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अमित लोढ़ाः नेटफ्लिक्स से चर्चित आईपीएस पर क्यों दर्ज हुआ भ्रष्टाचार का केस
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना (बिहार) से
बिहार के चर्चित आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में एफ़आईआर दर्ज की गई है. यह एफ़आईआर प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट और आईपीसी की धारा 120(B) और 168 के तहत दर्ज हुई है.
इसमें आपराधिक षडयंत्र रचने और सरकारी नौकरी में रहते हुए ग़ैरक़ानूनी तरीके से व्यवसाय करने का आरोप लगाया गया है.
अमित लोढ़ा फ़िलहाल बिहार पुलिस में इंसपेक्टर जनरल (आईजी) के पद पर तैनात हैं.
दरअसल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आई एक नई वेब सिरीज़ 'खाकीः द बिहार चैप्टर' इन दिनों सुर्ख़ियों में है. यह वेज सिरीज़ अमित लोढ़ा की किताब 'बिहार डायरीज़' पर आधारित है.
बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इससे जुड़ी शिकायत दर्ज की है. एनडीटीवी की एक ख़बर के मुताबिक़ अमित लोढ़ा ने आईपीएस अधिकारी रहते हुए 'फ़्राइडे स्टोरीटेलर्स' नाम के प्रोडक्शन हाउस के साथ समझौता किया था.
उनका यह समझौता काग़जों पर भले ही एक रुपये का था लेकिन पुलिस का दावा है कि उनकी पत्नी के अकाउंट से क़रीब 49 लाख़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ था.
इस रिपोर्ट के लिए बीबीसी ने उनका पक्ष जानने की कोशिश की. लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया.
क्या है अमित लोढ़ा पर आरोप
ख़बरों के मुताबिक़ एफ़आईआर में कहा गया है कि अमित लोढ़ा न तो एक जाने माने लेखक है और न ही व्यवसायिक मक़सद से उनको कोई किताब लिखने का अधिकार है.
हिन्दुस्तान टाइम्स अख़बार के मुताबिक़ एफ़आईआर में कहा गया है कि अमित लोढ़ा ने इन सारे तथ्यों की परवाह नहीं की और ग़ैरक़ानूनी तरीके से पैसे कमाए.
इस ख़बर के मुताबिक़ अमित लोढ़ा ने ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने के लिए अपनी किताब 'बिहार डायरीज़' का इस्तेमाल किया, जिसपर 'खाकी द बिहार चैप्टर' वेब सिरीज़ बनाई गई है.
अमित लोढ़ा का क्या है कहना
ख़बरों के मुताबिक़ भ्रष्टाचार के आरोप और एफ़आईआर के बाद अमित लोढ़ा ने केवल इतना कहा कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है.
वहीं अमित लोढ़ा ने छह दिसंबर को अपने एक ट्वीट में लिखा है, "कभी कभी ज़िदगी आपको सबसे मुश्किल चुनौतियों के बीच खड़ी कर देती है, ख़ासतौर पर जब आप सही होते हैं. ऐसे समय में ही आपके व्यक्तित्व की ताक़त सामने आती है. इसपर विजय पाने के लिए आप सबकी दुआओं और समर्थन की ज़रूरत है."
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी अमित लोढ़ा ने अपराध, राजनीति और अपने अनुभवों पर 'बिहार डायरीज़' लिखी है.
नेटफ़्लिक्स की इस वेब सिरीज़ 'खाकी द बिहार चैप्टर' को नीरज पांडे ने लिखा है. इसका निर्देशन भव धुलिया ने किया है.
यह वेब सिरीज़ क़रीब दो दशक पहले बिहार के शेखपुरा, नवादा और आसपास के इलाक़ों में चल रहे गैंगवार पर आधारित है. उस दौरान इस गैंगवार में दर्जनों लोगों की हत्या की हुई थी.
इस गैंगवार में पूर्व सांसद, सरकारी अधिकारी और आम लोग भी मारे गए थे. अमित लोढ़ा उस दौरान शेखपुरा के एसपी रहे थे. कहा जाता है कि इस गैंगवार को ख़त्म करने में अमित लोढ़ा की बड़ी भूमिका थी.
- अमित लोढ़ा 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं.
- उन्होंने दो किताबें : 'खाकी- द बिहार चैप्टर', 'लाइफ़ इन द यूनिफ़ॉर्म' लिखी है.
- ओटीटी पर आई एक नई वेब सिरीज़ 'खाकीः द बिहार चैप्टर' उनकी किताब पर आधारित है.
- वेब सिरीज़ में अमित लोढ़ा के अलावा अशोक महतो गैंग की चर्चा है
- बिहार के शेखपुरा में महतो गैंग वर्ष 2000 के आसपास से सक्रिय था.
- अमित लोढ़ा के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले में EOW ने एफ़आईआर दर्ज़ की है
कौन हैं अमित लोढ़ा
अमित लोढ़ा 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्होंने साल 2021 में लाइफ़ इन द यूनिफ़ॉर्म और साल 2018 में बिहार डायरीज़ नाम से किताब भी लिखी है.
पुलिस सेवा में आने से पहले अमित लोढ़ा ने आईआईटी दिल्ली के इंजिनियरिंग भी की है. अमित लोढ़ा का बचपन राजस्थान के जयपुर में गुज़रा है. उन्होंने जयपुर के सेंट ज़ेवियर्स स्कूल से पढ़ाई की थी.
अमित लोढ़ा ने एक इंटर्व्यू में बताया था कि वो सातवीं क्लास में मैथ्स में फ़ेल भी हो गए थे. लेकिन फिर मैथ्स ज़्यादा मेहनत की और बाद में आए मार्क्स के दम पर ही उनका आईआईटी में सेलेक्शन हुआ था.
अमित लोढ़ा आईआईटी में भी एक बार मैथ्स में फ़ेल हो हुए थे. यहां वो डिप्रेशन के शिकार भी हो गए थे. जाने माने लेखक चेतन भगत आईआईटी में उनके मित्र थे.
अमित के पिताजी पेशे से डॉक्टर रहे हैं. उनके नाना के परिवार में कई लोग यूपीएससी की परीक्षा पास कर ब्यूरोक्रेट बने थे. अमित लोढ़ा के मुताबिक़ इसी वजह से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की थी.
सबसे ख़ास बात यह है कि मैथ्स में आए अंकों की वजह से उनको यूपीएससी में अच्छी रैंकिंग मिली थी और उन्होंने पुलिस सेवा में जाना चुना था. अमित लोढ़ा को बिहार कैडर मिला था.
अमित लोढ़ा के पुलिस करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर था शेखपुरा के एसपी के तौर पर उनकी पोस्टिंग. अमित इसके बारे में कई बार बात कर चुके हैं कि उस दौर में बिहार एक तरह की जंग हो रही थी.
शेखपुरा और नवादा के इलाक़े में अशोक महतो गैंग का दबदबा लगातार बढ़ रहा था. भूमिहारों और पिछड़ी जातियों के बीच चल रहे इस गैंगवार में कई लोगों की हत्या हुई थी. इसी दौर में पूर्व सांसद राजो सिंह की भी हत्या हुई थी, जिसका आरोप अशोक महतो पर लगा था.
अमित लोढ़ा ने 13 दिसंबर 2006 को अशोक महतो को गिरफ़्तार किया था. उसके बाद ही शेखपुरा में शांति लौट पाई थी. इस गिरफ़्तारी के बाद अमित लोढ़ा पूरे देश में मशहूर हो गए थे.
दरअसल अशोक महतो को उस दौर में शेखपुरा का गब्बर सिंह कहा जाता था. अशोक महतो को पकड़ने के लिए बिहार पुलिस को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.
अमित लोढ़ा को पुलिस सेवा में बेहतरीन काम के लिए प्रेसिटेंट्स पुलिस मेडल भी मिला है.
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