प्रणय रॉय और राधिका रॉय का होल्डिंग कंपनी से इस्तीफ़ा, एनडीटीवी में चल क्या रहा है

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- प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर पद से इस्तीफ़ा दिया.
- सुदीप्ता भट्टाचार्य, संजय पुगलिया और सेंथिल चेंगलवारायण प्रमोटर ग्रुप के नए डायरेक्टर नियुक्त किए गए.
- ये बदलाव प्रमोटर ग्रुपआरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड में हुए हैं, प्रणय रॉय अभी एनडीटीवी के एक्ज़ीक्यूटिव को-चेयरपर्सन हैं.
- अडानी ग्रुप की एनडीटीवी पर मालिकाना हक की तैयारी, एनडीटीवी में 26% अतिरिक्त हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र लाई है.

प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर्स के पद से इस्तीफ़ा दे दिया. ये कंपनी एनडीटीवी की प्रमोटर ग्रुप व्हेकिल है.
एनडीटीवी ने मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को लिखी गई चिट्ठी में बताया" एनडीटीवी के प्रमोटर ग्रुप आरआरपीआर (राधिका रॉय प्रणय रॉय) होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड ने सूचित किया है कि आज 29 नबंबर को बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की बैठक में तय किया गया है कि सुदीप्ता भट्टाचार्य, संजय पुगलिया और सेंथिल चेंगलवारायण तत्काल प्रभाव से आरआरपीआरएच के बोर्ड में नए निदेशक होंगे और डॉ. प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने आरआरपीआरएच के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफ़ा दे दिया है."
ये जानना अहम है कि ये सारे बदलाव एनडीटीवी के प्रमोटर ग्रुप कंपनी में हुए हैं, हालांकि एनडीटीवी के मुताबिक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय एनडीटीवी के एक्ज़ीक्यूटिव को-चेयरपर्सन हैं.
ये फ़ैसला तब लिया गया है जब इससे ठीक एक दिन पहले आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड ने अपने इक्विटी शेयर की जानकारी दी थी. जिसमें से 99.5 फ़ीसदी इक्विटी शेयर विश्व प्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के पास हैं. ये वो कंपनी है जिसका अधिग्रहण अडानी ग्रुप की मीडिया कंपनी एएमजीमीडिया नेटवर्क्स ने किया है. इसके साथ ही अडानी ग्रुप के पास अब एनडीटीवी की 29.18 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.
अडानी ग्रुप 26 फ़ीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी के लिए ओपन ऑफ़र लेकर आया है, इसके तहत कंपनी ने एनडीटीवी के एक करोड़ 67 लाख शेयर ख़रीदने की पहल की है. ओपन ऑफ़र की आख़िरी तारीख़ 5 दिसंबर है.

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इस ओपन ऑफर के लिए अडानी ग्रुप ने 294 रुपये प्रति शेयर की कीमत लगाई है.
क्या है अडानी की योजना?
पोर्ट, हवाई अड्डे, इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कई क्षेत्रों में कारोबार कर रहे और एशिया के सबसे अमीर शख्स गौतम अडानी ने पिछले दिनों मीडिया में बड़ा और चर्चित अधिग्रहण कर चौंकाया था. कुछ लोगों ने इसे एनडीटीवी प्रबंधन की इच्छा के ख़िलाफ़ कंपनी पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश यानी होस्टाइल टेकओवर बताया था.
हालाँकि गौतम अडानी ने हाल ही में फ़ाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में एनडीटीवी की डील को लेकर कहा था, "भारत में फ़ाइनेंशियल टाइम्स के मुक़ाबले का कोई भी चैनल नहीं है. क्यों ना एक मीडिया हाउस को समर्थन देकर स्वतंत्र बना सकते हैं, जिसका ग्लोबल फ़ुटफ्रिंट हो. स्वतंत्र का मतलब है कि अगर सरकार ने कुछ ग़लत किया है तो उसे ग़लत कहा जाए, लेकिन इसकी भी हिम्मत रखनी चाहिए कि जब सरकार कुछ अच्छा कर रही है तो उसे भी खुलकर कहा जाए."
अडानी ने कहा कि उनके समूह के लिए एक ग्लोबल मीडिया ग्रुप तैयार करने की कीमत 'बेहद कम' है, और उन्होंने एनडीटीवी के मुखिया प्रणय रॉय को पद पर बने रहने का ऑफ़र दिया था.
अडानी की मीडिया कंपनी ने इसी साल बिज़नेस न्यूज़ प्लेटफॉर्म ब्लूमबर्ग क्विंट को भी ख़रीद लिया था.

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ये सब अगस्त में कैसे शुरू हुआ
इस साल अगस्त में अडानी ग्रुप ने मीडिया कंपनी एनडीटीवी में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीदा.
अडानी ने जिस तरह से एक अनजान सी कंपनी के ज़रिये एनडीटीवी में हिस्सा ख़रीदा उसे जानकारों ने 'होस्टाइल टेकओवर' यानी प्रबंधन की इच्छा के विरुद्ध कंपनी पर क़ब्ज़े की कोशिश माना था.
दरअसल, अडानी ग्रुप ने एक्सचेंज को बताया था कि उसने विश्वप्रधान कॉमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड यानी वीसीपीएल को ख़रीद लिया है. अडानी ने 100 फ़ीसदी हिस्सा तक़रीबन 114 करोड़ रुपये में ख़रीदा.
मीडिया और कंसल्टेंसी कारोबार में दख़ल रखने वाली वीसीपीएल का लेखा-जोखा खंगालने पर पता चला कि वीपीसीएल के पास एनडीटीवी की एक प्रमोटर ग्रुप कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के 29.18 फ़ीसदी इक्विटी शेयर गिरवी थे.

दरअसल, प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय एनडीटीवी के संस्थापक और प्रोमोटर्स हैं. साल 2008-09 में उन्होंने आरआरपीआर (राधिका रॉय प्रणॉय रॉय) होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिये वीसीपीएल से क़र्ज़ लिया था.
इस क़र्ज़ के बदले वीसीपीएल को 29.18 फ़ीसदी गिरवी रखे गए थे. साथ ही ये विकल्प भी दिया गया था कि क़र्ज़ न चुका पाने की स्थिति में वे इन वाउचर्स का 99.5 फ़ीसदी हिस्सा इक्विटी में बदल सकते हैं.
ये क़र्ज़ 10 साल के लिए लिया गया था और इसकी अवधि 2019 में ख़त्म हो गई थी. लेकिन आरआरपीआर ने लिया गया क़र्ज़ नहीं चुकाया.
क्या होता है ओपन ऑफ़र?
इस साल नवंबर में अडाणी समूह को सेबी की ओर से एनडीटीवी के 26 फ़ीसदी स्टेक खरीदने के लिए ओपेन ऑफ़र लाने की मंजूरी मिली. इसके बाद 22 नवंबर को अडानी ग्रुप ओपन ऑफ़र लेकर आया जो 5 दिसंबर तक चलेगा.
शेयर बाज़ार की नियामक संस्था सेबी के नियमों के मुताबिक़, देश में लिस्टेड किसी भी कंपनी जिसके पास 25 फ़ीसदी या उससे ज़्यादा शेयर हैं उसे और हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र लाना अनिवार्य होता है जिससे कंपनी के माइनॉरिटी शेयर होल्डर पहले से तय क़ीमत पर अपने शेयर अपनी मर्ज़ी से नए निवेशक को बेच सकें.
अब किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय के नाम कंपनी में 15.94 फ़ीसदी हिस्सेदारी है, जबकि उनकी पत्नी और राधिका रॉय का कंपनी में 16.32 फ़ीसदी हिस्सा है. प्रणय रॉय और राधिका रॉय ही आरआरपीआर के प्रोमोटर्स थे, इस कंपनी के पास एनडीटीवी के 29.18 फ़ीसदी शेयर थे. इसी के 99.5 फ़ीसदी शेयर अब अडाणी ग्रुप के पास हैं.
रिटेल निवेशकों के पास कंपनी के 12.57 फ़ीसदी शेयर हैं, कॉर्पोरेट संस्थाओं के पास एनडीटीवी का 9.61 फ़ीसदी हिस्सा है, जबकि फ़ॉरेन पोर्टफ़ोलियो इन्वेस्टर्स यानी एफ़पीआई के पास 14.7 फ़ीसदी शेयर हैं. अन्य के पास कंपनी की 1.67 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.
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