दिवाली से पहले ट्विटर पर एक तबका कर रहा हलाल का बहिष्कार

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भारत में दिवाली पर्व से पहले ट्विटर पर हलाल भोजन का बहिष्कार करने का आह्वान किया जा रहा है. इस्लामी तरीक़े से तैयार भोजन को हलाल कहा जाता है.
मंगलवार को हिंदू जनजागृति समिति से जुड़े एक व्यक्ति का वीडियो साझा किया जाना शुरू हुआ जिसमें मैकडोनल्ड्स, केएफ़सी, डोमिनोज़ और पिज़्ज़ा हट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का बहिष्कार करने की अपील की गई.
वीडियो में दावा किया गया कि ये कंपनियां 'हिंदुओं को हलाल भोजन खाने के लिए मजबूर करती हैं.'
हलाल फ्री दिवाली ( "#Halal_Free_Diwali") और बॉयकॉट हलाल प्रॉडक्ट्स (#BoycottHalalProducts) जैसे हैशटैग के साथ इस तरह की पोस्ट ऑनलाइन शेयर की जा रही हैं.
इनके साथ हलाल उत्पादों के बारे में भ्रामक जानकारियों वाला कंटेंट भी शेयर किया जा रहा है.

ऑनलाइन मॉनिटरिंग टूल ट्रैक माय हैशटैग के मुताबिक अधिकतर ट्वीट हिंदी या इंग्लिश में किए गए हैं जबकि कुछ कन्नड़ और मराठी भाषा में भी हैं.
कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ रेस्त्रां के बाहर हिंदूवादी समूहों ने प्रदर्शन करके हलाल मीट ना पेश करने की मांग भी की है.
हिंदूवादी समूह ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हलाल मांस को प्रतिबंधित करने की मांग भी की है.
बेंगलुरू के मांस बिक्री क्षेत्र रसल मार्केट के महासचिव मोहम्मद इदरीस चौधरी का कहना है कि यदि हलाल मांस पर प्रतिबंध लगता है तो व्यापारियों को रोज़ाना दो से तीन लाख रुपए तक का नुक़सान हो सकता है.
बीबीसी से बात करते हुए चौधरी ने कहा, "सिर्फ़ हमारे बाज़ार में ही 500 से अधिक दिहाड़ी मज़दूर काम करते हैं. अगर हलाल मांस पर प्रतिबंध लगता है तो उन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. वो कोविड महामारी में हुए नुक़सान से अभी उबर ही रहे हैं."
वो कहते हैं, "मांस के लिए हलाल प्रमाण पत्र का ग़लत मतलब निकाला जा रहा है और इस बारे में भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही हैं."
दावाः हलाल प्रमाणित मांस में बीफ़ भी होता है

ऐसे पोस्ट भी शेयर किए जा रहे हैं जिनमें हलाल मांस में बीफ़ होने का दावा भी किया गया है. हिंदू बीफ़ नहीं खाते हैं.

हलाल प्रमाणित मांस में ज़रूरी नहीं है कि बीफ़ ही हो. हालांकि इस्लामी क़ानून के तहत बीफ़ खाने पर कोई रोक नहीं है.
हलाल सिर्फ़ खाने के लिए ही इस्तेमाल होने वाला शब्द नहीं है बल्कि हर वो चीज़ जिसकी इस्लाम के तहत अनुमति हो उसे हलाल कहा जाता है.
मुसलमानों के लिए शराब पीना और सुअर का मांस खाना प्रतिबंधित होता है. उन उत्पादों को हलाल प्रमाणित कहा जाता है जिनमें ये दोनों नहीं होते हैं. उदाहरण के तौर पर कॉस्मेटिक, दवाइयां और स्वास्थ्य से जुड़े दूसरे उत्पाद भी हलाल प्रमाणित हो सकते हैं.
दावा- हलाल से सिर्फ़ मुसलमानों को रोज़गार मिलता है

कई सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसे पोस्ट किए जा रहे हैं जो हलाल को छोड़ने के लिए भ्रामक वजहें बता रहे हैं.
एक दावा ये भी किया जाता है कि हलाल प्रमाणित मांस की वजह से हिंदुओं का रोज़गार और नौकरियां छिनती हैं क्योंकि 'इससे सिर्फ़ मुसलमानों को ही रोज़गार मिलने की गारंटी होती है.'

हाल ही में, एक भारतीय कंपनी हिमालय को हलाल के खिलाफ अभियान में निशाना बनाया गया था और दावा किया गया था कि कंपनी ने अपने उत्पादों के लिए हलाल प्रमाण पत्र हासिल किया क्योंकि इसके मालिक मुसलमान हैं.
हलाल प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्था जमियत उलेमा हलाल फ़ाउंडेशन के मुताबिक ऐसी कई कंपनियों ने हलाल प्रमाण पत्र हासिल किए हैं जिनके मालिक मुसलमान नहीं हैं.
हालांकि हिमालय के मालिक मुसलमान ही हैं, लेकिन भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल रिलायंस, टाटा और अडानी विल्मार लिमिटेड ने भी अपने कई उत्पादों के लिए हलाल प्रमाण पत्र हासिल किए हैं. इनमें खाद्य तेल और दूसरे खाद्य पदार्थ शामिल हैं.
इन बड़ी कंपनियों के मालिक हिंदू और दूसरे धर्मों के लोग ही हैं. हालांकि इस बारे में कोई डाटा नहीं है कि इन कंपनियों में कितने हिंदू या मुसलमान कर्मचारी हैं लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक भारत के निजी क्षेत्र में मुसलमान कर्मचारियों की संख्या उनकी आबादी के अनुपात में कम है.
दावा- हलाल प्रमाण पत्र अर्थव्यवस्था पर मुसलमानों के क़ब्ज़े की साज़िश

हिंदूवादी समूह और उनके पीछे चलने वाले लोग ये दावा करते हैं कि हलाल प्रमाण पत्र से मुसलमानों के मालिकाना हक़ वाले कारोबार को फ़ायदा पहुंचता है और वो भारत की अर्थव्यवस्था पर क़ब्ज़ा कर लेंगे.

हक़ीक़त

ये सच नहीं है कि सिर्फ़ मुसलमानों की कंपनियां हलाल प्रमाण पत्र हासिल करती हैं.
दुनियाभर के बाज़ारों में अपना सामान बेचने वाली कंपनियां वैश्विक नियमों का पालन करती हैं. ख़ासकर आयात करने वाले देश के नियमों का. मध्य पूर्व के देशों में उत्पाद निर्यात करने के लिए हलाल प्रमाण पत्र ज़रूरी होता है. या उन देशों के लिए भी ज़हां उत्पादों के लिए हलाल प्रमाण पत्र ज़रूरी होता है.
दुनियाभर में हलाल उत्पादों का बाज़ार बड़ा हो रहा है. मार्केट रिसर्च कंपनियों टेकनेवियो की एक रिपोर्ट के मुताबिक हलाल कॉस्मेटिक और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों का बाज़ार 2021 से 2025 के बीच 8 प्रतिशत तक हो जाएगा.

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