जोशीमठ में अचानक क्या हुआ है कि घर छोड़कर भाग रहे हैं लोग

जोशीमठ छोड़कर जाते लोग

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उत्तराखंड के जोशीमठ में पिछले कुछ समय से लोग अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहे हैं. जो लोग ऐसा नहीं कर पा रहे हैं, वो अपने घरों के बाहर खुले आसमान तले सोने को मजबूर हैं.

स्थानीय लोगों में राज्य सरकार के प्रति गुस्सा इतना ज़्यादा है कि गुरुवार सुबह आम लोगों ने बद्रीनाथ राजमार्ग जाम कर दिया और शाम को जलती मशालों के साथ जुलूस निकालते नज़र आए.

लेकिन सवाल ये उठता है कि जोशीमठ में एकाएक क्या हुआ है जिसके चलते प्रशासन को लोगों को उनके घरों से कहीं और शिफ़्ट करना पड़ रहा है.

यही नहीं, राज्य सरकार को आपदा प्रबंधन बलों से किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने को कहना पड़ा है.

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कई परिवारों को हटाया गया

अंग्रेजी अख़बार द हिंदू ने इस मुद्दे पर प्रकाशित ख़बर में बताया है कि अब तक कुल 38 परिवारों को उनके घरों से रिहैब सेंटर भेज दिया गया है.

जोशीमठ के अतिरिक्त ज़िलाधिकारी अभिषेक त्रिपाठी ने द हिंदू को बताया है कि 'गुरुवार को चार परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. इसके साथ ही सभी तरह की कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को भी बंद कर दिया गया है.'

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अभिषेक त्रिपाठी ने बताया है कि 'अब तक प्रशासन की ओर से 38 परिवारों को उनके क्षतिग्रस्त घरों से निकालकर रिहैब सेंटर ले जाया गया है.'

ज़िला प्रशासन ने एनटीपीसी और हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी से कहा है कि वह दो हज़ार प्री-फ़ैब्रिकेटेड इमारतें बनाए जहां जोशीमठ के परिवारों को रखा जा सके.

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प्रशासन ने क्या क़दम उठाया है

प्रशासन से लेकर सरकार की ओर से ये क़दम इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जोशीमठ शहर के ज़मीन में समाने का ख़तरा बढ़ता जा रहा है.

जोशीमठ शहर के कई घरों की दीवारों और इमारतों में दरारें लगातार मोटी होती जा रही हैं और ऐसा पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहा है.

लेकिन अब जो कुछ हुआ है, उसके बाद यहां रहने वालों की चिंताएं बढ़ गयी हैं क्योंकि पिछले कुछ समय में यहां की सड़कों में भी दरारें दिखने लगी हैं.

जोशीमठ नगर निगम के अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार ने गुरुवार को बताया कि 'स्थिति अब चिंताजनक हो गयी है क्योंकि ये दरारें हर घंटे बड़ी होती जा रही हैं.'

बिगड़ते हालात को ध्यान में रखते हुए जोशीमठ शहर में एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रोपावर प्लांट पर काम रोक दिया गया है. इसके साथ ही हेलांग बाइपास रोड के काम को भी रोक दिया गया है. साथ ही एशिया के सबसे लंबे रोपवे 'ऑली रोपवे' के परिचालन को भी रोक दिया गया है.

जोशीमठ में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि सरकार ने एनटीपीसी के ताबड़-तोड़ कंस्ट्रक्शन को लेकर उनकी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया.

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प्रदर्शन कर रहे लोगों के सवाल

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने सवाल किया है, 'सरकार ने अब कंस्ट्रक्शन का काम क्यों बंद कर दिया है जब हम ज़मीन में समाने की कगार पर हैं. लेकिन उन्होंने हम पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया.'

अतुल सती ने डाउन टू अर्थ के साथ बात करते हुए दावा किया है कि तपोवन विष्णुगढ़ परियोजना के तहत बनायी गयी सुरंग ने ज़मीन को खोखला कर दिया है.

स्थानीय लोगों की चिंताएं तब और बढ़ गयीं जब उन्होंने जोशीमठ के मारवाड़ी वॉर्ड और वॉर्ड 2 की ज़मीन से कीचड़ बाहर आते देखा गया. लोगों को शक़ है कि ये कीचड़ पहाड़ पर बनाई जा रही सुरंग से रिसता हुआ आ रहा है.

इस क्षेत्र का अध्ययन करने वाले भूगर्भशास्त्री एसपी सती बताते हैं कि मारवाड़ी में जो पानी बाहर निकल रहा है, उसका मिलान तपोवन में धौलगंगा के पानी से होना चाहिए. ये वो जगह है जहां एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगढ़ की सुरंग परियोजना शुरू होती है.

तपोवन जोशीमठ से 15 किलोमीटर दूर है और सुरंग जोशीमठ से पांच किलोमीटर दूर सेलंग में शुरू होती है.

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पहले भी दरकती रही है ज़मीन

स्थानीय लोगों के अनुरोध पर एसपी सती ने अहमदाबाद स्थित फ़िज़िकल रिसर्च लेबोरेटरी से जुड़े नवीन जुयाल और शुभ्रा शर्मा के साथ मिलकर इस क्षेत्र में दरकती ज़मीन का अध्ययन किया है.

इन वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जोशीमठ के आसपास के ढलान काफ़ी अस्थिर हो गए हैं.

सती बताते हैं कि साल 2013 में चिंताएं जताई गयी थीं कि हाइड्रोपावर परियोजना से जुड़ी सुरंगे उत्तराखंड में तबाही ला सकती हैं. उस साल ये प्रोजेक्ट रोक दिए गए थे.

जोशीमठ नगरपालिका ने बीते दिसंबर में कराए अपने सर्वे में पाया है कि इस तरह की आपदा से 2882 लोग प्रभावित हो सकते हैं. नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार ने बताया कि अब तक 550 मकान असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें से 150 मकान ऐसे हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं.

यही नहीं, साल 2021 की सात फ़रवरी को चमोली में आई आपदा के बाद से पूरी नीति वैली में ज़मीन दरकने की ख़बरें आ रही हैं. साल 2021 में जून से अक्तूबर महीने में भारी बारिश के बाद चिपको आंदोलन की नायिका रही गौरा देवी के रैणीं गांव में भी ज़मीन दरकने की ख़बरें आई हैं.

इससे पहले साल 1970 में भी जोशीमठ में ज़मीन धंसने की घटनाएं सामने आई थीं.

इस प्राकृतिक आपदा के कारणों की जांच के लिए गढ़वाल कमिश्रर महेश मिश्रा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी. इस समिति ने साल 1978 में आई अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जोशीमठ, नीति और माना घाटी में बड़ी निर्माण परियोजनाओं को नहीं चलाना चाहिए क्योंकि ये क्षेत्र मोरेंस पर टिके हैं.

मोरेंस से आशय उन क्षेत्रों से है जो ग्लेशियर पिघल जाने के बाद पीछे छूट जाते हैं.

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चीफ़ जस्टिस ने कुणाल कामरा केस से ख़ुद को अलग किया

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने खुद को स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ कोर्ट की अवमानना से जुड़े एक मामले से अलग कर लिया है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट में कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ चार मामले लंबित हैं. ये चारों ही मामले सुप्रीम कोर्ट और उसके जजों के ख़िलाफ़ कुणाल कामरा द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर हैं.

कुणाल कामरा के ख़िलाफ़ एक मामला उनके उस ट्वीट को लेकर है जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ को लेकर टिप्पणी की थी. कुणाल कामरा ने यह ट्वीट नवंबर 2020 में कोर्ट की ओर से रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी को ज़मानत दिए जाने के बाद किया था.

जस्टिस चंद्रचूड़ ही उस बेंच को हेड कर रहे थे जिसने अर्नब गोस्वामी को ज़मानत दी थी, इसी वजह से उन्होंने ख़ुद को सुनवाई से दूर कर लिया.

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छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने मारे छापे, मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग की टीम ने बड़ी छापेमारी की है. इससे पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है.

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, आयकर विभाग की टीम राजधानी रायपुर समेत कई ज़िलों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है.

फ़िलहाल, विभाग की कार्रवाई जारी है. रायपुर के शैलेंद्र नगर, रामसागर पारा, देवेंद्र नगर और चौबे कॉलोनी रायपुर में छापेमारी की गई है.

आयकर विभाग के आयुक्त की इस रेड में बिल्डर, ट्रांसपोर्टर और बड़े आपूर्तिदाता भी शामिल हैं. सभी के दस्तावेज़ों को खंगाला जा रहा है.

अब तक मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर के हीरापुर में आरके रोडवेज़, बंसल ग्रुप (जगदीप बंसल), बिप्लव बंसल इंफ़्रा प्राइवेट लिमिटेड, स्वास्तिक ग्रुप (नरेंद्र अग्रवाल), सहेली ज्वेलर्स, भिलाई और आरके रोडवेज़ (आशीष अग्रवाल) राकेश अग्रवाल के घर में छापेमारी की गयी है.

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