मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत के एलान से पहले शशि थरूर कैंप ने क्यों जताई आपत्ति

शशि थरूर

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कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव मल्लिकार्जुन खड़गे जीत गए हैं. उन्हें चुनाव में 7,897 वोट मिले हैं, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी शशि थरूर को 1072 वोट मिले हैं.

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे को जीत की बधाई देते हुए ट्वीट किया है.

इस चुनाव में दोनों नेताओं के नाम सामने आने के बाद से ये कयास लगाए जा रहे थे कि इस चुनाव में खड़गे को जीत मिल सकती है.

मल्लिकार्जुन खड़गे को गांधी परिवार के क़रीबी कांग्रेस नेताओं में गिना जाता है. वहीं, शशि थरूर कांग्रेस के उन 23 नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्हें जी-23 कहकर पुकारा जाता है.

कांग्रेस में संगठनात्मक सुधारों की अपील करने वाले इस गुट के ज़्यादातर शीर्ष नेता जैसे कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आज़ाद पार्टी छोड़ चुके हैं.

हालांकि, शशि थरूर ने पार्टी में रहते हुए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा. थरूर कैंप ने नतीजे आने से पहले ही इस चुनाव की ज़िम्मेदारी संभाल रहे कांग्रेस नेता मधूसूधन मिस्त्री को पत्र लिखकर चुनाव प्रक्रियाओं पर बड़े सवाल उठाए हैं.

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'यूपी में हुई बड़ी धांधली'

थरूर कैंप ने अपने पत्र में आरोप लगाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया है.

शशि थरूर के हवाले से लिखे इस पत्र में कांग्रेस नेता सलमान सोज़ ने कहा है, "हम ये रेखांकित करना चाहते हैं कि हमारे पास इस बात के कोई सुबूत नहीं हैं कि मल्लिकार्जुन खड़गे को ये जानकारी है कि उनके समर्थक उत्तर प्रदेश में चुनावी धांधली में किस तरह लिप्त रहे."

"हम ये मानते हैं कि अगर उन्हें इसकी जानकारी होती तो वे ये सब उत्तर प्रदेश में नहीं होने देते. वह उस चुनाव पर धब्बा नहीं लगने देते जो कांग्रेस पार्टी के लिए इतना अहम है."

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मल्लिकार्जुन खड़गे

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बैलट बॉक्स में आधिकारिक सील न होना

थरूर कैंप ने पत्र में लिखा है कि चुनाव के लिए बनाए गए नियम संख्या 14 के तहत मतदान के बाद बैलट बॉक्स को केंद्रीय चुनाव एजेंसी की आधिकारिक सील से सीलबंद किया जाएगा. लेकिन उत्तर प्रदेश में इस नियम का उल्लंघन किया गया.

थरूर कैंप ने दावा किया है कि "मतदान के दिन हमने पीआरओ और एपीआरओ के समक्ष बैलट बॉक्स की ठीक ढंग से सीलिंग न किए जाने का मुद्दा उठाया था. इस पर हमें बताया गया कि इसे बाद में लगाया जाएगा. और किसी मौके पर पीआरओ, एपीआरओ, डीपीआरओ ने पोलिंग एजेंट के समक्ष सीरियल नंबर वाली आधिकारिक सील से जुड़ी समस्या को नहीं उठाया."

"प्रणव झा ने 17 अक्टूबर को इस मुद्दे पर बात करते हुए संकेत दिया कि उन्हें सिर्फ़ अनाधिकारिक प्लास्टिक सील मिली. हम ये स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि आपका कार्यालय जिसने इतने मुश्किल हालातों में चुनाव आयोजित कराए, वो सिर्फ़ एक राज्य में सफेद अनाधिकृत सील भेज देगा."

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मतदान केंद्र पर अनधिकृत लोगों की मौजूदगी

इस पत्र में लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश में मतदान केंद्रों पर अनधिकृत लोग मौजूद थे.

इस पत्र में दावा किया गया है कि "चुनाव नियमों के तहत मतदान अधिकारी उम्मीदवारों के लिए एक पोलिंग एजेंट को लाने की अनुमति देगा ताकि वह उम्मीदवार की तरफ़ से मतदान प्रक्रिया देख सके. हालांकि, मतदान प्रक्रिया की गोपनीयता बरक़रार रखने के लिए हर संभव कोशिश की जाए. लेकिन उत्तर प्रदेश में तीन अतिरिक्त लोग थे जो मतदान केंद्र में बैठे थे और पीठासीन अधिकारी की तरह व्यवहार कर रहे थे."

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शशि थरूर क्यों हारे

इस चुनाव में शशि थरूर की हार की वजहों को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं.

लेकिन कांग्रेस की राजनीति को पिछले काफ़ी समय से देख रहे विनोद शर्मा मानते हैं कि इसके लिए जी-23 और जी-3 ग्रुप की हिस्सेदारी ज़िम्मेदार है.

वह कहते हैं, "शशि थरूर की हार और खड़गे की जीत की वजह ये है कि खड़गे गांधी परिवार और जी-23 को एक ही मंच पर ले आए हैं. उनका नाम आगे बढ़ाने वाले गांधी परिवार के क़रीबी लोगों में शुमार हैं. शुरुआत में थरूर साहब जी-3 यानी गांधी परिवार के क़रीब थे."

"थरूर ने जब चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया तो उन्होंने जी-3 ग्रुप की मदद के लिए संपर्क किया. इस पर उनसे कहा गया कि संयुक्त उम्मीदवार उतारा जाए. इस पर थरूर ने कहा कि वे चुनाव लड़ने का फ़ैसला कर चुके हैं. जी-3 ग्रुप को लगा कि थरूर ने ये फ़ैसला उस गुट की आम सहमति के साथ नहीं लिया है."

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कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव से जुड़ी ख़ास बातें:-

  • इस चुनाव की ख़ासियत है कि पिछले 22 सालों में पहली बार अध्यक्ष पद के चुनाव में मतदान कराने की नौबत आई है. इससे पहले साल 1998 में पार्टी ने सीताराम केसरी को अध्यक्ष पद से हटाकर से सोनिया गांधी को अध्यक्ष बना दिया था. सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी को भी पार्टी ने बिना चुनाव के ही अध्यक्ष बना लिया था.
  • कांग्रेस के अध्यक्ष पद के इस चुनाव की एक और ख़ासियत ये है कि सीताराम केसरी के बाद पहली बार गांधी-नेहरू परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति पार्टी का अध्यक्ष बना है.
  • इस मतदान के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रही 'भारत जोड़ो यात्रा' में भी एक मतदान केंद्र बनाया गया.
  • चुनाव से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर ने देश भर में अपना प्रचार अभियान चलाया.
  • शशि थरूर ये आरोप लगा चुके हैं कि ये मुक़ाबला बराबरी का नहीं था क्योंकि पार्टी की कई राज्य इकाइयों के प्रमुखों ने उनसे मुलाक़ात नहीं की, लेकिन खड़गे का स्वागत किया.
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(कॉपी - अनंत प्रकाश)

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