़ीमतों में भारी उछाल आने के बाद केंद्र सरकार ने अपने बफ़र स्टॉक से 30 लाख टन गेहूं को खुले बाज़ार में बेचने की मंजूरी दे दी है.

अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, भारत में गेहूं और आटे के दाम पिछले दस सालों में अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं.

साल 2016 में आटे का दाम 25.1 प्रति किलोग्राम हुआ करता था जो अब 37.8 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. वहीं, गेहूं के दाम 23.7 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 33.3 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है.

दामों में आए इस उछाल को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एफ़सीआई के स्टॉक से गेहूं की बिक्री शुरू करने का फ़ैसला किया है.

यह आटा मिलों और व्यापारियों जैसे थोक खरीदारों को 2,350 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम मूल्य पर दिया जाएगा और खरीदार ट्रांसपोर्ट में होने वाले ख़र्च को वहन करेंगे.

आंकड़ों से पता चलता है कि एफ़सीआई का वर्तमान गेहूं स्टॉक लगभग 158 लाख टन है, जबकि बफर मानदंड 138 लाख टन है.

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