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आरएसएस ने अपनी स्थापना के 100वें वर्ष तक के लिए क्या रोडमैप बनाया है?
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रयागराज में चार दिनों तक चली संघ की बैठक के दौरान 'एक समान राष्ट्रीय जनसंख्या नीति' और 'मतांतरण से घट रही है हिंदुओं की आबादी' जैसे बयानों की चर्चा हो रही है.
चर्चा इस बात की भी है कि प्रयागराज पहुंच कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाक़ात की है. बताया ये भी जा रहा है कि मोहन भागवत का यूपी में यह सबसे लंबे समय का कार्यक्रम था. लिहाज़ा यह भी चर्चा में है कि वो यूपी को इतना भाव क्यों दे रहे हैं? कुल मिलाकर इसे लेकर संघ के आगे के एजेंडे को लेकर कयास लगाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं.
क़रीब 24 करोड़ की आबादी के साथ उत्तर प्रदेश भारत का सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाला राज्य है और राजनीतिक गलियारे में ये तो कहा ही जाता है कि केंद्र की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुज़रता है क्योंकि 80 लोकसभा सीटों वाला यह राज्य लोकसभा में सबसे अधिक सांसद भेजता है.
तो केंद्र की सत्ता में काबिज़ होने के लिए उत्तर प्रदेश से अधिकतम संख्या में सीटें जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य रहता है.
कहीं न कहीं संघ, बीजेपी का पेरेंट ऑर्गेनाइजेशन है. बीजेपी की पिछली दो जीतों में भी संघ की अहम भूमिका रही है. तो माना ये भी जा रहा है कि इसी भूमिका के तहत ये आयोजन प्रयागराज में किया गया.
16 से 19 अक्टूबर 2022 को आयोजित संघ की इस अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में आगे की रणनीति पर चिंतन किया गया.
संघ ने बताया क्या है आगे की योजना?
2025 में संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने इस आयोजन के अंतिम दिन पत्रकारों को बताया कि "2024 के अंत तक देश के सभी मंडलों में शाखा पहुंचाने की योजना बनाई गई है. कुछ प्रांतों में यह काम चुनिंदा मंडलों में 99 प्रतिशत तक पूरा कर लिया है. चित्तौड़, ब्रज व केरल प्रांत में मंडल स्तर तक शाखाएं खुल गई हैं."
"पहले देश में 54,382 संघ की शाखाएं थीं, अब वर्तमान में 61,045 शाखाएँ लग रही हैं. साप्ताहिक मिलन में भी 4000 और मासिक संघ मंडली में विगत एक वर्ष में 1800 की बढ़ोतरी हुई है."
सरकार्यवाहक ने बताया, "2025 में संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं. संघ कार्य को लेकर समय देने के लिए देशभर में तीन हज़ार युवक शताब्दी विस्तारक के नाते निकले हैं. अभी एक हज़ार शताब्दी विस्तारक और निकलने हैं." (विस्तारक, प्रचारकों की तरह ही काम करते हैं लेकिन यह कम समय के लिए होते हैं. जैसे कि नौकरीपेशा या छात्र, जो 15 दिन या महीने भर के लिए पूरे समर्पण के साथ संघ के लिए काम करते हैं.)
'जनसंख्या में असंतुलन, मतांतरण से घट रहे हिंदू'
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दौरान संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संघ प्रमुख की विजयादशमी के भाषण के दौरान जनसंख्या असंतुलन की बात का उल्लेख किया और धर्मांतरण (मतांतरण) को लेकर बात की.
उन्होंने कहा कि देश की तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या चिंताजनक है और इस पर सबके साथ मिलकर, विचार कर सब पर लागू होने वाली जनसंख्या नीति बननी चाहिए.
वे बोले, "देश में जनसंख्या विस्फोट चिंताजनक है. इसलिए इस विषय पर समग्रता से व एकात्मता से विचार करके सब पर लागू होने वाली जनसंख्या नीति बननी चाहिए. मतांतरण से हिंदुओं की संख्या कम हो रही है. देश के कुछ हिस्सों में मतांतरण की साज़िश चल रही है."
इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश से घुसपैठ को जनसंख्या असंतुलन की वजह बताई. वे बोले, "उत्तर बिहार के पूर्णिया और कटिहार, पूर्वोत्तर के राज्यों में बांग्लादेश से घुसपैठ का असर देखेंगे. वहां इसी वजह से आंदोलन भी हुआ था."
जनसंख्या असंतुलन को उन्होंने विभाजन से भी जोड़ा. वे बोले, "जनसंख्या असंतुलन के कारण कई देशों में विभाजन की नौबत आ गई है. भारत का विभाजन भी जनसंख्या असंतुलन के कारण हो चुका है."
संघ का एजेंडा
सरसंघचालक मोहन भागवत का प्रयागराज में इतने दिन रहना भी संघ की उत्तर प्रदेश से जुड़ी प्राथमिकता को दर्शाता है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ख़ुद मोहन भागवत से मिलने गुरुवार को प्रयागराज पहुंचे.
आरएसएस की इस बैठक पर वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "दशहरा पर मोहन भागवत ने जो भाषण दिया था, यह बैठक उसकी आगे की कार्रवाई है. दशहरा में उन्होंने साल का अपना एजेंडा सामने रखा, और अब उसे वो जगह-जगह मज़बूती से आगे बढ़ा रहे हैं."
दशहरे पर मोहन भागवत ने कहा था कि देश में एक समग्र जनसंख्या नीति बननी चाहिए. ये सब पर समान रूप से लागू होनी चाहिए.
जनसंख्या विस्फोट और उसमें असंतुलन के मुद्दे को संघ जिस तरह से उठा रहा है उसे लेकर रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "देश की जनसंख्या बढ़ रही है और मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ रही है, यह तर्क वैज्ञानिक तरीक़े से फेल हो गया है. भारत की पॉपुलेशन ग्रोथ अपने 2.1 के प्रतिशत के टारगेट से पीछे है. और उससे नीचे जाएगा तो नुकसान होगा. आबादी वहीं बढ़ रही जहाँ ग़रीबी, अशिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है. चाहे वो हिन्दू हों या मुसलमान हों. और हक़ीक़त ये है कि मुसलमानों में यह तीनों फैक्टर्स ज़्यादा हैं."
जनसंख्या विस्फोट
15 अगस्त 2019 को लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बढ़ती जनसंख्या के मुद्दे पर 'एक वर्ग' का ज़िक्र किया था जो जनसंख्या विस्फोट की चुनौतियों को लेकर जागरूक है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि, "हमारे देश में आज भी, स्वयं प्रेरणा से, एक छोटा वर्ग, परिवार को सीमित करके, अपने परिवार का भी भला करता है. और देश का भला करने में बहुत बड़ा योगदान दे रहा है."
प्रधानमंत्री मोदी और संघ नेतृत्व के बयानों को समझाते हुए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह कहते हैं, "पहले के उनके (प्रधानमंत्री के) संबोधन में जनसंख्या का मुद्दा नहीं आता था. अब भागवत और होसबाले ने भी इसे उठाया."
वे कहते हैं, "मुझे लगता है अगले चुनाव से पहले इसे मुद्दा बनाने की दिशा में तैयारी चल रही है. हो सकता है संसद में क़ानून भी आए. यूं तो लंबे समय से डेमोग्राफ़िक इम्बैलेंस की बात संघ उठाता रहा है. लेकिन अब पहली बार कहा है कि विभाजन भी इसी के कारण हुआ."
जनसँख्या असंतुलन को विभाजन से जोड़ने पर रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "वही तो. उनका यह कहना कि जब मुस्लिम मेजॉरिटी वाले स्टेट थे तभी तो पाकिस्तान की मांग हुई थी. यह इन सबका इस्तेमाल करते हैं. आरएसएस अपने प्रोपगैंडा में माहिर है."
लव जिहाद, धर्मांतरण और जनसंख्या नियंत्रण पर क्या हैं मौजूदा और प्रस्तावित क़ानून
उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर "विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020" पारित किया गया जिसे आमतौर पर लव जिहाद क़ानून भी कहा जाता है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक "एक साल में धर्मांतरण विरोधी क़ानून के प्रावधानों के तहत 340 व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कुल 108 एफ़आईआर दर्ज की गई थी. इसी रिपोर्ट में यूपी पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 189 लोगों को गिरफ़्तार किया गया और 72 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई."
वहीं सितंबर 2022 में इस क़ानून के तहत पहली बार किसी को पांच साल की सज़ा सुनाई गई.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले प्रदेश के लॉ कमीशन ने राज्य की बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए एक बिल तैयार कर सरकार को सौंपा था. लेकिन अभी फिलहाल योगी सरकार ने उस बिल पर कोई कदम नहीं उठाया है. इस बिल में जनसंख्या नियंत्रण के लिए 'दो बच्चों की नीति' लागू किये जाने की बात की गई थी.
तो सवाल यह उठता है कि मौजूदा क़ानूनों, उनकी बुनियाद पर हुई कार्रवाई और जनसँख्या नियंत्रण से जुड़े प्रस्तावों के बावजूद संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे को सार्वजनिक मंचों से क्यों उठा रहा है?
इस पर रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "आरएसएस को मूलतः एक खलनायक चाहिए होता है. उन्होंने मुस्लिम समुदाय को उस तरह समाज में पेंट किया हुआ है. और बहुसंख्यक समुदाय को वो डर दिखाते हैं. तो ये आरएसएस का हिन्दुओं को उत्तेजित रखने का प्लान है और यह उनके डीएनए में है."
वहीं वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता आरएसएस के इन ताज़ा बयानों को एक सोची समझी स्ट्रेटेजी बताते हुए कहती हैं, "एक बहुत बड़ा हिस्सा उनकी शाखा में न जाते हुए भी उनके एजेंडे को फॉलो करने लगा है. और उनके नज़रिए के समान बनने लगा है, या बन गया है. सांप्रदायिक सद्भाव और देश में जो विविधता की बात करते हैं, उससे उन्हें ठेस लगती है. यही संघ की ताक़त है. अगर इस एजेंडे को अभी ख़ारिज कर दें तो इनकी ताक़त देखिए कहां पहुंच जाएगी."
रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "आरएसएस अतीत में देख रहे हैं. देश के भविष्य, उस पर विज़न क्या है, इसका कोई प्लान नहीं है. वो केवल डरा कर हिन्दुओं का वोट लेना चाहते हैं. और वह इन बयानों से सामने आता है. की मदरसों का सर्वे करिए, या जो मुस्लिम माफिया हैं, उन्हें निशाना बनाइए."
राजेंद्र सिंह कहते हैं, "इसमें कोई शक नहीं कि बीजेपी संघ के एजेंडे को धीरे-धीरे लागू कर रही है. तमाम ऐसे मुद्दे संघ के सर्किल में रहते थे अब पब्लिक डोमेन में चर्चाओं में हैं. तो उसके लिए जितनी भी ताक़त लगानी चाहिए वो संघ चोरी छुपे नहीं, बल्कि खुले आम लगाता है."
भाजपा के संगठन में संघ की मौजूदगी के बारे में राजेंद्र सिंह कहते हैं, "भाजपा में हर स्तर पर एक पद होता है. चाहे क्षेत्रिए हो, प्रादेशिक या राष्ट्रीय हो. संगठन मंत्री के स्तर पर संघ यहां अपने नुमाइंदे को डेपुटेशन पर भेजता है. वो संघ की विचारधारा को भाजपा में लागू करवाता है. लेकिन संघ एक बड़े एजेंडे पर काम कर रहा है. 2024 की भूमिका है. लेकिन 2024 के आगे की भूमिका भी वो देख रहे हैं. पिछले सात-आठ सालों में पॉपुलेशन एजेंडे में नहीं था, लेकिन अब है."
इस एजेंडे में सबसे प्रमुख क्या है?
सुमन गुप्ता कहती हैं, "जनसंख्या नियंत्रण इनके एजेंडे का एक बहुत बड़ा हिस्सा है जिसे 2024 के चुनाव से पहले वो लाना चाहते हैं ताकि माहौल में ये चीज़ें आ जाएं. इसका अंतिम लक्ष्य हिंदू-मुसलमान की राजनीति करना होता है."
अंत में रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, "आरएसएस एक दीर्घकालिक दृष्टि से अपना काम करती है. वो सामरिक तरीके भी अपनाती है लेकिन उसका आधार गहरा होता है."
वे कहते हैं, "आरएसएस ने कांग्रेस के विशाल पॉलिटिकल सिस्टम को धीरे-धीरे ख़त्म करने की कोशिशें कीं. उनके काम करने के लिए पैसा आ रहा, पिछले आठ सालों में आरएसएस के दफ़्तर सब पांच सितारा हो गए. तो आरएसएस की कोशिश हमेशा किसी भी तरीके से भाजपा को सत्ता में वापस लाने की होती है. उनको मालूम है सत्ता की ताक़त के ज़रिए ही अपना एजेंडा लागू कर सकते हैं. तो उसके लिए जो कुछ भी ज़रूरी होगा, वो करेंगे."
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