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इमरान ख़ान की प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाने पर पाकिस्तानी न्यूज़ चैनलों पर रोक- प्रेस रिव्यू
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरे का हवाला देते हुए, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वॉचडॉग ने शनिवार को टीवी चैनलों को देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रसारित ना करने का आदेश दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस ने पाकिस्तानी अख़बार डॉन के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीइएमआरए) ने न्यूज़ चैनलों को नोटिफ़िकेशन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि आदेश के उल्लंघन के मामले में वह चैनल का प्रसारण लाइसेंस निलंबित कर देगा. ऐसा करने से पहले चैनल को कारण बताओ नोटिस भी जारी नहीं किया जाएगा.
नियामक ने इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान ख़ान की ओर से की गई टिप्पणियों को "घृणित, निंदनीय और अपशब्द" बताया है.
नोटिफ़िकेशन में कहा गया है कि इमरान ख़ान ने "देश की संस्थानों के ख़िलाफ़ हत्या की साज़िश करने का आधारहीन आरोप लगाया हैं."
इसमें कहा गया है कि इस तरह के कंटेंट को प्रसारित करने से "लोगों में नफ़रत" पैदा होने या क़ानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका है.
बीते दिनों पीटीआई प्रमुख इमरान ख़ान पर गोली चलाई गई थी. फ़ायरिंग में उनके पैर में गोली लगी है. उन पर उस वक़्त गोली चलाई गई, जब वह वज़ीराबाद शहर में लॉन्ग मार्च की अगुआई कर रहे थे.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इमरान समेत कुल 14 लोग हमले में घायल हुए.
इमरान ख़ान ने हमले के बाद शुक्रवार को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम शहबाज़ शरीफ़, गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह ख़ान और पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल फ़ैसल नसीर हत्या की साज़िश का आरोप लगाया है. इसके साथ ही उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल से न्याय की अपील की है.
उम्मीदवार ना देखें, कमल को वोट देना मतलब मुझे वोट देना: मोदी
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़ हिमाचल प्रदेश में शनिवार को एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी को दिए जा रहे वोट से ख़ुद को जोड़ते हुए कहा कि "कमल का फूल को दिया गया हर वोट आपके आशीर्वाद के रूप में मोदी को मिलेगा."
सोलान में एक रैली के दौरान पीएम मोदी ने राज्य की जनता से कहा, "और याद रखिए, हमारा भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार कौन है, आपको किसी को याद रखने की ज़रूरत नहीं है, सिर्फ़ कमल का फूल याद रखिए. मैं आपके पास कमल का फूल लेकर आया हूं. जब आप वोट डालने आए और कमल का फूल देखें तो समझें कि ये बीजेपी है, इसका मतलब मोदी है. आपका हर एक मोट मोदी को आर्शीवाद के रूप में मिलेगा. "
डबल इंजन की सरकार का ज़िक्र करते उन्होंने कहा, "दिल्ली में मोदी हो तो यहां भी मोदी को मज़बूती मिलनी चाहिए."
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से नाख़ुश हूं: क़ानून मंत्री
केंद्रीय क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि वह इस बात से 'परेशान' रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में राजद्रोह क़ानून पर अस्थाई रोक लगाने का फ़ैसला लिया.
रिजिजू का कहना है कि सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि वह क़ानून में बदलाव करने के बारे में सोच रही है, इसके बावजूद कोर्ट ने ये फ़ैसला लिया.
क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू सुप्रीम कोर्ट के 11 मई के आदेश का ज़िक्र कर रहे थे, जिसमें भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने कहा था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए यानी राजद्रोह क़ानून को तब तक स्थगित रखा जाना चाहिए जब तक कि केंद्र सरकार इस प्रावधान पर पुनर्विचार नहीं करती.
इंडिया टूडे को दिए इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सरकार देशद्रोह क़ानून के प्रावधान को बदलने के बारे में सोच रही है. इसके बावजूद, अदालत ने देशद्रोह क़ानून पर रोक लगा दी. मैं इस फ़ैसले से नाख़ुश था."
केंद्र की मंज़ूरी के बाद फिर शुरू हुआ चीनी का एक्सपोर्ट
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक़ शनिवार को सरकार ने कोटा के आधार पर 31 मई, 2023 तक 60 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति को दे दी है. केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी.
पिछले तीन उत्पादन सत्र के औसत का 18.23 प्रतिशत हिस्सा निर्यात कोटे के तौर पर तय किया गया है.
इस मंज़ूरी के बाद चीनी मिलें ख़ुद या निर्यातकों के माध्यम से विदेशों में चीनी बेच सकती हैं. इसके अलावा मिल देश की दूसरी चीनी मिलों के निर्यात कोटा के साथ अदला-बदली भी कर पाएंगी.
केंद्र सरकार की अधिसूचना में कहा गया है कि "चीनी के अनियंत्रित निर्यात को रोकने के लिए और उचित मूल्य पर घरेलू खपत के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने 1 नवंबर से 31 मई, 2023 तक चीनी के निर्यात सीमा को तय करने का फ़ैसला लिया गया है."
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