गांबिया में बवाल: अफ़्रीका कैसे पहुंचा भारत में बना कफ़ सिरप

मैडन फ़ार्मास्युटिकल के कफ़ सीरप

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    • Author, श्रुति मेनन
    • पदनाम, बीबीसी रियलिटी चेक

अफ़्रीकी देश गांबिया में लगभग 70 बच्चों की मौत की जांच के तार भारत में बने कफ़ सिरप से जुड़ रहे हैं. इसने भारत में दवाओं के उत्पादन और व्यापार के प्रभावशाली नियमन से जुड़ी चिंताओं को जन्म दिया है.

गांबिया से आई रिपोर्ट्स में बच्चों को किडनी से जुड़ी जटिलताएं सामने आने की बात है.

इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कफ़ सिरप बनाने वाले चार से ज़्यादा ब्रांड्स पर वैश्विक अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि किडनी को नुकसान पहुंचाने में इनकी भूमिका हो सकती है.

लैब में इन दवाओं (कफ़ सिरप) की जांच के दौरान पाया गया है कि इनमें दूषित पदार्थों डाइथाइलेन ग्लाइकोल और इथाइलेन ग्लाइकोल की मात्रा अस्वीकार्य स्तर पर है.

सरकारी संस्थाओं और कफ़ सीरप बनाने वाली कंपनी मैडन फ़ार्मास्युटिकल्स के मुताबिक़, ये कफ़ सिरप सिर्फ़ गांबिया भेजे गए थे.

कौन है कफ़ सिरप बनाने वाली कंपनी

कफ़ सीरप

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मैडन फ़ार्मास्युटिकल्स कहती है कि वह दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मानकों का पालन करती है.

लेकिन इस कंपनी के कुछ उत्पाद राष्ट्रीय और प्रादेशिक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप भी नहीं पाए गए हैं.

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि -

ये कंपनी उन चालीस भारतीय दवा कंपनियों में शामिल है जिन्हें वियतनाम ने कम गुणवत्ता वाली दवाएं बेचने की वजह से काली सूची में डाला हुआ है.

हरियाणा स्थित इस कंपनी ने गांबिया में हुई मौतों पर हैरानी जताते हुए कहा है कि वह 'भारतीय ड्रग कंट्रोलर और हरियाणा ड्रग कंट्रोलर जैसी स्वास्थ्य संस्थाओं के नियमों का तत्परता के साथ पालन कर रही थी."

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हालांकि, कंपनी ने इससे ज़्यादा कुछ भी कहने से इनकार किया है क्योंकि औषधि नियामक संस्थाएं अभी भी जांच कर रही हैं.

हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बीबीसी को बताया है कि सैंपलों को टेस्टिंग के लिए भेज दिया है और कुछ भी ग़लत पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.

भारत में दवा उत्पादन में नियमन कितना प्रभावशाली

भारत दुनिया की एक तिहाई दवाओं का उत्पादन करता है जिनमें से ज़्यादातर जेनरिक दवाएं होती हैं.

भारत अफ़्रीकी, लैटिन अमेरिकी और अन्य एशियाई देशों में दवाओं का बड़ा सप्लायर है.

भारतीय दवाओं के प्रॉडक्शन प्लांट एवं प्रक्रियाओं को गुणवत्ता नियंत्रण के कड़े नियमों का पालन करना होता है.

भारतीय दवा उत्पादन प्लांट

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लेकिन भारतीय कंपनियों को अपने कुछ प्लांट्स पर विदेशी नियामकों जैसे अमेरिकी खाद्य और दवा प्रशासन (एफ़डीए) की ओर से आलोचनाओं के साथ-साथ प्रतिबंधों का भी सामना करना पड़ा है.

भारतीय फ़ार्मास्युटिकल संस्थाओं पर किए गए एक अध्ययन में शुद्धता के मानकों का पालन सुनिश्चित करने में रुचि के अभाव, लापरवाही के साथ नियमों की व्याख्या और पर्यवेक्षक संस्थाओं को कम कोष दिए जाने की ओर इशारा किया गया था.

सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े दिनेश ठाकुर भी गुणवत्ता से जुड़े नियमों की अवहेलना करने पर अपेक्षाकृत रूप से हल्की सज़ा लगभग बीस हज़ार रुपये जुर्माना और दो साल की सज़ा दिए जाने की ओर इशारा करते हैं.

वह कहते हैं, "जब तक कोई ये साबित न कर दे कि कम गुणवत्ता वाली दवा किसी शख़्स की मौत होने के लिए सीधे रूप से ज़िम्मेदार थी, तब तक इसी तरह की सज़ा दी जाती है."

इसके साथ ही भारत उन देशों में शामिल नहीं है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की दवाओं के नियमन करने वाली राष्ट्रीय संस्थाएं की बॉडी है.

स्वास्थ्य के क्षेत्र की दानार्थ संस्था एमएसएफ़ की लीना मेंघाने कहती हैं, "इसकी वजह से दवाओं के उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में नियमों का पालन एक ढंग से नहीं हो पाता है."

कफ़ सीरप

क्या गांबिया को दवाएं टेस्ट करनी चाहिए थी?

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है.

लेकिन ये भी कहा है 'ये सामान्य प्रक्रिया है कि आयात करने वाला देश आयातित चीजों की गुणवत्ता जांचता है और खुद को गुणवत्ता से संतुष्ट करता है."

लेकिन गांबिया की मेडिसिन नियंत्रण एजेंसी के कार्यकारी निदेशक मार्किउ जेनाह कायरा ने कहा है कि उनकी संस्था कफ़ सिरप की जगह मलेरिया से बचाने वाली दवाओं, एंटी-बायोटिक और दर्द-निवारक दवाओं को प्राथमिकता देती है.

बीबीसी न्यूज़ ने इस बारे में और स्पष्टता के लिए इस एजेंसी से संपर्क किया था लेकिन किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली.

गांबिया के राष्ट्रपति एडामा बेरो ने कहा है कि वह इस मामले की तह तक जाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने खाद्य एवं दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय लैब बनाने का एलान किया है.

उन्होंने कहा है कि गांबिया कम गुणवत्ता वाली दवाओं का आयात रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगा.

एमएसएफ़ चाहती है कि वो देश जिनके पास बेहतर टेस्टिंग क्षमताएं हैं, वे कम आय वाले देशों जैसे गांबिया की मदद करें.

मेंघाने कहती हैं, "ये सिर्फ़ आयात करने वाली कंपनी की ज़िम्मेदारी नहीं है."

इस घटना के बाद नाइजीरिया की राष्ट्रीय खाद्य एवं औषधि प्रशासक संस्था भारत से दवाएं भेजे जाने से पहले स्वीकृत एजेंट्स के ज़रिए उनकी गुणवत्ता की पुष्टि कराने की मांग कर रही है.

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