बीएचयू: बीफ़ पर पूछे गए दो सवालों पर भड़के छात्र, कुलपति को हटाने की मांग - प्रेस रिव्यू

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक परीक्षा में बीफ़ को लेकर पूछ गए सवाल पर गुरुवार को हंगामा हो गया. यहां केटरिंग और होटल मैनेजमेंट के पेपर में बीफ़ से जुड़े दो सवाल पूछे गए थे जिससे नाराज़ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

अंग्रेज़ी अख़बार द टेलिग्राफ़ के मुताबिक प्रदर्शनकारी छात्रों ने कुलपति सुधीर कुमार जैन को निलंबित करने की मांग की है.

ये सवाल बैचलर ऑफ़ वोकेशन (फूड प्रोसेसिंग एंड मैनेजमेंट) कोर्स की दूसरे समेस्टर की परीक्षा में पूछे गए थे. विरोध करने वालों का कहना था कि वो किसी छात्र संगठन से नहीं जुड़े हैं.

उन्होंने गुरुवार को चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने ज़िम्मेदार व्यक्ति को सज़ा नहीं दी तो विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो जाएगा.

प्रदर्शनकारियों ने इस सवाल को 'धर्म विरोधी' बताते हुए कुलपति को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया. कुलपति सुधीर कुमार जैन को पिछले साल इफ़्तार में शामिल होने के लिए भी विरोध का सामना करना पड़ा था. तब एबीवीपी ने इस पर आपत्ति जताई थी.

बैचलर ऑफ़ वोकेशनल के छात्र सुंदर तिवारी अख़बार से कहते हैं, ''दूसरे पेपर में दो आपत्तिजनक सवाल थे. तीसरे नंबर पर दिए गए सवाल में पूछा गया था कि बीफ़ कितनी तरह का होता है. परिभाषित करें.''

''दूसरा सवाल था- स्टॉक बनाने के लिए क्या इस्तेमाल होता है? पानी, बूयॉन, बीफ़ शोरबा, चिकन शोरबा.''

स्टॉक एक तरह का शोरबा होता है जो कई पकवान बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, खासतौर पर सूप और सोसेज.

परीक्षा

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लेकिन, पहचान छुपाने की शर्त पर विभाग के शिक्षक ने अख़बार को बताया, ''हम छात्रों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के लिए तैयार कर रहे हैं. हमें उन्हें सबकुछ सिखाना होगा, बीफ़ से लेकर पालक तक.''

विश्वविद्यालय में एमए इतिहास के एक छात्र राकेश चुतर्वेदी कहते हैं, ''कुछ परीक्षार्थियों ने सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र डाल दिया है. हमने कुलपति कार्यालय में इन सवालों के विरोध में एक पत्र दिया है. हम एक या दो दिनों में अपने अगले कदम पर फ़ैसला करेंगे.''

वहीं, विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार अरुण कुमार सिंह ने मीडिया को बताया, ''हम एक शिकायत मिली है और हम उस पर विचार कर रहे हैं.''

उत्तर प्रदेश में नियमों की बात करें तो यहां गोकशी और गोमांस खाना अवैध है.

मदरसे

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यूपी में मिले करीब 7000 अपंजीकृत मदरसे

उत्तर प्रदेश से ही जुड़ी एक और ख़बर है जिसमें मदरसों पर किए गए सर्वे के नतीजों के बारे में बताया गया है. अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है कि राज्य में हुए सर्वे में 7189 मदरसों को अपंजीकृत पाया गया है. इन मदरसों में 16 लाख छात्र पढ़ाए जाते हैं.

उत्तर प्रदेश एजुकेशन बोर्ड के अध्यक्ष इफ़्तिखार अहमद जावेद ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन मदरसों में करीब तीन हज़ार शिक्षक और अन्य स्टाफ़ काम करता है.

इफ़्तिखार अहमद जावेद सर्वे ने इन नतीजों को हकीकत से पर्दा उठाने वाला बताया है.

उत्तर प्रदेश मदरसा एजुकेश बोर्ड के मुताबिक राज्य में 16513 पंजीकृत मदरसे हैं जिनमें 20 लाख छात्र पढ़ते हैं. इनमें से 560 मदरसों को यूपी सरकार से मदद मिलती है.

अपंजीकृत मदरसों, उनके फंड, आय के स्रोत, उन्हें चलाने वाली संस्थाओं और क्या पढ़ाया जा रहे है, ये पता करने के लिए 10 सितंबर को इस सर्वे की शुरुआत हुई थी.

इफ़्तिखार अहमद जावेद का कहना है, ''इन (अपंजीकृत) मदरसों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि अब भी और जानकारियां सामने आ रही हैं. अगले कुछ दिनों में बहराइच और गोंडा में भी सर्वे किया जाएगा. यहां भारी बारिश के कारण सर्वे रुक गया था.''

वैक्सीन

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सीरम इंस्टीट्यूट की 10 करोड़ वैक्सीन हुई बेकार

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के मालिक और सीईओ अदार पूनावाला ने गुरुवार को कहा कि कंपनी ने पिछले साल ही कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन रोक दिया है. उस समय कंपनी के पास करीब 10 करोड़ वैक्सीन स्टॉक में थीं लेकिन एक्सपायर होने के कारण उन्हें फेंकना पड़ा.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया लिखता है कि अदार पूनावाला पुणे में विकासशील देशों के वैक्सीन उत्पादकों की एक सालाना बैठक में शामिल हुए थे. उन्होंने गुरुवार को मीडिया को बताया, ''दिसंबर 2021 से हमने उत्पादन बंद कर दिया है. बूस्टर वैक्सीन की कोई मांग नहीं है क्योंकि लोग कोविड से तंग आ चुके हैं. सच बताऊं तो मैं भी तंग आ चुका हूं. ''

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने कोवोवैक्स नाम से एक और वैक्सीन बनाई है. पूनावाला ने कहा, ''कोवोवैक्स को दो हफ़्तों में अनुमति दे दी जाएगी. जब लोग हर साल फ्लू के लिए वैक्सीन लेते हैं तो वो उसके साथ कोविड वैक्सीन भी ले सकते हैं. लेकिन, भारत में पश्चिमी देशों की तरह हर साल फ्लू की वैक्सीन लेने का चलन नहीं है.''

इस प्रेस मीट में विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन भी मौजूद थीं. उन्होंने कोरोना के वैरिएंट्स से निपटने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों और ख़तरे वाले आयु समूह का 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन कराने पर ज़ोर दिया.

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